पंजाब कांग्रेस में मची हलचल के बीच सिद्धू ने दिखाई ताकत, 30 विधायकों से की मुलाकात
नई दिल्ली, 18 जुलाई। पंजाब कांग्रेस में लगातार चल रही सियासी उठापटक के बीच नवजोत सिंह सिद्धू ने शनिवार को पार्टी के 30 विधायकों संग मुलाकात की। कांग्रेस पार्टी में अपनी स्थिति को मजबूत करने की लगातार कोशिश कर रहे नवजोत सिंह सिद्धू ने कांग्रेस के विधायकों से मुलाकात करके अपनी शक्ति का भी प्रदर्शन किया। माना जा रहा है कि विधायकों संग मुलाकात के जरिए सिद्धू मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को सीधे तौर पर चुनौती दे रहे हैं। सिद्धू पहले ही खुले तौर पर पंजाब कांग्रेस के शीर्ष नेताओं पर निशाना साध चुके हैं। इसके साथ ही सिद्धू ने आज पार्टी के विधायक मदनलाल के घर पहुंचे हैं, जहां उन्होंने 6 अन्य विधायकों से भी मुलाकात की जिसमे प्रदेश के मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा भी मौजूद हैं।
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शक्ति प्रदर्शन
सिद्धू और अमरिंदर सिंह के बीच चल रही तनातनी के बीच माना जा रहा है कि पंजाब कांग्रेस के लोकसभा और राज्यसभा के सांसद आज प्रताप सिंह बाजवा के घर पर बैठक करेंगे। इस बैठक के बाद नेता सोनिया गांधी से मुलाकात करेंगे और सिद्धू को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष नहीं बनाए जाने की मांग करेंगे। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की बात करें तो उन्होंने साफ कर दिया है कि मैं फौजी हूं, मैं कभी भी मैदान नहीं छोड़ता। इन शब्दों के साथ उन्होंने साफ कर दिया है कि वो सिद्धू के खिलाफ चल रही पॉवर बैटल में हार नहीं मानेंगे।
कैप्टन का खेमा हथियार डालने को नहीं तैयार
सिद्धू को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाए जाने की अटकलों के बीच सिद्धू ने शनिवार को कई विधायकों से मुलाकात की। उन्होंने कांग्रेस के महासचिव हरीष रावत और वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। इन मुलाकातों के जरिए वह लगातार अमरिंदर सिंह की मुश्किल को बढ़ा रहे हैं। इससे पहले मुख्यमंत्री ने एक पत्र सिद्धू के बारे में लिखकर कहा कि सिद्धू की वर्किंग स्टाइल से पार्टी दो खेमों में बंट जाएगी। लेकिन रिपोर्ट की माने तो कांग्रेस आला कमान ने सिद्धू को साफ कर दिया है कि पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष के तौर पर उन्हें सभी नेताओं को साथ लेकर चलना होगा और उन्हें मुख्यमंत्री को भी अपने साथ लाना होगा।
चुनाव से पहले आंतरिक कलह
सिद्धू और अमरिंदर सिंह के बीच चल रही नूराकुश्ती के बीच कांग्रेस आला कमान ने साफ कर दिया है कि बतौर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को उनके पद से नहीं हटाया जाएगा। प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होना है, ऐसे में कुछ ही महीने ही चुनाव में बचे हैं लेकिन कांग्रेस पार्टी आंतरिक कलह से जूझ रही है। एक तरफ जहां अमरिंदर सिंह सिद्धू के साथ चलने को तैयार नहीं है तो दूसरी ओर सिद्धू कैप्टन को मुख्यमंत्री के पद से हटाना चाहते हैं।












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