Kerala Exit Poll: केरल में क्‍या वाम दल का हो जाएगा सफाया, कांग्रेस की होगी वापसी? किसको मिल रही कितनी सीटें

Kerala Exit Poll: केरल विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल सामने आ गए हैं, जिनसे राज्य की सियासत में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। एग्जिट पोल अनुमान के अनुसार केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) की विदाई तय मानी जा रही है। वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की वापसी तय होने की भविष्‍यवाणी की गई है।

केरल की कुल 140 विधानसभा सीटों के लिए 9 अप्रैल को एक ही चरण में वोटिंग हुई थी और सरकार बनाने के लिए 71 सीटों की आवश्‍यकता है। 29 अप्रैल को तमाम एग्जिट पोल सर्वे के अनुसार सत्‍तारूढ़ वाम दल को तगड़ा झटका लग सकता है। कांग्रेस के नेतृत्‍व वाला UDF पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बना सकती है।

Kerala Exit Poll

Axis My India में किसको मिल रही कितनी सीटें?

Axis My India' के एग्जिट पोल के आंकड़ों के अनुसार, UDF को 78 से 90 सीटें मिल सकती हैं। वहीं, LDF के खाते में 49 से 55 सीटें पहुंचने का अनुमान है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) को 0 से 3 सीटें मिलने की ही संभावना जताई गई है।

Material News में किसको किसको मिल रही कितनी सीटें?

एग्जिट पोल के मुताबिक, कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF को 70-75 सीटें मिल सकती है. वहीं लेफ्ट के नेतृत्व वाला LDF को 60-65-68 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं NDA को 03-05 और अन्य को 02-04 सीटें मिल सकती है।

Kerala Voting Percentage: UDF और LDF को कितने फीसदी मिल रहा वोट?

वोट शेयर की बात करें तो, UDF को लगभग 44 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है, जबकि LDF को 39 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं। अन्य दलों और भाजपा सहित 14 प्रतिशत वोट शेयर मिलने की संभावना है। ये अनुमान 4 मई को आने वाले नतीजों की महज एक झलक हैं।

केरल में नहीं बनीं सरकार तो वाम दल का हो जाएगा सफाया

अगर एग्जिट पोल के अनुमान सही साबित होते हैं, तो केरल में LDF की हार महज़ एक चुनावी नतीजा नहीं होगी, बल्कि भारतीय राजनीति में वामपंथी दलों के लिए एक बड़ा झटका साबित होगी। यह पिछले 73 वर्षों में पहली बार होगा जब देश के किसी भी राज्य में वाम मोर्चे की सरकार नहीं बचेगी।

कांग्रेस की भूमिका दिलचस्प

इस पूरे घटनाक्रम की सबसे दिलचस्प बात यह है कि जिस कांग्रेस ने लंबे समय तक केंद्र में वामपंथी दलों के साथ मिलकर सरकार चलाई, वही अब देश को 'लेफ्ट मुक्त' करने में अहम भूमिका निभाती दिख रही है।

वाम मोर्चे ने पहली बार केरल में कब बनाई थी सरकार?

आजादी के बाद वाम मोर्चे ने 1957 में पहली बार केरल में अपनी सरकार बनाई थी। इसके बाद 1977 में पश्चिम बंगाल और फिर त्रिपुरा में भी उन्होंने सत्ता हासिल की। यह दौर भारतीय राजनीति में वामपंथ के प्रभाव का प्रतीक रहा।

सिमट रहा वामदल

हालांकि, समय के साथ वामपंथी दलों का प्रभाव कम होता गया। 2011 में पश्चिम बंगाल की सत्ता उनके हाथ से निकल गई, और 2018 में त्रिपुरा में भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा। अब अगर केरल में भी एग्जिट पोल के अनुमान सही साबित होते हैं, तो यह वामपंथी राजनीति के लिए एक नए और चुनौतीपूर्ण दौर की शुरुआत होगी।

Keralam Exit Poll: केरलम में तख्ता पलट? पिनरई विजयन की विदाई तय, इस एग्जिट पोल ने दी इतनी सीटें
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