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प्लेन क्रैश में बचने के 45 साल बाद परिवार से मिलेंगे 70 साल के सज्जाद, 91 साल की मां से भी इस वजह से रहे दूर

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मुंबई, 25 जुलाई: केरल के कोल्लम के रहने वाले 70 साल के सज्जाद थांगल 45 साल तक अपने परिवार वालों से दूर रहने को मजबूर थे। अब वो जल्द ही अपने परिजनों से मिलने वाले हैं। जिनसे मिलने का अब वो बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, उनमें उनकी 91 साल की बुजुर्ग मां भी शामिल हैं। दरअसल, सज्जाद के परिजनों से बिछड़ने के पीछे एक विमान हादसा है, जिसमें वे तो बाल-बाल बच गए, लेकिन उनके साथी समेत उनकी मंडली के कई सदस्यों के साथ 95 लोगों की जान चली गई थी। हादसा 1976 में हुआ था, लेकिन उसके बाद से आजतक उन्होंने कभी अपने परिवार वालों से भी संपर्क करने की हिम्मत नहीं जुटाई थी। (पहली तस्वीर सौजन्य-टाइम्स ऑफ इंडिया)

विमान हादसे में बाल-बाल बच गए थे सज्जाद थांगल

विमान हादसे में बाल-बाल बच गए थे सज्जाद थांगल

12 अक्टूबर 1976 को मुंबई में इंडियन एयरलाइंस का विमान क्रैश लैंड कर गया था, जिसमें 95 लोग मारे गए थे। आखिरी वक्त में यदि सज्जाद थांगल ने तब अपनी यात्रा की योजना नहीं बदली होती तो मरने वालों की लिस्ट में शायद उनका भी नाम शामिल होता। यह विमान अबू धावी से वाया बॉम्बे मद्रास जा रहा था। दुर्घटना के बाद सज्जाद किसी तरह से मुंबई पहुंचे थे। दो साल पहले उन्हें पनवेल के कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सहारा दिया। उन्हें पनाह देने वाले सोशल एंड इवैन्जेलिकल एसोसिएशन फॉर लव (सील) आश्रम के फाउंडर पादरी केएम फिलिप के मुताबिक, '70 के दशक में थांगल दुबई और अबू धावी में भारतीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करते थे। 1976 के अक्टूबर में दक्षिण भारतीय अभिनेत्री रानी चंद्रा के अलावा और लोग भी ऐसे ही एक कार्यक्रम के लिए यूएई गए थे। अबू धावी से वाया बॉम्बे, मद्रास लौटते वक्त थांगल ने फैसला किया कि वो उस मंडली के साथ नहीं लौटेंगे और वो उस हादसे में बच गए, जबकि चंद्रा समेत मंडली के सारे लोग मारे गए।'

विमान हादसे का बहुत गहरा सदमा लगा था

विमान हादसे का बहुत गहरा सदमा लगा था

विमान हादसे का थांगल पर बहुत गहरा पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस और साइकोलॉजिकल प्रभाव पड़ा, क्योंकि इसमें उनके दोस्त सुधाकरण की भी मौत हो गई थी। इसके बाद उन्होंने मुंबई में ही रहकर वीजा और पासपोर्ट फॉर्म भरने और कैटरिंग जैसे छोटे-मोटे काम करके जिंदगी गुजारना शुरू कर दिया। लेकिन, परिवार वालों से संपर्क की कोशिश कभी नहीं की। 2019 में उन्हें इस आश्रम में भर्ती कराया गया, क्योंकि वे बहुत ही कमजोर, बूढ़े और बीमार हो चुके थे। वहां रहकर वे धीरे-धीरे वो ठीक होने लगे और उन्होंने अपनी जिंदगी की कहानी बयां करनी शुरू कर दी। जब केरल के कोल्लम स्थित उनके गांव शास्थामकोट्टा में उनके परिवार के बारे में आश्रम की ओर से पता लगाया गया तो लोग हैरान रह गए। उनकी 91 साल की मां फातिमा बीवी इनके छोटे भाई-बहनों के साथ रहती हैं।

बुजुर्ग मां ने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी थी

बुजुर्ग मां ने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी थी

फातिमा बीवी को जब अपने बेटे के बारे में पता चला तो वो फूट-फूट कर रो पड़ीं। उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ताओं को फोन पर बताया कि, 'इतने साल तक हमने उसके जिंदा होने की उम्मीद नहीं छोड़ी। उसके पिता यूनुस कुंजु जिनका निधन 2012 में हो गया, उन्होंने केरल में बहुत लोगों की मदद की थी, इसलिए हम दुआ कर रहे थे कि उनके नेक काम हमें अपने लापता बेटे को खोजने में मदद करेगा।'

आश्रम पहुंचने की वजह से ही परिवार वालों को मिली जानकारी

आश्रम पहुंचने की वजह से ही परिवार वालों को मिली जानकारी

थांगल से छोटे उनके 3 भाई और 4 बहनें हैं। उनके परिजनों ने शुरू में विमान हादसे में मारे गए लोगों की लिस्ट की तलाश की थी, जब उन्हें उनका नाम नहीं मिला तो इस उम्मीद में थे कि एक न एक दिन वो उनसे संपर्क जरूर करेंगे। लेकिन, लगता है कि अगर थांगल बीमार नहीं पड़ते और सील आश्रम में नहीं पहुंचते तो शायद उनके बारे में उनके परिजनों को कभी पता नहीं चलता।

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इस वजह से परिवार वालों से रहे दूर

इस वजह से परिवार वालों से रहे दूर

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब वो हादसाग्रस्त विमान में चढ़े ही नहीं थे तो उन्होंने इतने वर्ष तक परिवार वालों से दूर रहने का फैसला क्यों किया? उन्होंने जो कुछ बताया है, उसमें इस सवाल का राज छिपा हुआ है। उन्होंने कहा, 'मैं अपने गांव से पहली बार 1971 में यूएई गया। मैंने स्टोरकीपर के अलावा कुछ और दूसरे जॉब किए। बाद में मैंने भारतीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन शुरू कर दिया। क्रैश के बाद मुझे बहुत बड़ा झटका लगा। मुझे डर था कि मेरे खिलाफ कोई जांच हो सकती है, क्योंकि मैं बच गया था। मैंने संयुक्त अरब अमीरात में ज्यादा पैसा नहीं कमाया, इसलिए मैं अपने परिवार के पास ऐसी खराब स्थिति में वापस नहीं लौटना चाहता था।'(पहली तस्वीर के अलावा सारी सांकेतिक)

English summary
Mumbai: Even after narrowly surviving a plane crash 45 years ago, a man from Kerala stayed away from family members for fear of investigation
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