नरेंद्र मोदी करने जा रहे हैं कारगिल और लेह को रोशन

सेनाध्यक्ष कारगिल में
प्रधानमंत्री की करगिल यात्रा की तैयारियों का जायजा लेने लिए सेनाध्यक्ष दलबीर सिंह कारगिल पहुंच चुके हैं। कारगिल भारत के लिए बेहद खास सीमावर्ती क्षेत्र है। कारगिल में ही चंदेक साल पहले पाकिस्तान ने घुसपैठ की थी।
जिसके बाद घुसपैठियों को खदेड़ दिया गया था। प्रधानमंत्री लेह से कारगिल और कारगिल से श्रीनगर तक पहली विद्युत ट्रांसमिशन लाइन का शिलान्यास करेंगे।
जानकारों ने बताया कि जहां तक 44 मेगावाट चुटक पनबिजली परियोजना का सवाल है, यह कारगिल को रोशन करने के लिए अहम होगी।
बैराज साइट सारझे गांव के निकट कारगिल से 14 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। यह 90 प्रतिशत विश्वसनीय वर्ष में 216 एमयू बिजली का उत्पादन करने के लिए सुरू नदी पर एक रन-ऑफ-रिवर योजना है।
इसमें 15 मीटर ऊंचे बाँध के निर्माण द्वारा विकसित 52 मीटर के रेटिड हेड और 5.9 मीटर व्यास के घोड़े की नाल के आकार के 4780 मीटर लंबे हेड रेस टनल का उपयोग किया गया है। चुटक परियोजना में सारझे गांव के पास 15 मीटर ऊंचे और 47.5 मीटर लंबे बाँध का निर्माण और सुरू नदी के दाहिने किनारे पर भूमिगत पावर हाउस का निर्माण शामिल है।
चुटक पावर स्टेशन का कम्पोजिट टैरिफ वर्ष 2013-14 के लिए 6.26 रुपये प्रति यूनिट है। इस परियोजना से तैयार की गई बिजली की जम्मू-कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र के कारगिल जिले में आपूर्ति की जाएगी।
उधर,45 मेगावॉट निम्मो-बाजगो पनबिजली परियोजना जम्मू-कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र के लेह जिले में सिंधु नदी की क्षमता का उपयोग करने वाली एक नदी योजना है। इस परियोजना को 239 मिलियन यूनिट ऊर्जा का उत्पादन करने के लिए तैयार किया गया है।












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