Bengal: एशिया के सबसे बड़े रेड-लाइट Sonagachi वाली सीट पर कितने पड़े मत? SIR ने किया खेला? टूटे रिकॉर्ड?
Shyampukur Seat Voting Turnout 2026: 29 अप्रैल 2026 को शाम 7 बजे तक उत्तर कोलकाता की श्यामपुकुर विधानसभा सीट (Shyampukur Assembly Seat) पर मतदान प्रतिशत पहुंच गया 87.77%। यह आंकड़ा न सिर्फ इस सीट के पिछले तीन चुनावों का रिकॉर्ड तोड़ता है, बल्कि शहरी उदासीनता की दीवार भी गिराता है। राज्यव्यापी औसत शाम 7 बजे तक करीब 91.57% रहा। लेकिन, श्यामपुकुर की खासियत सिर्फ संख्या नहीं, यह सीट एशिया के सबसे बड़े रेड-लाइट एरिया सोनागाछी को समेटे हुए है, जहां यौनकर्मी समुदाय के वोटिंग अधिकार पर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का विवाद छाया रहा।
क्या SIR ने मतदाता सूची में कटौती का 'खेल' खेला? क्या यही वजह थी कि कुछ इलाकों में नाम कटने के बावजूद रिकॉर्ड टर्नआउट हुआ? या फिर टीएमसी और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर ने मतदाताओं को घर से बाहर निकाला? आइए पूरी कहानी समझते हैं-सोनागाछी की जमीनी हकीकत और लोकतंत्र के सबसे हाशिए वाले वर्ग के संघर्ष के साथ...

मतदान का रिकॉर्ड-ब्रेक सफर: घंटे-घंटे का अपडेट
श्यामपुकुर में आज सुबह 9 बजे तक मतदान 17.72% था। 11 बजे तक यह बढ़कर 39.29% हो गया। दोपहर 1 बजे 61.7%, 3 बजे 77.95%, 5 बजे 86.5% और अंत में शाम 7 बजे 87.77%। कुल पात्र मतदाता 1,31,819-66,449 पुरुष, 65,363 महिलाएं और 7 थर्ड जेंडर के।
तुलना करें तो, 2021 में यहां सिर्फ 57.79% मतदान हुआ था। 2016 में 68.3% और 2011 में 67.69%। यानी 2026 ने पिछले 15 साल का रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया। राज्य स्तर पर भी 2021 का 73.9% और 2016 का 77.1% पीछे छूट गया। पहले चरण (23 अप्रैल) में 152 सीटों पर 93.19% मतदान हुआ था, जो 2021 के मुकाबले बहुत ज्यादा।
क्यों इतना ऊंचा टर्नआउट?
श्यामपुकुर पूरी तरह शहरी है। कोलकाता म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के 11 वार्ड (7 से 10, 17-21, 24, 26)। यहां माइग्रेशन ज्यादा, पुराने घर बिक रहे हैं, नए अपार्टमेंट आ रहे। फिर भी लोग निकले। पार्टियों का मोबिलाइजेशन, SIR के बाद 'अपना वोट बचाओ' का मूड और स्थानीय मुद्दे (ट्रैफिक, हेरिटेज, रोजगार) ने असर किया।
Shyampukur Assembly Seat: कोलकाता का पुराना दिल, जहां इतिहास और राजनीति गुथे हैं
श्यामपुकुर उत्तर कोलकाता का केंद्रीय इलाका है, जो श्यामबाजार, बागबाजार, कुमारतुली, अहीरिटोला, शोवाबाजार से घिरा। यहां कुमारतुली की मूर्ति कार्यशालाएं, शोवाबाजार राजबाड़ी, स्टार थिएटर, रवींद्र भारती यूनिवर्सिटी और बागबाजार घाट हैं। प्रमुख सड़कें विधान सरानी, विवेकानंद रोड, रवींद्र सरानी अपनी अलग कहानी बयां करती हैं। मेट्रो (श्यामबाजार-शोवाबाजार स्टेशन), ट्राम नेटवर्क और सियालदह-हावड़ा से 7-8 किमी दूरी पर है।
1951 से 17 चुनाव हो चुके। शुरुआत में फॉरवर्ड ब्लॉक का दबदबा (10 जीत) रहा। कांग्रेस 4 बार डटी रही। 1971 में हिंसा के कारण चुनाव रद्द हो गए। 2011 से टीएमसी का कब्जा हुआ, ममता की 'शेरनी' डॉ. शशि पांजा ने लगातार तीन बार जीत हासिल की। 2011 में 27,036 वोटों से, 2016 में 13,155 वोटों से और 2021 में भाजपा के संदीपन बिस्वास को 22,520 वोटों से हराया (टीएमसी 54.18%, भाजपा 32%)।
मतदाताओं की संख्या में गिरावट अनोखी है: 2011 में 1,85,859 थे, 2021 में 1,76,557 और 2026 में 1,31,819 रह गए। हवा बदली और, गरीबों का पलायन, अमीरों का आना हुआ। SC-ST और मुस्लिम मतदाता कम। शहरी उदासीनता का ट्रेंड छाया। 2024 लोकसभा में 62.61%, 2021 विधानसभा 58.36% रहा।
Sonagachi: एशिया का सबसे बड़ा रेड-लाइट एरिया, जहां SIR ने मचाया तहलका
श्यामपुकुर में सोनागाछी आता है। वार्ड 18-20 के आसपास। यहां 6,000 से 16,000 यौनकर्मी (कुछ रिपोर्ट्स में 12,000 से ज्यादा) रहती हैं। तीन मतदान केंद्र। रोज 4,000 बाहर से भी आती हैं।
SIR का खेल समझिए...
बंगाल में SIR के तहत 60 लाख से ज्यादा नाम विचाराधीन हैं। दस्तावेजों की कमी (जन्म प्रमाण पत्र, पारिवारिक लिंकेज) से सोनागाछी में शुरू में नाम कटने का डर सताया। दुर्बार महिला समन्वय समिति की बिशाखा लस्कर ने सीईओ मनोज कुमार अग्रवाल को पत्र लिखे। विशेष शिविर लगे। पहचान सत्यापन के बाद लगभग शत-प्रतिशत यौनकर्मियों के नाम शामिल हुए, तब राहत की सांस ली गई।
लेकिन हकीकत दोहरा चेहरा दिखाती है। श्यामपुकुर में कुल 46,000 से ज्यादा नाम कटे (शहर में सबसे ज्यादा)। सोनागाछी के 4,200 निवासियों में से 1,300 हटाए गए। 1,360 कुल कटौती का हिस्सा रही। 850 में से 849 यौनकर्मियों के मामले न्यायाधिकरण में खारिज हो गए। जिला विधि सेवा प्राधिकरण ने 70 महिलाओं को अपील में मदद दी, लेकिन समय कम पड़ गया। कई महिलाएं आज वोट नहीं डाल पाईं।
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक 65 वर्षीय यौनकर्मी (35 साल से सोनागाछी में) की मानें तो, 'आधार, पैन, बैंक, किराया रसीद सब दिया। फिर भी जन्म प्रमाण पत्र मांगा। कहां से लाऊं? एक 51 वर्षीय ने बेटों का नाम बचाया, अपना नहीं। रीता लस्कर (नाम काल्पनिक) ने मीडिया को बताया कि मेरी बेटी के पास सब दस्तावेज, फिर भी नाम कटा।'SIR ने हाशिए के समुदायों के अधिकारों पर सवाल खड़े किए। फिर भी उच्च टर्नआउट नजर आ रहा है। शायद बचे हुए मतदाताओं का गुस्सा, संगठनों का जोर, या पार्टियों का 'वोट बचाओ' अभियान मुख्य कड़ी बने।
Shyampukur Assembly Seat Election Candidates: 2026 के मैदान में उम्मीदवार: अनुभव vs नई चुनौती

- अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC या TMC) : डॉ. शशि पांजा (63 उम्र) - ग्रेजुएट प्रोफेशनल (डॉक्टर), संपत्ति 7.7 करोड़ (देनदारी 68 लाख)। कोई अपराधिक केस नहीं। तीन बार विधायक, कैबिनेट मंत्री। 2021 में 55,785 वोट (54.2%)।
- भाजपा: पूर्णिमा चक्रवर्ती (42 उम्र), 12वीं पास, संपत्ति 71.5 लाख, 1 केस। लोकसभा में भाजपा की दो बार मामूली जीत का फायदा उठाने की कोशिश।
- कांग्रेस: पूर्णा घोष (73 वर्ष), स्नातक, संपत्ति 1.6 करोड़, कोई केस नहीं।
श्यामपुकुर में टीएमसी की पकड़ मजबूत है, लेकिन 2019-24 लोकसभा में भाजपा ने तृणमूल को पछाड़ा है। वाम-कांग्रेस गठबंधन हाशिए पर है। हर वोट मायने रखेगा। आपको बता दें कि, 2021 के विधानसभा चुनाव में शशि पंजा ने शानदार जीत दर्ज की थी। उन्हें कुल 55,785 वोट मिले थे, जो करीब 54.2 प्रतिशत वोट शेयर था। यह आंकड़ा बताता है कि इस सीट पर TMC की पकड़ कितनी मजबूत रही है। जीत का अंतर भी काफी बड़ा था, लगभग 21.9 प्रतिशत, जिससे मुकाबला एकतरफा नजर आया। वहीं, दूसरी तरफ BJP के उम्मीदवार संदीपान बिस्वास (Sandipan Biswas) को 33,265 वोट मिले थे। उन्हें हार का सामना करना पड़ा और वोटों का अंतर भी काफी ज्यादा रहा, जिससे यह साफ हुआ कि उस समय TMC के सामने BJP ज्यादा मजबूत चुनौती नहीं दे पाई। अगर हम थोड़ा और पीछे जाएं, यानी 2016 के चुनाव की बात करें, तब भी कहानी कुछ ऐसी ही थी। उस समय भी शशि पंजा ने जीत हासिल की थी और उन्हें 53,507 वोट मिले थे। यानी लगातार दो चुनावों में उनकी पकड़ इस सीट पर बनी रही।
2016 में BJP की तरफ से Sombrata Mondal मैदान में थे, लेकिन उन्हें भी करारी हार झेलनी पड़ी। इससे यह समझ आता है कि पानिहाटी सीट पर TMC का संगठन और वोट बैंक काफी मजबूत रहा है। अब सवाल यह है कि क्या इस बार भी वही ट्रेंड जारी रहेगा या फिर मुकाबला दिलचस्प होगा? पिछले आंकड़े तो TMC के पक्ष में जाते हैं, लेकिन हर चुनाव में परिस्थितियां बदलती हैं। ऐसे में इस सीट पर सभी की नजर बनी हुई है।
SIR का बड़ा सवाल: लोकतंत्र का टेस्ट या सिर्फ सफाई?
बंगाल में SIR ने 9 लाख से ज्यादा नाम काटे। उच्च टर्नआउट वाले क्षेत्रों में डिलीशन ज्यादा-कुछ का कहना है कि बचे हुए मतदाताओं ने ज्यादा जोर लगाया। श्यामपुकुर जैसे शहरी-संवेदनशील इलाके में यह 'X-फैक्टर' साबित हो रहा।
सोनागाछी की महिलाएं पहले चिंतित थीं। शिविरों में दौड़-धूप नहीं करनी पड़ी। फिर भी कुछ वंचित रह गईं। डीएलएसए ने कानूनी मदद दी, लेकिन सुनवाई चुनाव के बाद। इससे हाशिए वाले वर्गों तक पहुंच और संस्थागत तैयारियों पर सवाल जरूर उठे।
क्या कहते हैं आंकड़े और इतिहास?
- कुल मतदाता गिरावट: गरीबी, पलायन, रीयल एस्टेट।
- शहरी मतदान कम: 2021 में 58%-2026 में 87%+।
- सोनागाछी 'माइक्रो पॉकेट' लेकिन चुनावी रणनीति में अहम।
एक वोट, कई कहानियां
29 अप्रैल 2026 को श्यामपुकुर ने रिकॉर्ड बनाया। SIR ने विवाद पैदा किया, लेकिन लोकतंत्र ने जवाब दिया-उच्च भागीदारी से। सोनागाछी की महिलाओं के लिए यह आंशिक जीत और आंशिक हार हो सकती है। कुछ वोट डाले, कुछ नहीं। 2026 बंगाल चुनावों में यह सीट तय करेगी कि शहरी-हाशिए वाले वर्ग कितना प्रभावी हैं। परिणाम 4 मई को आएंगे। तब तक हर वोट, हर कहानी गिनती में है।













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