MUDA Scam: क्या जाने वाली है कर्नाटक सीएम सिद्दारमैया की कुर्सी, क्यों तेज हुईं अटकलें?
MUDA Scam News: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया की पत्नी पार्वती ने मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MUDA) से कथित तौर पर गलत तरीके आवंटित 14 बेशकीमती प्लॉट भले ही वापस कर दी हो, लेकिन इससे भी उनकी सीएम की कुर्सी सुरक्षित रहने की गारंटी नहीं है। क्योंकि, जिस तरह के कानूनी शिकंजे में सिद्दारमैया फंसे हैं, उसके बाद लगता है कि कांग्रेस के अंदर भी उनके जाने की अटकलें तेज हो गई हैं।
जानकारी के मुताबिक बेंगलुरु में कांग्रेस के सत्ता गलियारों में इस बात को लेकर भी चर्चाएं शुरू हैं कि अगर सिद्दारमैया को मजबूरन इस्तीफा देना पड़ गया तो उनकी जगह किनको सीएम बनने का मौका मिल सकता है।

क्यों तेज हुई कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें?
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के पद से हटने की अटकलों को हवा मिलने की वजह खुद कांग्रेस सरकार और उसके नेता ही बताए जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक सोमवार को जब मूडा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सिद्दारमैया और उनके परिवार के खिलाफ जांच शुरू की थी, उससे कुछ समय पहले ही उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार अचानक गृहमंत्री जी परमेश्वरा से मिलने उनके घर पहुंच गए थे।
डीके ने क्यों नहीं माना अपना ही फरमान?
जैसे ही शिवकुमार के इस कदम की भनक कांग्रेस के अंदर खाने फैली, लोगों के कान खड़े हो गए। क्योंकि, डिप्टी सीएम ने खुद ही फरमान जारी कर रखा था कि कोई भी मंत्री या पार्टी नेता प्रदेश सचिवालय या फिर पार्टी दफ्तर से बाहर बैठक नहीं करेगा। ऐसे में इस बात पर चर्चा शुरू हो गई कि डीके अपनी ही बातों से क्यों पलट गए?
मंत्रियों के बीच बैठकों के दौर से नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को मिल रही हवा
इसके बाद मंगलवार को जो कुछ हुआ, उसने राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की बातों को और हवा देनी शुरू कर दी। इस बार जी परमेश्वरा, पीडब्ल्यूडी मंत्री सतीश जारकीहोली और समाज कल्याण मंत्री डॉ एचसी महादेवप्पा ने अलग से मीटिंग कर ली।
कांग्रेस के अंदर के लोगों का कहना है कि दोनों बैठकों को लेकर यही चर्चा है कि जरूर एजेंडा यही है कि अगर सिद्दारमैया को कुर्सी गंवानी पड़ती है, तो उनकी जगह सीएम कौन बनेगा।
डीके शिवकुमार शुरू से सीएम पद के दावेदार माने जाते हैं
पिछले साल कर्नाटक में कांग्रेस की जीत के बावजूद शिवकुमार मुख्यमंत्री बनते-बनते रह गए थे। तब कहा गया कि सोनिया और राहुल गांधी का आशीर्वाद प्राप्त करने में सिद्दारमैया आगे निकल गए। लेकिन, तभी ऐसी भी बातें सामने आईं कि यह डील ढाई-ढाई साल में सत्ता परिवर्तन की शर्त के साथ हुई है। मतलब, ढाई साल बाद सिद्दारमैया कुर्सी छोड़ेंगे और डीके को मौका दिया जाएगा।
शिवकुमार का परमेश्वरा से मिलने उनके घर पहुंचने की घटना को विशेष राजनीतिक चश्मे से देखा जा रहा है। माना जाता है कि हाल के दिनों में परमेश्वरा सिद्दारमैया से ज्यादा करीब होने लगे हैं। कांग्रेस के अंदर के लोगों का कहना है कि पता चला है कि शिवकुमार परिस्थिति आने पर अपने लिए समर्थन मांगने परमेश्वरा के पास पहुंचे थे, ताकि जरूरत पड़ने पर वह सीएम पद पर दावा कर सकें।
नेतृत्व परिवर्तन से पहले मलाईदार पदों की डील?
जानकारी के मुताबिक उन्होंने परमेश्वरा को भरोसा दिया है कि अगर वे मुख्यमंत्री बनने में उनका सहयोग करते हैं तो उन्हें वे फिर से उपमुख्यमंत्री की कुर्सी दे सकते हैं और बेंगलुरु के विकास का भी जिम्मा दे सकते हैं, जिसे कि हॉट पोर्टिफोलियो माना जाता है।
वैसे दलित समाज से आने वाले परमेश्वरा की खुद की नजरें भी सीएम की कुर्सी पर लगी रही हैं। वे पिछली कांग्रेस-जेडीएस सरकार में कुछ दिनों के लिए उपमुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। कांग्रेस सूत्रों का यह भी कहना है कि अगर परिस्थिति की मांग रही तो सिद्दारमैया महादेवप्पा या जारकीहोली में से किसी का नाम सीएम पद के लिए आगे बढ़ा सकते हैं। जारकीहोली अनुसूचित जनजाति हैं और महादेवप्पा दलित समाज से आते हैं।
मजे की बात है कि सार्वजनिक तौर पर ये सारे नेता यही दावा कर रहे हैं कि ये बैठकें सरकारी और पार्टी के कार्यों से संबंधित थीं और उसमें नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई। पहले डीके ने खंडन किया था फिर बुधवार को जारकीहोली ने दावा किया, 'इसका मतलब ये नहीं कि यह बैठक सीएम की कवायद को लेकर थी....हमने सबकुछ की चर्चा की सिर्फ सीएम पद को छोड़कर।'












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