मुंबई कांग्रेस BMC चुनाव में क्यों बनाना चाहती है शिवसेना से दूरी
नई दिल्ली- बीएमसी चुनाव 2022 में होने हैं, लेकिन सियासी दलों ने इसकी बिसात अभी से बिछानी शुरू कर दी है। सबसे ज्यादा परेशान मुंबई कांग्रेस हो रही है, जो एक साल से ज्यादा वक्त से फुलटाइम अध्यक्ष की किल्लत झेल रही है। पूर्व अध्यक्ष संजय निरुपम सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहते हैं, लेकिन उनके निशाने पर विरोधियों से ज्यादा अपनी ही प्रदेश सरकार और नेता रहते हैं। बहरहाल, अब पार्टी ने उनकी भी बेरोजगारी दूर कर दी है और बिहार चुनाव में कुछ जिम्मेदारियां देकर कुछ काम थमा दिया है। लेकिन, इससे भी मुंबई क्षेत्रीय कांग्रेस के नेताओं की चिंता और परेशानियां कम नहीं हुई हैं। वह अपने लिए एक फुलटाइम नेता की मांग तो कर ही रहे हैं, लेकिन उससे भी ज्यादा इस बात को लेकर अड़े हुए हैं कि बीएमसी चुनाव में कांग्रेस शिवसेना के साथ गठबंधन के मोह में ना पड़े।

अगले महीने महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली महा विकास अघाड़ी सरकार को एक साल पूरे होने वाले हैं। लेकिन, उससे पहले ही मुंबई कांग्रेस के बड़े नेताओं ने पार्टी नेतृत्व से गुजारिश की है कि वह बीएमसी का चुनाव अकेले लड़ने की स्थानीय नेताओं की सामूहिक इच्छा पर जल्द से जल्द फैसला लेने की कोशिश करे। मुंबई कांग्रेस के नेता बीएमसी का चुनाव महा विकास अघाड़ी गठबंधन से अलग होकर अपने दम पर लड़ने की वकालत कर रहे हैं। मुंबई कांग्रेस नेताओं ने ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी को यह भी बताया है कि जो भी पार्टियां 2022 में बीएमसी चुनाव लड़ने की इच्छुक हैं, उन्होंने एक साल पहले से ही इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं, इसलिए नेतृत्व को उनकी इच्छा पर भी जल्द ही गौर फरमाना चाहिए।
इसके अलावा मुंबई कांग्रेस के नेताओं ने एआईसीसी से तत्काल मुंबई रीजनल कॉन्ग्रेस (एमआरसी) को नया नेतृत्व देने की भी मांग की है। पिछले एक साल से ज्यादा वक्त से मुंबई क्षेत्रीय कांग्रेस में फुलटाइम अध्यक्ष का पद खाली है। बीएमसी चुनाव 2022 के फरवरी में होने है और स्थानीय कांग्रेस नेताओं को यह डर सता रहा है कि शिवसेना और बीजेपी में जिस तरह से वर्चस्व की लड़ाई छिड़ी हुई है, कांग्रेस ने अपना कोई स्टैंड नहीं लिया तो इस लड़ाई से वो पूरी तरह बाहर हो सकती है। मुंबई कांग्रेस के नेताओं ने महाराष्ट्र के लिए नवनियुक्त पार्टी इंचार्ज एचके पाटिल के सामने अपनी सारी बातें रखी हैं। सूत्रों की मानें तो प्रदेश प्रभारी से मुलाकात के दौरान उन कांग्रेस नेताओं ने अघाड़ी सरकार के काम की तो सराहना की है, लेकिन यह भी साफ कर दिया है कि बीएमसी में अपनी परंपरागत वोट बैंक को सुरक्षित रखने के लिए अकेले चुनाव लड़ना बहुत जरूरी है, जो कि लगातार हाथ से निकलता जा रहा है।
मुंबई कांग्रेस के नेताओं ने कहा है कि अगर पार्टी अलग से चुनाव लड़ी तो बीजेपी को खुद को एकमात्र विपक्ष के तौर पर पेश करने में दिक्कत होगी। असल में बीएमसी 1985 से शिवसेना का गढ़ बन चुका है। लेकिन, अब बीजेपी उससे उसका गढ़ छीनने के लिए कमर कस चुकी है। पिछले चुनाव में बीजेपी और शिवसेना बीएमसी में अलग-अलग लड़ी थी और भाजपा ने 82 सीटों पर कब्जा कर लिया था और शिवसेना से सिर्फ 2 ही सीटें उसे कम मिली थी। पाटिल ने नए अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर नेताओं से अलग-अलग करके उनकी राय ली है और अपनी रिपोर्ट पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को सौंपने वाले हैं। मुंबई क्षेत्रीय कांग्रेस के नए अध्यक्ष के तौर पर जिन नेताओं का नाम आगे चल रहा है, उनमें अमरजीत सिंह मनहास, भाई जगताप और नदीम खान शामिल हैं।
यहां गौर करने वाली बात ये रही कि बैठक में मुंबई क्षेत्रीय कांग्रेस के पिछले दोनों अध्यक्ष संजय निरुपम और मिलिंद देवड़ा मौजूद ही नहीं थे। जो नेता इसके लिए पहुंचे थे उनमें मौजूदा कार्यकारी अध्यक्ष, पूर्व अध्यक्ष, उद्धव सरकार में शामिल वैसे मंत्री जो महानगर कांग्रेस के प्रतिनिधि भी हैं, मुंबई के मौजूदा और पूर्व विधायक, मुंबई क्षेत्रीय कांग्रेस कमिटी के जिलों के 6 जिलाध्यक्ष।












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