चीन-पाकिस्तान से टकराव के बीच रक्षा मंत्री ने तीनों सेना प्रमुखों को दिए ये खास अधिकार
चीन से टकराव के बीच तीनों सेनाप्रमुखों को मिले खास अधिकार
नई दिल्ली। पड़ोसी देश, चीन और पाकिस्तान के साथ लगातार तनाव के बीच सेना के तीनों अंगों को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। देश के संवेदनशील सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए रक्षा मंत्रालय ने सेना को अहम वित्तीय अधिकार सौंपे हैं। इस फैसले के बाद तीनों सेनाओं के उप-प्रमुख संवेदनशील ठिकानों की सुरक्षा को मजबूत बनाने पर सालाना 800 करोड़ रुपये तक खर्च कर सकेंगे। रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने इस संबंध में गुरुवार को जानकारी दी।
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तीनों सेनाओं के उप-प्रमुख अब रक्षा मंत्रालय की मंजूरी के बिना ऑर्डर देने, खरीदारी करने और सिविल वर्क कराने का काम कर सकते हैं। रक्षा मंत्री के अनुसार, इससे सेनाओं के पास जो मौजूदा अधिकार हैं, वो बढ़ जाएंगे जो सुरक्षा की दृष्टि से बेहतर साबित होंगे। आर्मी के उप प्रमुख को गोला बारूद और हथियाोरों के पुर्जे खरीदने के लिए भी वित्तीय अधिकार दिए गए हैं।
बीते साल आर्मी के वाइस चीफ लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) फिलिप कम्पोज की अध्यक्षता में एक कमिटी गठित की गई थी, जो सेना के संवेदनशील ठिकानों की सुरक्षा कैसी दुरुस्त हो, इस पर रिपोर्ट देना था। कमेटी ने खुफिया व्यवस्था मजबूत बनाने और रक्षा ठिकानों की सुरक्षा में लगे कर्मियों को बेहतर हथियार और बचाव के सामान दिए जाने की सिफारिश की थी। सेनाओं के करीब 3000 ठिकानों में 600 को अत्यधिक संवेदनशील माना गया है। इन ठिकानों की सुरक्षा के मद्देनजर ही सेना को वित्तीय रूप से मजबूत करने के लिए हालिया कदम उठाया गया है।












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