गलवान घाटी में शहीद हुए देश के 20 वीरों को सम्मान, नेशनल वॉर मेमोरियल में अंकित हुआ नाम

Names of 20 'Galwan heroes' inscribed on national war memorial ahead of the Republic Day: साल 2020 में इंडियन आर्मी ने गलवान घाटी (Galwan Valley) में चीन के नापाक मंसूबों पर पानी फेरते हुए उसे कड़ा सबक सिखाया था लेकिन इस दौरान भारत देश के 20 वीर जवान मां भारती की रक्षा करते हुए शहीद हो गए थे, देश के इन वीरों के बलिदान के सामने पूरा राष्ट्र नतमस्तक है इसलिए केंद्र सरकार ने अब इन शेरों को बड़ा सम्मान देने का फैसला किया है। आपको बता दें कि गणतंत्र दिवस (Republic Day 2021) से पहले गलवान में वीरगति पाने वाले 20 जवानों के नाम राष्ट्रीय समर स्मारक (National War Memorial) में अंकित कर दिए गए हैं।

National War Memorial में लिखा गया गलवान के 20 शहीदों का नाम

इस बारे में लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ ने ट्वीट कर बताया है कि गलवान में शहीद हुए नायकों के नाम राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में अंकित किए गए हैं। इनमें से कुछ सैनिकों को गणतंत्र दिवस पर वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किए जाने की संभावना है। मालूम हो कि राष्ट्रीय समर स्मारक या युद्ध स्मारक भारत सरकार द्वारा नई दिल्ली के इंडिया गेट के पास सशस्त्र बलों को सम्मानित करने के लिए बनाया गया एक स्मारक है। पीएम मोदी ने 25 फरवरी 2019 को इंडिया गेट के पास 44 एकड़ में बना नेशनल वॉर मेमोरियल राष्ट्र को समर्पित किया था।

कर्नल संतोष बाबू ने मां भारती की रक्षा के लिए जान गंवा दी

गौरतलब है कि मई माह से ही पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर भारतीय सेना और पीपुल्‍स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के बीच तनातनी जारी है। 15 जून को दोनों देशों के बीच टकराव हिंसक हो गया था, पीएलए के साथ हुई मुठभेड़ में इंडियन आर्मी की 16 बिहार रेजीमेंट के कमांडिंग ऑफिसर (सीओ) कर्नल संतोष बाबू के साथ ही 20 और सैनिकों ने एलएसी पर अपनी जान गंवा दी थी। गौर करने वाली बात ये थी कि इस मुठभेड़ में दोनों तरफ से एक भी गोली नहीं चली थी। चीन की सेना ने अचानक हमला बोल दिया था। सब हैरान रह गए थे कि जब डि-एस्‍कलेशन की कोशिशें जारी थीं तो फिर अचानक 15 जून की रात ऐसा क्‍या हो गया कि चीनी जवानों ने हमला कर दिया।

45 साल पहले LAC पर शहीद हुए थे भारतीय सैनिक

दरअसल 15 जून को रात 11:30 बजे कर्नल संतोष बाबू ने चीनी जवानों से पांच किलोमीटर पीछे चले जाने को कहा। चीन की सेना इसी बात से भड़क गई और उसने अपशब्‍द कहने शुरू कर दिए। इसके बाद दोनों तरफ से मारपीट शुरू हो गई और फिर चीनी जवानों ने पत्‍थर और सरिया से हमला कर दिया और फिर 20 सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए। इन सभी ने चीन के करीब 40 सैनिकों को भी मार गिराया था लेकिन चीन ने इस बारे में कभी कोई पुष्टि नहीं की गई। आपको बता दें कि सन् 1975 के बाद से यह पहला मौका है जब चीन से लगी लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर सेना को अपने सैनिक गंवाने पड़े थे।

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