आप ही बताइये 24 घंटे बिजली चाहिए या फिर Wi-Fi की सेवा!

राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने अपने पहले अभिभाषण में कहा कि ट्रेडीशन, टूरिज्म, टैलेंट, टेक्नोलोजी और ट्रेड भारत के मूल स्तंभ होंगे। इन्हीं स्तंभ पर चढ़ाई करने के बाद भारत विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगा और सफलता का एक नया परचम लहराएगा।
राष्ट्रपति के अभिभाषण में, कहा गया है कि छोटे से छोटा शहर या फिर गांव सभी को वाई-फाई नेटवर्क की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। वादा यिका गया है कि हाई स्पीड रेल के साथ बुलेट ट्रेन को भी चलाया जाएगा लेकिन इन सभी वायदों को पूरा करने के लिए एक लंबा वक्त लगेगा।
देश के सभी गांवों और शहरों को वाई-फाई से जोड़ने का लक्ष्य सुनने में तो अच्छा लग रहा है लेकिन कठिन भी उतना ही है। मिसाल के तौर पर, देश के एक राज्य उत्तर प्रदेश को लेते हैं। उत्तर प्रदेश एक ऐसा राज्य है जहां शहर तो कई हैं लेकिन स्थिति गांवों से भी ज्यादा बदतर है। मोदी सभी गांवों में वाई-फाई की सुविधा मुहैया कराना चाहते हैं लेकिन यह काम इतना आसान नहीं है।
गांवों और शहर की खाई को पाटने के लिए सिर्फ नीति ही नहीं बनानी होगी बल्कि निचले स्तर के सरकारी अधिकारियों से लेकर गांवों के प्रधानों को भी इसमें शामिल करना होगा। लखनऊ के पीजीआई अस्पताल के पास एक कल्ली गांव है जहां आजादी के बाद से अभी तक बिजली भी नहीं है तो वाई-फाई बहुत दूर ही है।
जिन गांवों को नरेंद्र मोदी वाई-फाई की सुविधा देने की बात कर रहे हैं उन्हीं गांवों में अभी तक बिजली भी सही ढंग से नहीं आ पाती है। उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के तमाम गांव ऐसे हैं जहां बिजली तो बहुत दूर की बात है बिजली का तार भी अभी तक नहीं पहुंचा है।












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