Assam Exit Poll 2026: असम में हिमंता बिस्वा सरमा की दोबारा ताजपोशी तय! कहां मात खा गई कांग्रेस?
Assam Exit Poll 2026: असम की सियासत में क्या एक बार फिर 'केसरिया' लहर अपना परचम लहराने जा रही है? 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद सामने आए एग्जिट पोल्स के आंकड़ों ने राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। रिकॉर्ड तोड़ 85.9% मतदान के बाद अब हर किसी की नजरें नतीजों पर टिकी हैं, लेकिन चाणक्य स्ट्रैटेजी समेत तमाम एजेंसियों के अनुमान एक ही दिशा में इशारा कर रहे हैं।
एग्जिट पोल्स में चाणक्य स्ट्रैटेजी (Chanakya Strategies) के आंकड़े भाजपा के लिए बेहद उत्साहजनक नजर आ रहे हैं। उनके विश्लेषण के अनुसार:
- भाजपा गठबंधन (BJP+): 88 से 98 सीटें मिलने का अनुमान है।
- कांग्रेस गठबंधन (INC+): 22 से 32 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है।
- अन्य (AIUDF व अन्य): 3 से 5 सीटें मिलने की संभावना है।

यह आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भाजपा ने अपनी पकड़ को और मजबूत किया है।
एग्जिट पोल्स का महा-सर्वे (Poll of Polls)
सिर्फ चाणक्य ही नहीं, बल्कि अन्य प्रमुख एजेंसियों के आंकड़े भी भाजपा की भारी बढ़त की पुष्टि कर रहे हैं:
- Axis My India: भाजपा गठबंधन को 88-100 सीटें, कांग्रेस को 24-36 सीटें और अन्य को 0-3 सीटें मिलने का अनुमान है।
- JVC: भाजपा+ के लिए 88-101 सीटें, कांग्रेस+ के लिए 23-33 सीटें और अन्य के लिए 2-5 सीटें जीतने की संभावना जताई गई है।
- MATRIZE: भाजपा गठबंधन के लिए 85-95 सीटें, कांग्रेस के लिए 25-32 सीटें और अन्य के लिए 6-12 सीटों का पूर्वानुमान है।
- VoteVibe: भाजपा+ को 90-100 सीटें, कांग्रेस+ को 23-33 सीटें और AIUDF को 0-6 सीटें मिलने की उम्मीद है।
- Poll Diary: भाजपा गठबंधन को 86-101 सीटें, कांग्रेस गठबंधन को 15-26 सीटें और अन्य को 3-7 सीटें मिल सकती हैं।
- PMARQ: भाजपा+ को 82-94 सीटें, कांग्रेस+ को 30-40 सीटें और अन्य को 1-5 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है।
- Poll of Polls (औसत): भाजपा गठबंधन को 88-98 सीटें, कांग्रेस गठबंधन को 25-35 सीटें और अन्य को 1-4 सीटें मिलने की प्रबल संभावना है।
रिकॉर्ड मतदान: आखिर किसके पक्ष में गई 'साइलेंट' लहर?
इस बार असम चुनाव में 85.9% मतदान हुआ है, जो 2016 (84.67%) और 2021 (82.04%) के मुकाबले काफी अधिक है। चुनावी जानकारों के मुताबिक, मतदान में यह बढ़ोतरी बड़े बदलाव या फिर मौजूदा सरकार के प्रति भारी समर्थन का संकेत होती है।
1. मुस्लिम बेल्ट में भारी टर्नआउट: 10 मुस्लिम बहुल जिलों में मतदान में 4.7% का उछाल देखा गया। श्रीभूमि, दर्रांग और मोरीगांव जैसे क्षेत्रों में वोटिंग प्रतिशत का बढ़ना चौंकाने वाला है।
2. लोअर असम का प्रभाव: लोअर असम और बोडोलैंड क्षेत्रीय क्षेत्र (BTR) की 15 सीटों पर बढ़ा हुआ मतदान प्रतिशत यह तय करेगा कि विपक्षी गठबंधन भाजपा के विजय रथ को रोकने में कितना कामयाब रहा।
3. सेंट्रल असम का फैक्टर: हालांकि यहां सीटें कम हैं, लेकिन मतदान में सबसे तेज उछाल यहीं देखा गया है, जो किसी एक पक्ष में जबरदस्त ध्रुवीकरण की ओर इशारा कर सकता है।
कांग्रेस ने खारिज किए आंकड़े
असम विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल्स में भाजपा गठबंधन (NDA) की प्रचंड जीत के दावों के बीच विपक्षी दल कांग्रेस ने इन आंकड़ों को सिरे से खारिज कर दिया है। नज़ीरा से कांग्रेस उम्मीदवार और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष देवब्रत सैकिया ने इन अनुमानों को जमीनी हकीकत से परे बताया है।
देवब्रत सैकिया ने न्यूज़ एजेंसी ANI से बातचीत में स्पष्ट कहा कि वे एग्जिट पोल्स पर ध्यान नहीं देते। उनके मुताबिक, इस बार असम के आम आदमी ने भाजपा के पक्ष में मतदान नहीं किया है। उन्होंने दावा किया कि भविष्यवाणियां जो भी कहें, लेकिन चुनावी नतीजे मुद्दों के आधार पर तय होते हैं और जनता ने बदलाव के लिए वोट दिया है।
10 साल का शासन और 'अधूरे वादे'
सैकिया ने आरोप लगाया कि पिछले एक दशक से सत्ता में होने के बावजूद भाजपा अपने विजन डॉक्यूमेंट के वादों को पूरा करने में विफल रही है। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा, 'भाजपा ने हमें 10 साल का विजन दिया था, लेकिन एक भी वादा पूरा नहीं हुआ। असम के लिए 'अच्छे दिन' की जगह 'बुरे दिन' आ गए।" उन्होंने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी सरकार को घेरते हुए कहा कि वर्तमान शासन में पहले से कहीं अधिक भ्रष्टाचार व्याप्त है।
बेरोजगारी और चाय बागान श्रमिकों की अनदेखी का आरोप
कांग्रेस नेता ने बेरोजगारी को राज्य का सबसे बड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि असम में 33 लाख से ज्यादा बेरोजगार युवा हैं, जिनके लिए सरकार ने कुछ नहीं किया। इसके अलावा, उन्होंने चाय बागान श्रमिकों के साथ हुई वादाखिलाफी का जिक्र करते हुए कहा कि 2014 में ₹350 दिहाड़ी का वादा किया गया था, जो आज 12 साल बाद भी महज ₹250 पर अटका हुआ है।
CAA, घुसपैठ और एसटी (ST) दर्जे का सवाल
सैकिया ने नीतिगत मोर्चे पर सरकार को घेरते हुए नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और असम समझौते का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि 2019 में CAA लाकर सरकार विदेशियों को राज्य में बसाने की राह खोल रही है। साथ ही, उन्होंने 6 समुदायों को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने में हो रही देरी की भी आलोचना की और कहा कि सरकार 12 साल से इस मुद्दे को सिर्फ खींच रही है।
साइलेंट वोटर और युवाओं पर कांग्रेस को भरोसा
एग्जिट पोल्स के विपरीत सैकिया ने राज्य में एक 'अंडरकरंट' (भीतरी लहर) होने का दावा किया। उन्होंने कहा, 'पूरे असम के दौरे के बाद मैंने पाया कि भाजपा के खिलाफ जबरदस्त असंतोष है। राज्य के 2.10 करोड़ वोटरों में से करीब 70 लाख युवा वोटर हैं, जो बदलाव चाहते हैं। ये साइलेंट वोटर ही अंतिम नतीजों में चौंकाने वाले परिणाम देंगे।" इसके साथ ही उन्होंने ओरुनोदोई (Orunodoi) योजना के क्रियान्वयन में खामियों और जुबीन गर्ग जैसे सांस्कृतिक प्रतीकों से जुड़े वादों के अधूरा रहने की भी बात कही।
सभी एग्जिट पोल्स का औसत (Poll of Polls) देखें तो भाजपा गठबंधन आसानी से बहुमत के आंकड़े (64 सीटें) को पार कर 90 के आसपास रुकता दिख रहा है। वहीं कांग्रेस के लिए यह नतीजे एक बार फिर आत्ममंथन का विषय हो सकते हैं। हालांकि, असली फैसला मतपेटियों से 4 मई के दिन निकलेगा, लेकिन फिलहाल असम की हवाओं में 'फिर एक बार भाजपा सरकार' का ही शोर सुनाई दे रहा है














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