पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए देवयानी राणा ने जीता नगरोटा उपचुनाव, जीत के बाद भावुक हो कर क्या बोलीं?
Nagrota Bypoll: नगरोटा उपचुनाव का माहौल इस बार सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं था। इसमें लोगों का भावनात्मक जुड़ाव, परिवार की विरासत और एक युवा चेहरे से नई उम्मीदें भी शामिल थीं। दिवंगत विधायक देवेंद्र सिंह राणा की खाली हुई सीट पर उनकी बेटी देवयानी राणा की जीत ने न केवल भाजपा को बड़ी सफलता दिलाई, बल्कि यह भी दिखा दिया कि नगरोटा की जनता आज भी 'राणा परिवार' पर उतना ही भरोसा करती है जितना उनके पिता के समय करती थी।
उपचुनाव के हर दौर में जनता का समर्थन उनके साथ खड़ा नजर आया और नतीजों ने इस विश्वास को और मजबूत कर दिया। यह जीत सिर्फ एक उम्मीदवार की सफलता नहीं, बल्कि उस भरोसे की पुनरावृत्ति है जो नगरोटा की जनता वर्षों से 'राणा परिवार' पर जताती आई है। विजय के बाद मीडिया से बात करते हुए देवयानी राणा ने भावुक होकर मतदाताओं का धन्यवाद किया।

जनता को दिया धन्यवाद
विजय के बाद मीडिया से बात करते हुए देवयानी राणा ने भावुक होकर मतदाताओं का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि नगरोटा के लोगों ने जिस तरह उनके पिता दिवंगत देवेंद्र सिंह राणा को स्नेह और विश्वास दिया था, उसी भावनात्मक जुड़ाव को आज भी कायम रखा गया है। उन्होंने कहा, "मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मानती हूँ कि नगरोटा ने राणा साहब को जिस सम्मान के साथ आशीर्वाद दिया था, वही आशीर्वाद आज मुझे भी मिला। यह मेरे परिवार के प्रति जनता का प्यार है, जिसके लिए मैं जीवनभर आभारी रहूंगी।"
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— Harsh Ketan Jakhar 🇮🇳 (@HarshKetanJakh1) November 14, 2025
भाजपा की रणनीति पर भी बोलीं
देवयानी राणा ने यह भी कहा कि भाजपा हमेशा जीत को लक्ष्य बनाकर चुनाव लड़ती है और नगरोटा उसके मजबूत संगठन और जनसमर्थन का एक उदाहरण है। उन्होंने कहा, "जब भाजपा चुनाव लड़ती है, तो वह जीतने के लिए ही लड़ती है। इसका परिणाम आप नगरोटा में देख रहे हैं और बिहार के चुनाव में भी यही तस्वीर सामने आई है।"
पिता की विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी
यह उपचुनाव देवेंद्र सिंह राणा के निधन के बाद खाली हुई सीट पर कराया गया था, और इसीलिए जनता की निगाहें शुरू से ही इस चुनाव पर टिकी थीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह जीत 'सहानुभूति लहर' से आगे बढ़कर उस भरोसे का संकेत है जो राणा परिवार ने सालों में बनाया है।
देवयानी राणा की जीत को क्षेत्र की भावनाओं, भाजपा के संगठन और परिवार की राजनीतिक छवि का संयुक्त प्रभाव माना जा रहा है। अब उनसे जनता की उम्मीदें और भी बढ़ गई हैं, खासकर उस विकास मॉडल को आगे बढ़ाने की जो उनके पिता के कार्यकाल की पहचान रहा।
फिलहाल, देवयानी राणा के सामने सबसे अहम चुनौती है-नगरोटा के विकास कार्यों को तेज करना, जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना और उपचुनाव के बाद बने इस भरोसे को मजबूत रखना। स्थानीय स्तर पर सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़े कई मुद्दे हैं जिन पर काम करने की जरूरत है। देवयानी राणा ने संकेत दिए हैं कि वह जल्दी ही जनता के बीच जाकर प्राथमिकता वाले मुद्दों पर काम शुरू करेंगी और क्षेत्र में नए विकास कार्यक्रमों को आगे बढ़ाएंगी।
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