साल 2013 में चला 'मोदी मैजिक', बनें सबसे बड़े न्यूजमेकर

मोदी की मैजिक का ही असर है कि लोग अब उनकी कट्टर छवि को भूल उन्हें पसंद करने लगे है। 2002 के गुजरात दंगों ने मोदी का अब भी पीछा नहीं छोड़ा है, लेकिन मोदी के जादू के सामने लोग इसे भी भूल गए है। सिर्फ नमो...नमो...की गूंज सुनाई देती है।इस साल मोदी जिन कारणों से सुर्खियों में रहे उनमें एसआईसी द्वारा मोदी को गुजरात दंगा मामले में क्लीन चिट दिए जाने के बाद जाकिया जाफरी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में लगाई गई अर्जी है। जिसके कारण मोदी हमेसा सुर्खियों में बने रहते है।
विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव के मद्देनजर मोदी की विशाल रैलियां भी उनकी चर्चाओं में अहम कारक रही है। मोदी की रैलियों में उड़रने वाली भीड़ उन्हें सुर्खियों में खींचती रही है।मोदी की सजी भाषा लोगों को उन्हें सुनने के लिए बाध्य करती है। लोग उन्हें सुना बिना रह नहीं पाते। इतना ही नहीं मोदी जिस अंजाद मेंअपने दुश्मनों पर अटैक करते है, लोग उसे सुनकर हैरान रह जाते है।
उनपर लगने वाले आरोप भी उन्हें सुर्खियों में रखने के लिए अहम कारक साबित होते है। मोदी की लोकप्रियता के साथ-साथ उनपर विरोधियों द्वारा लगाए गए आरोपों के कारण वो सुर्खियों में बने रहते है। ऐसे ही कई और कारण है जिसके कारण मोदी न्यूजमेकर बन गए है।












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