Death Anniversary: 'मौत पर राजीव की वो भविष्यवाणी सच साबित हुई'

लखनऊ। चारोंं ओर धुआं, मांस के लोथड़े, लोगों की चीख-पुकार, धमाके की कालिख, इधर-उधर भागते दौड़ते लोग लेकिन लोगों की नजरें इस बीच राजीव को ही तलाश रहीं थी। लेकिन राजीव शायद इस दर्दनाक घटना को पहले से ही जानते थे। इंदिरा गांधी के प्रधान सचिव रहे पीसी एलेक्जेंडर की किताब ''माई डेज विद इंदिरा गांधी'' में उन्होंने एक बात का जिक्र करते हुए लिखा है कि इंदिरा गांधी की हत्या के कुछ घंटों बाद ही उन्होंने ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट के बरामदे में सोनिया और राजीव को आपस में बहस करते हुए देखा।

आखिर क्यों राजीव जैसे बिल्कुल नहीं हैं राहुल गांधी?

राजीव सोनिया से कह रहे थे कि पार्टी चाहती है कि मैं पीएम पद की शपथ लूं। सोनिया ने कहा किसी भी कीमत पर नहीं, वो तुम्हें भी मार डालेंगे। इस पर राजीव ने जवाब देते हुए कहा कि मेरे पास कोई विकल्प नहीं है। मैं तो वैसे भी मारा जाऊंगा। दरअसल हम इस किस्से का जिक्र इसलिए कर रहे हैं क्योंकि राजीव की बात सात सालों बाद सच साबित हुई।

विंसेट जॉर्ज ने दी थी सोनिया को राजीव की मौत की खबर

21 मई, 1991 को दस बज कर 21 मिनट पर तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में भारतीय राजनीति की मुख्यधारा मानी जाने वाली कांग्रेस का एक स्तंभ हमेशा हमेशा के लिए चरमराकर गिर गया। करीबन तीस वर्षीय एक लड़की फूलों का माला लेकर राजीव की ओर बढ़ी और पैर छूने की कोशिश की। वैसे ही एक जोरदार धमाके के साथ तमाम उम्मीदें खो गईं। मंच पर अतिथि महोदय यानि की राजीव के सम्मान में गाए जा रहे गीत ''राजीव का जीवन हमारा जीवन है'' की पंक्तियां एकदम से मूक हो गईं।

सोनिया नहीं चाहती थीं कि राजीव बनें पीएम

राजीव के निजी सचिव विंसेंट जॉर्ज ने सोनिया को बताया कि मैडम चेन्नई में एक बम ब्लॉस्ट हुआ है। जिस पर सोनिया का सवाल राजीव की फिक्र में था कि ''इज ही अलाइव'' पर जॉर्ज की चुप्पी ने सोनिया को अंदर तक तोड़कर रख दिया। सोनिया जोर जोर से चीखकर रोने लगीं।

जब लजाते हुए बोलीं सोनिया.. हैंडसम थें राजीव इसलिए तो की थी शादी

श्रीपेरंबदूर में उस भयंकर धमाके के समय तमिलनाडु कांग्रेस के तीनों चोटी के नेता जीके मूपनार, जयंती नटराजन और राममूर्ति मौजूद थे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बाद में जीके मूपनार ने एक जगह लिखा, "जैसे ही धमाका हुआ लोग दौड़ने लगे। मेरे सामने क्षत-विक्षत शव पड़े हुए थे। राजीव के सुरक्षा अधिकारी प्रदीप गुप्ता अभी ज़िंदा थे। उन्होंने मेरी तरफ़ देखा. कुछ बुदबुदाए और मेरे सामने ही दम तोड़ दिया मानो वो राजीव गाँधी को किसी के हवाले कर जाना चाह रहे हों। मैंने उनका सिर उठाना चाहा लेकिन मेरे हाथ में सिर्फ़ मांस के लोथड़े और ख़ून ही आया। मैंने तौलिए से उन्हें ढक दिया।"

देखें: राजीव-सोनिया की शादी का दुर्लभ ब्लैक एंड व्हाइट वीडियो...इट्स अमेजिंग

कांग्रेस के सचेतक पीटर अल्फांसो ने राज्य विधानसभा में इसका खुलासा किया। उन्होंने मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि द्वारा श्रीलंका में संघर्ष विराम की माँग को लेकर पेश एक राजनीतिक प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान दिवगंत नेता जीके मूपनार के हवाले से कहा कि वर्ष 1987 में भारत-श्रीलंका संधि के बाद राजीव गाँधी ने लिट्टे के नेता को अपनी बुलेटप्रूफ जैकेट भेंट की थी और गर्मजोशी से सीने से लगाकर शुभकामनाएँ दी थीं। लेकिन इसी संगठन ने राजीव की हत्या भी कर दी थी।

Video: किताब में खुलासा..राजीव ने पीएम बनने से पहले प्रणब से पूछा था..

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