नरेंद्र मोदी नहीं चाहते स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल हो उनका जीवन संघर्ष
नई दिल्ली। बचपन में मगरमच्छ के बच्चे को पकड़ना और अलग-अलग रूप धारण करके नाटकों में भाग लेना और फिर ट्रेन के डिब्बों में चाय बेचने से लेकर प्रधानमंत्री तक के नरेंद्र मोदी का सफर स्कूल की किताबों में आये, यह प्रधानमंत्री मोदी कतई नहीं चाहते हैं।
मोदी ने शुक्रवार की सुबह ट्वीट के माध्यम से कहा, "मैं न्यूज में पढ़ रहा था कि कुछ राज्य स्कूली पाठ्यक्रमों में नरेंद्र मोदी के जीवन संघर्ष को शामिल करना चाहते हैं।"
अगले ट्वीट में कहा, "मैं मानता हूं कि जब तक कोई व्यक्ति जीवित है, तब तक उसके जीवन परिचय को स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल नहीं किया जाना चाहिये।"
मोदी ने एक और ट्वीट किया, "भारत का इतिहास तो तमाम शूरवीरों से भरा हुआ है युवाओं और बच्चों को उनके बारे में पढ़ना चाहिये।"
मोदी ने ये ट्वीट इसलिये किये, क्योंकि गुरुवार को ही गुजरात के शिक्षा मंत्री भूपेंद्रसिंह चुदासमा ने पत्रकारों से कहा था कि नरेंद्र मोदी के जीवन संघर्ष को अगले वर्ष से ही स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जायेगा। इससे पहले राजस्थान के शिक्षा मंत्री कालीचरण साराफ भी मोदी और अटल को पाठ्यक्रम में शामिल करने की बात कह चुके हैं।












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