गिरते रुपए को बचाने के लिए मोदी सरकार ले सकती है अप्रवासी भारतीयों की मदद, RBI से हो रही गुफ्तगू
नई दिल्ली। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और केन्द्रीय रिजर्व बैंक ने डॉलर के मुकाबले रुपए की गिरावट पर लगाम लगाने के लिए विदेश में रह रहे भारतीय नागरिकों का सहारा लेने की तैयारी कर रही है। सरकार को उम्मीद है कि इस कदम के बाद वह अपने चालू खाता के घाटे को कम कर सकती है। इस संबंध में मोदी सरकार के कुछ आधिकारी वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक के संपर्क में है और बातचीत चल रही है कि आखिर रुपए को कैसे मजबूत किया जाए।

बता दें कि डॉलर के मुकाबले रुपए ने इस साल अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन किया है। यहीं वजह है कि भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबकि अप्रैल के मध्य में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 426 बिलियन डॉलर की तुलना में इस समय 400 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया है। क्योंकि आरबीआई डॉलर को बेच रहा और सोना खरीद रहा है। लेकिन अब सरकार अप्रवासी भारतीयों के लिए जमा योजनाओं सहित अन्य उपायों की आवश्यकता पर विचार कर रही है। ताकि उनकी मदद से रुपए को मजबूत किया जा सके।
2013 में भारत ने ली थी अप्रवासी भारतीयों की मदद
हालांकि यह पहला मौका नहीं होगा जब रुपए को मजबूत करने के लिए अप्रवासी भारतीयों की मदद लेने पर विचार किया जा रहा है। इससे पहले साल 2013 में यूपीए की मनमोहन सिंह की सरकार के दौरान भी अप्रवासी भारतियों की मदद ली थी और डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत भी हुआ था। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक साल 2013 में केन्द्रीय बैंक ने अप्रवासी भारतीयों से लगभग 34 बिलियन डॉलर के मूल्य का करेंसी स्वैप किया था। तब जाकर रुपए को मजबूती मिली थी। वहीं शुक्रवार को पता चला है कि भारत का चालू घाटा पांच साल के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया है। रुपया कमजोर हो जाने से पेट्रोल-डीजल के दाम भी आसमान छू रहे हैं।
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