मोदी vs दाउद : 'जो हाल लादेन का हुआ था वही दाउद का होगा'

कहानी शुरू होती है सुशील कुमार शिंदे के उस बयान से जिसमें इसी साल जनवरी में उन्होंने दाऊद को भारत लाने के लिए अमेरिका की मदद मांगने की बात कबूली थी। तत्कालीन गृह सचिव आरके सिंह ने ऐसी किसी बातचीत होने से इनकार किया था। अब आरके सिंह बीजेपी में शामिल हो चुके हैं और एक बार फिर दाऊद का जिन्न बाहर निकल आया है।
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दाऊद का नाम सियासी तोर पर नरेंद्र मोदी ने पहली बार लिया है। मोदी ने गंभीर अंदाज में कहा कि इन बातों का ढिंढोरा नहीं पीटा जाता। जो भी ताकतें देश के लिए घातक हैं, उन पर सोच-समझ कर ऐक्शन लिया जाता है, ना कि सार्वजनिक तौर पर डींगें हाकीं जाती हैं।
हालांकि मोदी ने ये तो वादा नहीं किया वह पाकिस्तान से दाऊद को लेकर आएंगे। लेकिन सवाल जरूर उठ रहे हैं कि अगर मोदी प्रधानमंत्री बने तो क्या दाऊद को वैसे ही हिंदुस्तान वापस लाएंगे जैसे लादेन के साथ अमेरिका ने किया था।
दाउद की हिस्ट्री-बुक -
- 1993 ब्लास्ट के बाद दाऊद ने पाकिस्तान में अपना ठिकाना बनाया।
- दाऊद पर ये भी आरोप है कि उसने 2008 में मुंबई हमले में भी आतंकियों की मदद की थी।
- दाऊद पर अल कायदा और लश्कर ए तैयबा जैसे बड़े आतंकी संगठनों की मदद का आरोप भी है।
- अमेरिका ने दाऊद को ग्लोबल आतंकवादियों की लिस्ट में भी डाला हुआ है।












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