Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

मुस्लिम महिलाएं मस्जिद में अदा कर सकती हैं नमाज़, HC ने फैसला सुनाते हुए जानें क्‍यों किया "कुरान" का जिक्र

Muslim women can offer namaz in the mosque: मुस्लिम महिलाओं के मज्जिद पढ़ने के अधिकार के मुद्दें पर लंबे समय से बहस होती आ रही है। वहीं तेलंगाना हाईकोर्ट हाल ही एक फैसला सुनाया जिसमें कोर्ट ने कहा मुस्लिम महिलाएं मस्जिदों में नमाज अदा कर सकती हैं।

तेलंगाना हाईकोर्ट के जस्टिस नागेश भीमाकपाका ने अपने फैसले में इस्‍लाम धर्म की पवित्र कुरान का भी जिक्र किया। आइए जानते हैं तेलंगाना हाईकोर्ट का ये फैसला क्‍यों अहम माना जा रहा है और इस बारे में क्‍या सोचते हैं मुस्लिमों के धर्मगुरु ?

namaz in the mosque

दरअसल, तेलंगाना हाईकोर्ट ने शिया मुसलमानों के अखबारी संप्रदाय से जुड़े एक केस पर सुनवाई करते हुए 25 जुलाई को ये फैसला सुनाया। जिसमें कोर्ट ने कहा शिया मुसलमानों के अखबारी संप्रदाय की महिलाएं भी हैदराबाद के दारुलशिफा इबादत खाना में इबादत करने की हकदार है।

जस्टिस ने पवित्र कुरान का किया जिक्र?
इसके साथ ही हाईकोर्ट जस्टिस नागेश भीमापाका ने फैसला सुनाते हुए कहा मुस्लमानों के पवित्र धर्म ग्रंथ कुरान शरीफ में मस्जिदों में महिलाओं को इबादत करने से रोकने पर कोई निषेध नहीं बताया गया है।

मस्जिदों में प्रवेश करने से नहीं रोका जा सकता

जस्टिस ने कहा पवित्र कुरान में सर्व शक्तिमान ने कहीं भी महिलाओं को मस्जिदों में इबादत करने के लिए प्रवेश को नहीं रोका है। उन्‍होंने अध्‍याय 2 अलबाकारा 222-223 का जिक्र करते हुए कहा कि एक खास अवधि जो प्रकृति द्वारा महिलाओं के लिए आराम करने की अवधि के रूप में मिली है, उसके अलावा महिलाओं को मस्जिदों में नमाज अदा करने से नहीं रोकता है।

वक्‍फ बोर्ड ने भी दी है अनुमति

कोर्ट ने 2007 में वक्‍फ बोर्ड के द्वारा की गई कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा शिया मुसलमानों के लिए अन्‍य संप्रदाय उसूली संप्रदाय की महिलाओं को पहले ही वक्‍फ बोर्ड ने मज्जिदों में इबादत की परमीशन दे चुका है।

बरेलवी बोले- शरीयत में महिलाओं के मस्जिद में एंट्री पर प्रतिबंध नहीं है

तेलंगाना हाईकोर्ट के इस फैसले पर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्‍ट्रीय अध्‍ययक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त करते हुए कहा मुस्लिम महिलाओं को मज्जिद में नमाज पढ़ने पर शरीयत ने प्रतिबंध नहीं लगाया है। कोर्ट का फैसला बिलकुल दुरुस्‍त है। इसके साथ ही मौलाना मुफ्ती ने कहा पैगंबर-ए-इस्लाम के जमाने में महिलाएं मस्जिद में आकर नमाज पढ़ती थीं।

कैसे और क्‍यों महिलाएं घर में अदा करने लगी नमाज?

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्‍ट्रीय अध्‍ययक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी बताते हैं कि
पैगंबर-ए-इस्लाम के जानशीन ( उत्तराधिकारी) हजरत उमर फारुख जब प्रमुख बने तो कई शिकायतें आने लगी और समाज में बुराइयां बढ़ने लगी। बिगड़े हालात को देखते हुए हजरत उमर फारुख ने सोच विचार का फैसला सुनाया कि महिलाएं अपने घरों में ही नमाज पढ़ें उनको घर में भी नमाज पढ़ने से वो उतना ही सबाब मिलेगा जितना मस्जिद में नमाज पढ़ने से मिलता है। जिसके बाद महिलाएं घर में नमाज पढ़ने लगी तभी से ये परंपरा चली आ रही है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+