ये दो बड़े धर्मगुरु करेंगे नरेंद्र मोदी का खुलकर विरोध ...

narendra modi
गांधीनगर। नरेंद्र मोदी की 'लहर' का निशाना जब खुद मोदी ही बन जाएं तो सियासत गर्म तो जरूर होगी। इसी उथल-पुथल में मोदी के लिए कहीं राहत है तो कहीं मुश्क‍िलें। हिंदू धर्म के दो बड़े धर्मगुरुओं ने मोदी के खिलाफ वाराणसी में चुनाव प्रचार करने का फैंसला किया है।

पुरी के शंकराचार्य स्वामी अधोक्षानंद देवतीरथ खुद वाराणसी जाकर वहां धर्मगुरुओं से मुलाकात करेंगे और उनसे मोदी का विरोध करने की अपील करेंगे। जबकि द्वारका के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती वयोवृद्ध होने के कारण खुद वाराणसी नहीं जाएंगे। उनके प्रतिनिधि के रूप में उनके साथी स्वामी अवि मुक्तेश्वरानंद वाराणसी जाएंगे। स्वामी स्वरूपानंद ने मोदी के ‘हर हर मोदी' वाले नारे का विरोध किया थ।

राहत -

वोट डालने के बाद भाजपा का चुनाव चिह्न ‘कमल' दिखाने और भाषण देने के बाद आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में फंसे नरेंद्र मोदी को राहत मिलती दिख रही है। गुजरात पुलिस ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट में पाया है कि मोदी ने 100 मीटर के प्रतिबंधित क्षेत्र से बाहर भाषण दिया था।

अहमदाबाद पुलिस की क्राइम ब्रांच के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मोदी के खिलाफ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 126 (1)(ए) और आईपीसी की धारा 144 के उल्लंघन के मामले में सिर्फ एक एफआईआर दर्ज हुई है।

उन्होंने कहा, ‘धारा 144 के आरोपों के तहत मोदी को मुकदमे का सामना नहीं करना होगा क्योंकि कोई भी यह साबित नहीं कर सकता कि मीडियाकर्मियों और आम लोगों को मोदी ने बुलाया था। मोदी ने किसी को एसएसएस या निमंत्रण भेजकर नहीं बुलाया था। उन्हें पूछताछ के लिए बुलाना भी जरूरी नहीं है।'

'प्रतिबंधित क्षेत्र से बाहर थी मोदी की प्रेस कांफ्रेंस' -
उन अटकलों पर भी विराम लग गया है, जिसमें कहा जा रहा था कि मोदी ने अध‍िकार क्षेत्र का पालन नहीं किया व मीड‍िया से सवाल-जवाब आयोजित कर पार्टी के पक्ष में वोट मांगे। अधिकारी ने बताया कि हमारी जांच लोगों से पूछताछ और वीडियो फुटेज के आधार पर आगे बढ़ेगी।

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हम मोदी को पूछताछ के लिए बुला भी सकते हैं और नहीं भी। जन प्रतिनिधित्व कानून के तहत आरोप साबित होने पर दो साल की सजा या जुर्माना तक हो सकता है। हालांकि एक अधिकारी ने बताया, ‘हमारी शुरुआती रिपोर्ट में पाया गया है कि प्रशासन ने बूथ के बाहर 100 मीटर की सफेद सीमा रेखा खींची थी और मोदी की प्रेस कांफ्रेंस इस सीमा से बाहर थी।'

चुनावी आदर्श आचार संहिता के मुताबिक पोलिंग स्टेशन के 100 मीटर के भीतर किसी भी तरह की सभा करना या बयान देना प्रतिबंधित है। विरोधी दलोें ने मोदी के नियम तोड़ने के आरोप लगाकर आपत्त‍ि दर्ज करवाई थी, जिसमें प्राथमिक जांच में उन्हें पूरी तरह दोषी नहीं पाया गया है।

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