26/11: डेढ़ महीने तक खाली मॉर्चरी की रखवाली करते रही मुंबई पुलिस, पढ़ें चौंकाने वाले कई किस्से
मुंबई, 23 नवंबर: आज से 13 साल पहले 26 नवंबर को मुंबई ने आतंक का ऐसा तांडव देखा था। जिसने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया था। पाकिस्तान से दस फिदायीन हमलावर समुद्र के रास्ते मुंबई आए थे। उन्होंने शहर में लियोपोल्ड कैफे,छत्रपति शिवाजी टर्मिनस और ताज होटल समेत कई जगहों पर लोगों को निशाना बनाया था। आतंक का तांडव मुंबई के सबसे व्यस्ततम रेलवे स्टेशन छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पर शुरु हुआ था। कई घंटो तक चले इस हमले में दर्जनों लोगों की जान चली गई और कई पुलिस अधिकारी शहीद हो गए। इस हमले में 9 आतंकियों को सुरक्षाबलों ने मार गिराया था। जबकि एक आतंकी अजमल कसाब को जिंदा पकड़ा था। आतंकवादियों ने मुंबई में पांच प्रमुख स्थानों पर गोलीबारी और बमबारी की थी, जिसमें 166 लोग मारे गए थे और 300 से अधिक लोग घायल हुए थे।

9 आतंकियों को दफनाने के लिए 26 लोगों की टीम बनाई गई थी
26/11 हमले के मुख्य जांच अधिकारी रहे रमेश महाले ने इस हादसे से जुड़ी एक किताब में आतंकी कसाब और इस घटना से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। 26/11 मुंबई हमले में मारे गए आतंकियों के शवों के दफन को लेकर मामला कितना गोपनीय रखा गया इसका जिक्र इस किताब में किया गया है। रमेश महाले बताते हैं 9 आतंकियों को दफनाने के लिए 26 लोगों की टीम बनाई गई थी। इस टीम में 25 सिपाही थे।

गार्ड डेढ़ महीने तक खाली मॉर्चरी का पहरा देते रहे
महाले ने अपनी किताब में बताया कि, सभी अतंकियों के शवों को रात के समय में एक वैन में ले जाया गया था। मामला इतना गोपनीय था कि मॉर्चरी पर पहरा दे रहे गार्डों को भी इसकी भनक तक नहीं लगी कि कब जेजे हॉस्पिटल से उन आतंकियों के शवों को ले जाकर अज्ञात स्थान पर दफना दिए गए। मुंबई पुलिस के गार्ड डेढ़ महीने तक खाली मॉर्चरी का पहरा देते रहे। जबतक कि महाराष्ट्र के तत्कालीन गृहमंत्री आर आर पाटिल ने विधानसभा में इसकी अधिकारिक रुप से घोषणा नहीं की।

अजमल ने बताया था कि, क्यों हमले के लिए मुंबई को चुना?
रमेश महाले की मुंबई हमले पर मराठी में लिखी '26/11: कसाब अणि मी' किताब में बताया कि, गिरफ्तारी के बाद कसाब करीब सवा दो महीने तक मुंबई क्राइम ब्रांच की कस्टडी में रहा था। उसे करीब एक दर्जन केस में आरोपी बनाया गया था। महाले ने बताया कि, सैकड़ों लोगों को मौत के घाट उतारने वाले आतंकी कसाब को इस बात का जरा भी मलाल नहीं था कि उसकी वजह से कितने बेगुनाहों की जान चली गई। महाले बताते हैं कि जांच के दौरान कसाब ने कोई अफसोस नहीं जताया। उसने कहा कि वह मुंबई पर हमला करने इसलिए आया था ताकि विदेशी सैलानियों का आना जाना कम हो जाए और दुनिया में भारत को लेकर असुरक्षा का संदेश जाए और मुंबई के पर्यटन को बिगाड़ सके।

अजमल ने भारतीय कानून का उड़ाया था मजाक
पूर्व जांच अधिकारी ने किताब में बताया कि, आतंकी के हौसले कितने बुलंद थे इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जेल में पुलिसकर्मियों से कसाब कहता था कि जब भारत की संसद पर हमले के गुनहगार अफजल गुरु को आठ साल में फांसी नहीं दे सके तो मुझे क्या दोगे? कसाब को संसद पर हुए हमले को कितने साल हुए हैं, उसे बिलकुल ठीक साल याद था। तब महाले ने उससे शर्त लगाई थी कि अफजल को भी फांसी होगी और तुम्हें भी।

जब रमेश महाले से लगाई शर्त हार गया था कसाब
महाले ने कहा कि जब मैं 2012 में 19 और 20 नवंबर की रात आर्थर रोड जेल में उसकी बैरक में गया, तो मैंने उससे पूछा कि पहचान कौन? उसने फौरन जवाब दिया- रमेश महाले। तब मैंने उसे बताया कि तुम्हें क्या मेरी फांसी वाली बात याद है? चलो, अब तुम्हें फांसी के लिए ही यहां से ले जाना है। तब उसने कहा कि मैं वाकई आपसे शर्त हार गया। कसाब को 21 नवंबर, 2012 को फांसी के फंदे पर लटका दिया गया ।












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