सेना के जवान हथियारों से कहीं अधिक मायने रखते हैं: पर्रिकर
पणजी। रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने रविवार को कहा कि देश की रक्षा के मामले में सेना के जवान हथियारों से कहीं अधिक मायने रखते हैं, वे अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। पर्रिकर ने भारतीय सशस्त्र बल में जवानों द्वारा आत्महत्या के मामलों के लिए मानव-प्रबंधन की समस्या को जिम्मेदार बताया।

पर्रिकर ने यहां संवाददाताओं को बताया कि मेरा मानना है कि देश की रक्षा के लिए सैनिक हथियारों से कहीं अधिक मायने रखते। गोवा के मुख्यमंत्री रह चुके पर्रिकर ने सेना के जवानों द्वारा आत्महत्या करने के मामलों के लिए व्यक्ति-प्रबंधन की समस्या को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि मेरे हिसाब से यह एक व्यक्ति-प्रबंधन का मुद्दा है। मुझे लगता है कि इसका समाधान दो-तीन तरीकों से किया जा सकता है।
पर्रिकर ने कहा कि एक तरीका परामर्श है। जवानों की समस्या को जानना और उनका समाधान दूसरा तरीका है। त्वरित निवारण तंत्र भी इसका एक समाधान है। जवानों की समस्याओं के समाधान के लिए न्यायाधिकरणों का गठन और औपचारिक व्यवस्थाएं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जवानों के लिए परिवार को साथ रखने की व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे उनके अकेलेपन की समस्या दूर होगी।
सेना का जवान जब लंबे समय तक अपने परिवार और घर से दूर होता है, तो खुद को अकेला महसूस करने लगता है। सैनिकों की आत्महत्या के मामले में अक्सर उनके अधिकारियों द्वारा संभावित प्रताड़ना की ओर उंगली उठाई जाती है। इस पर पर्रिकर ने कहा कि यद्यपि व्यक्तिगत संबंधों में हर समय तो कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता, लेकिन "समस्या समाधान का कोई तंत्र विकसित कर इस मुद्दे को सुलझाया जा सकता है। पर्रिकर ने कहा कि यहां कई मुद्दे हैं। मैं स्पष्ट तौर पर सैन्यकर्मियों के लिए कल्याणकारी उपाय बढ़ाना चाहता हूं। जिन मुद्दों पर मैं ध्यान दे रहा हूं उसमें सैन्य कल्याण एक सर्वाधिक महत्वपूर्ण मुद्दा है।












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