भारत का मुस्लिम भी विकास चाहता है इसलिए देगा मोदी को वोट!
सत्ता और धर्म का संबंध सदैव से चला आ रहा है। भारत जैसे देश में तो धर्म और भी अधिक प्रभावी कारक है। यदि भारत को धर्मनिरपेक्ष देश के रुप में सम्बोधित किया जाता है तो इसका कारण यही है कि इसका अपना कोई नियत धर्म नहीं है। भारत धर्म निरपेक्ष देश तो है पर अब भी हम पूरे आत्मविश्वास से यह नहीं कह सकते कि यहां धार्मिक एकता है। अगर 'सर्वधर्म हिताय' कि भावना होती तो राजनीति में वोट बैंक का ज़रिया धर्म कभी नहीं होता, इसीलिए यह बात तो तय है कि सत्ता कभी धर्म विहीन हो ही नहीं सकती।
मौजुदा चुनावी परिवेश में सभी राजनीतिक दल अपने वोट बैंक को बढ़ाने के लिए मुस्लिम समुदायों को लुभाने का जी तोड़ प्रयास कर रहें है। फिर चाहे वो कांग्रेस हो, सपा हो, भाजपा हो या फिर कोई और दल, सभी इस वोट बैंक की राजनीति में लगे हैं, क्योंकि राजनेताओं की ओर से मुस्लिम समुदाय को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करने की परंपरा बहुत पुरानी है। सभी अपना रहें है तुष्टीकरण का सिद्धान्त ताकि वो अल्पसंख्यक समुदायों को अपने मोहक वादों से संतुष्ट कर उनका मत हासिल कर सकें।
ऐसे में भाजपा प्रधानमंत्री पद उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी जो कि अपनी हिंदुत्ववादी छवि के लिए प्रचलित हैं उन्होंने अपनी अपनी तरफ से कोई विशेष प्रयास नहीं किया मुस्लिम मतों को प्रभावित करने के लिए क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि आज प्रबुद्धशील मुस्लिम वर्ग साम्प्रदायिकता और धार्मिक संकीर्ण सोच से ऊपर उठ कर विकास, रोजगार, शिक्षा जैसे मुददे पर सोचता है। शायद वो भी जान गया है कि रुढिवादी साम्प्रदायिक सोच विकास ही राह में केवल बाधा ही बन सकती है. यह कहना गलत नहीं होगा कि जिस मुस्लिम समुदाय को हम राजनीति के नज़रिए से देखते है वास्तव में उसका चेहरा उससे भिन्न है। मोदी की रैलियों और उनके बयानों को देखकर लगता है कि उनके दिलो-दिमाग पर यह बात चल रही है कि वाकई में आज देश का मुस्लिम भी विकास चाहता है इसलिए वह भाजपा और मोदी का समर्थन करेगा। महज धर्म के नाम पर वह बीजेपी को अनदेखा नहीं करेगा।
ऐसे में मोदी जिनका एजेंडा ही विकासवाद है वो काफी हद तक मुस्लिम समुदाय को प्रभावित कर सकते हैं। इस राह में मोदी के लिए कुछ चुनौतियां अवश्य है जिसे पार करके वे एक हिंदुत्ववादी छवि के आवरण से निकल कर मुस्लिम के बीच अपनी जगह बना सकते हैं।
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सुरक्षा की दृष्टि से संतुष्ट करना होगा...
मोदी को मुस्लिम समुदाय को उनकी सुरक्षा के लिए पूर्ण रुप से आश्वस्त करना होगा क्योंकि आज यह समुदाय बावरी मस्जिद, गोधरा काण्ड और 2611 जैसी साम्प्रदायिक हिंसा से अपनी सुरक्षा के लिए विशेष रुप से चिन्तित है। ऐसे में मोदी को इन्हें सुरक्षा की दृष्टि से संतुष्ट करना होगा।

अपनत्व का एहसास
मोदी को इन समुदायों को अपनत्व का एहसास दिलाना होगा. ताकि उनके दिमाग में भारत के लिए एक हिन्दु देश की छवि न बने बलिक उन्हें भी यह देश अपना लगे।

अल्पसंख्यकों को बहुसंख्यकों के समान दर्जा
मोदी को प्रयास करना होगा कि देश में मुस्लिम अल्पसंख्यकों को बहुसंख्यकों के समान ही बराबरी का दर्जा मिले।

विकास और रोजगार
मोदी को इन समुदाय के विकास और रोजगार जैसी समस्याओं को भी दूर करने के लिए भी प्रतिज्ञाबद्ध होना होगा।

शिक्षा का स्तर बढ़े
मोदी को ऐसे उपाय करने होंगे कि मुस्लिम समुदाय में भी शिक्षा का स्तर बढ सके, ताकि ज्यादा से ज्यादा मुसिलम षिक्षा के प्रति जागरुक हों।

समानता का एहसास
न केवल धार्मिक स्तर पर बल्कि राजनैतिक और सामाजिक स्तर पर भी मुस्लिम समुदाय को उन्मुक्तता और समानता का एहसास दिलाना होगा. क्योंकि संविधान के अनुसार तो भारत के प्रत्येक नागरिक को समानता का अधिकार है परंतु व्यावहारिक स्तर पर आज भी असमानता दिखाई देती है।

भयमुक्त वातावरण का निर्माण
मोदी को हर संभव प्रयास करना होगा भारत में एक भयमुक्त वातावरण का निर्माण हो ताकि फिर कभी धर्म हिंसा का कारण न बने।

सांप्रदायिक मानसिकता को बदलने का प्रयास
मोदी को जनता की संकीर्ण और सांप्रदायिक मानसिकता को बदलने का नैतिक प्रयास करना होगा और उन्हें लोगों को इन सबसे ऊपर उठ कर विकासवादी सोच को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना होगा।











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