तो मुसलमानों की आबादी बढ़ने की रफ्तार घटी
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) पिछले तीन दशकों में इस दशक में मुसलमानों की आबादी में सबसे कम वृद्धि हुई है। साल 2011 के जनगणना के आंकड़ों से येसाफ होता जाता है।
इस दशक में मुस्लिम आबादी में 24.6प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है जबकि इसके पहले के दो दशकों में वृद्धि की यह दर क्रमश: 32.88 और 29.53 प्रतिशत थी। इसी प्रकार हिंदुओं की संख्या में वृद्धि की दर घट कर 16.76 प्रतिशत हो गई जो पिछले दो दशकों में क्रमश: 22.71 और 19.92 प्रतिशत थी।
स्वागतयोग्य है
वरिष्ठ चिंतक अरुण माहेश्वरी कहते हैं कि मूल बात यह है कि आबादी में वृद्धि की दर में कुल मिला कर गिरावट जारी है जो स्वागतयोग्य है और किसी भी विवेकवान व्यक्ति को इसी पर बल देने की ज़रूरत है।
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आर्थिक-शैक्षणिक स्थिति
आबादी में घट-बढ़ का सीधा संबंध अलग-अलग समुदायों के अलग-अलग वर्गों की सामाजिक-आर्थिक-शैक्षणिक स्थिति से है और इस मामलों में सभी धार्मिक समुदायों में कोई फर्क नहीं पाया जाता है। इस विषय पर जातिगत आँकड़ों से कुछ रोशनी मिल सकती है।
ज़रूरत इस बात की है कि अलग-अलग आर्थिक वर्गों से जुड़े आँकड़े पेश किये जाए ताकि सामाजिक-आर्थिक ग़ैर-बराबरी को ख़त्म करने की सुसंगत नीतियों के आधार पर आबादी के बारे में ठोस कदम उठाये जा सके।













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