मुस्लिम महिलाओं की एक नई उड़ान, फिट रहने के लिए बहाती है पसीना

बरेली की मुस्लिम महिलायें धर्म और स्वास्थ्य को लेकर एक साथ चल रही है। इस काम के लिए इनके परिजन भी इनके साथ हैं।

बरेली। देश बदल रहा है यह भले ही राजनीतिक कहावत हो लेकिन इन दिनों बरेली के मुस्लिम महिलाओं पर यह जुमला सटीक बैठता है।

अब उत्तर प्रदेश स्थित बरेली की मुस्लिम महिलायें धर्म और स्वास्थ्य को लेकर एक साथ चल रही है और इस काम में उन्हें अपने परिवार का भरपूर सहयोग मिल रहा है।

अब बरेली की मुस्लिम महिलाएं पुरुषों की तरह फिट रहने के लिए डंबल उठाने से परहेज भी नहीं करती।

हर तरह की एक्सरसाइज में महारत हासिल

हर तरह की एक्सरसाइज में महारत हासिल

बरेली के मिनी बाईपास स्थित एक जिम में एक अनोखा नज़ारा देखने को मिल रहा है जो आमतौर पर दिखाई नहीं देता। सुबह से ही मुस्लिम महिलाएं अपने घरेलू कामों को निपटाकर सीधे परदे में जिम पहुंचती है और अपने कोच की देखरेख में व्यायाम करती है। वही कोच के दिए गए चार्ट के अनुसार डाइट भी लेती है। मुस्लिम महिलाएं पुरुषों की तरफ फिट रहने के लिए साइकिलिंग , ट्विस्टर , के साथ कई तरह की एक्सरसाइज करती है।

परिजन करते हैं प्रेरित

परिजन करते हैं प्रेरित

मुस्लिम महिलाओं का जिम करने के संबंध में कहना है उनके परिवार के शख्स उन्हें जिम में जाने के लिए प्रेरित करते है। जबसे उन्होंने जिम किया है तबसे उन्हें कई छोटी मोटी बीमारियों से मुक्ति मिल गई है , वही बढ़ते हुए वजन से भी राहत मिली है। जिम के कोच ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि उनके जिम में इस समय करीब 40 महिलाएं है जो दो बैच में आती है।

जिम आकर मिलती है खुशी

जिम आकर मिलती है खुशी

सभी का जिम में आने का एक ही मकसद है की वह फिट और निरोग रहे। यह सभी महिलाये मिडिल क्लास से तालुक रखती है। वही जिम करने वाली महिला सीमा खान का कहना है कि जिम को धर्म से नहीं जोड़ना चाहिए जबसे वह जिम आई है तबसे उन्हें पेर के दर्द के साथ वजन कम करने में मदद मिली है। वही एक अन्य महिला शाहदाब का कहना है कि जबसे उन्होंने जिम किया तबसे उन्हें ब्लूडप्रेशर को कंट्रोल करने के साथ बैकबोन के दर्द से मुक्ति मिली है। वही जिम की एक महिला यास्मीन कहती है जिम आकर उन्हें खुशी मिलती है साथ ही वह अपने मन की बात अन्य महिलाओं के साथ साझा भी कर लेती है।

धर्म से जुड़े लोग क्या कहते है?

धर्म से जुड़े लोग क्या कहते है?

दरगाह आलाहजरत के मुफ़्ती सलीम नूरी का कहना है कि मुस्लिम महिलाए अगर स्वास्थ्य रहने के लिए जिम जाती है तो इस काम के लिए शरीयत भी मना नहीं करता बशर्ते महिलाए पुरुषों के साथ जिम नहीं करे। बरेली जिला अस्पताल के फिजियो हरीश राठौर मानते है कि किसी भी धर्म की महिलाये जिम में जाकर एक्ससरसाइज करती है तो वह किसी भी तरह से बुरा नहीं , लेकिन जिम करते महिलाये यह जरूर ध्यान रखे एक अच्छे कोच की देखरेख में एक्ससरसाइज करें।

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