Munger Lok Sabha: जातीय गणना का इंडिया गठबंधन को फायदा होगा, जनता के बीच क्या है माहौल?
Munger Lok Sabha Election Ground Report: बिहार में आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। राजनीतिक पार्टियां विभिन्न मुद्दों पर मतदाताओं को लुभाने की कोशिश कर रही है। वहीं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने द्वारा कराए गये कार्यों को लेकर सियासी माइलेज लेने की तैयारी में जुटे हुए हैं।
लोकसभा चुनाव को लेकर जनता के बीच क्या माहौल है जानने के लिए वन इंडिया हिंदी की टीम ग्राउंड पर पहुंची। लोगों से क्षेत्र के विकास, महिला सुरक्षा, रोज़गार और नीतीश कुमार द्वारा प्रदेश में चलाई जा रही योजनाएं, जातिगत गणना, शराबबंदी जैसे विभिन्न मुद्दों पर बात की।

वन इंडिया हिंदी से बात करते हुए संजय कुमार ने बताया कि मुंगेर लोकसभा क्षेत्र में काफी विकास हुआ है। स्थानीय सांसद ललन सिंह विकास के प्रतीक हैं। वह अपने क्षेत्र के विकास के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। जहां तक युवाओं के रोज़गार का सवाल है, बिहार में महागठबंधन की सरकार बनने के बाद युवाओं को रोज़गार मिल रहा है।
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दिलीप पटेल ने कहा कि नीतीश सरकार द्वारा शराबबंदी का फ़ैसला सराहनीय है। अभी भी अवैध शराब की बिक्री हो रही है लेकिन पहले जिस तरह से लोग शराब पीकर तांडव करते थे। अब वैसे नहीं कर पाते हैं, उन्हें डर रहता है कि कहीं पुलिस ने पकड़ ले। चोरी छिपे वह शराब का सेवन करते हैं।

महिला सुरक्षा की बात कि जाए या प्रदेश में अपराध पर लगाम की बात करें तो डायल 112 की शुरुआत काफी कारगर साबित हो रही है। इसके साथ ही प्रदेश के विभिन्न ज़िलों में महिला थाना खुलने से महिलाएं भी खुद को सुरक्षित महसूस कर रही है।
जातिगत गणना पर संजय कुमार ने कहा कि बिहार में इसका फ़ायदा 'इंडिया गठबंधन' को निश्चित तौर पर पहुंचेगा। मुंगेर में जातीय गणना की बात करें भूमिहार समुदाय विनिंग फ़ैक्टर के तौर पर देखे जाते हैं। राजपूत मतदाता का भी अपना ही प्रभाव है।
सीएम नीतीश कुमार के लिए वोट बैंक धानुक कोयरी और कुर्मी की तादाद भी ज्यादा है, वहीं यादव मतदाताओं का भी वर्चस्व है। इसके साथ ही डेढ़ लाख वैश्य मतदाताओं का भी झुकाव नीतीश कुमार की तरफ़ है। पिछली बार के लोकसभा चुनाव में जदयू एनडीए गठबंधन में थी। इसलिए भाजपा का वोट भी जदयू प्रत्याशी को मिला था।
इस बार के लोकसभा चुनाव में समीकरण बदले हुए नज़र आ रहे हैं, क्योंकि पिछली बार राजद, जदयू अलग-अलग चुनावी मैदान में थी। इस बार दोनों साथ हैं, राजद का वोट बैंक भाजपा के जनाधार से ज़्यादा है। इसलिए इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी के जीतने की संभावना ज़्यादे है।












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