महाराष्ट्र में क्यों गुस्से में हैं मराठा, क्या है मराठा आरक्षण आंदोलन की मांगें?

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    Maratha Kranti Morcha के आंदोलन की ये है असली वजह, क्यों भड़का Maharashtra | वनइंडिया हिंदी

    मुंबई: पूरा महाराष्ट्र मराठा आंदोलन की आग में जल रहा है। जगह-जगह बसों को निशाना बनाया गया है, हाईवे पर गाड़ियों को रोका गया है। ठाणे में लोकल ट्रेन को रोकने की कोशिश की गई है जबकि कई इलाकों में दुकानों को जबरन बंद कराया गया है। लातूर में भी जबरन दुकानों को बंद कराने को लेकर दो पक्षों के बीच मारपीट हुई है। इसके पहले, मंगलवार को मराठा आरक्षण की मांग को लेकर एक युवक ने आत्महत्या का प्रयास किया था जिसकी बुधवार को अस्पताल में मौत हो गई। मराठा क्रांति मोर्चा अपनी मांगों को लेकर पूरे राज्यभर में आंदोलन कर रहा है। आइए, जानते हैं, क्या है मराठा समुदाय की प्रमुख मांगें..

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    ओबीसी दर्जे की मांग कर रहा है मराठा समुदाय

    ओबीसी दर्जे की मांग कर रहा है मराठा समुदाय

    मराठा समुदाय महाराष्ट्र में ओबीसी दर्जे की मांग कर रहा है। मराठा नेताओं की मांग है कि उनके समुदाय को ओबीसी कैटेगरी में शामिल किया जाए। अगर बिना ओबीसी कैटेगरी में शामिल किए उन्हें आरक्षण दिया जाता है तो फिर ये कोर्ट कचहरी के मुकदमों में फंस जाएगा और राज्य में आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से ऊपर चला जाएगा, जिसके कारण मराठा आरक्षण को कोर्ट में चुनौती दी जा सकेगी। फिलहाल, संवैधानिक व्यवस्था के तहत किसी भी राज्य में 50 फीसदी से ऊपर आरक्षण देना संभव नहीं है।

    मराठा समुदाय तत्काल हल चाहता है

    मराठा समुदाय तत्काल हल चाहता है

    मराठा नेताओं का कहना है कि सरकार की नीयत देख नहीं लगता है वो ऐसा करना चाहती है। सरकार अगर चाहे तो विधानसभा में प्रस्ताव लाकर मराठा समुदाय को ओबीसी कैटेगरी में डाल सकती है। हांलाकि बताया जा रहा है कि पिछड़ा वर्ग आयोग इस दिशा में काम कर रहा है। लेकिन मुंबई हाई कोर्ट में याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता विनोद पाटिल ने मुख्यमंत्री को एक पत्र भेजा है और कहा है कि सरकार इस पर एक दिन के भीतर अध्यादेश जारी करें नहीं तो आंदोलन जारी रहेगा।

    मराठा समुदाय पूरे महाराष्ट्र में कर रहा है आंदोलन

    मराठा समुदाय पूरे महाराष्ट्र में कर रहा है आंदोलन

    मराठा समुदाय महाराष्ट्र में सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण देने की मांग कर रहा है। महाराष्ट्र में मराठा समुदाय की कुल 33 फीसदी आबादी है। आबादी के आधार पर ये अपने लिए आरक्षण की मांग कर रहे हैं। इसके पहले हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के 2014 के नौकरियों और शिक्षण संस्थानों मे 16 प्रतिशत आरक्षण देने के फैसले पर रोक लगा दी थी और कहा था कि कुल आरक्षण की सीमा को 50 प्रतिशत से ज़्यादा नहीं बढ़ाया जा सकता और इस बात के कोई सबूत नहीं मिले हैं कि मराठा समुदाय आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़ेपन का शिकार है।

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