एमपी में कांग्रेस ने किसके कहने पर सपा के लिए नहीं छोड़ी सीट? दिग्विजय सिंह ने 4 सीटें देने का दिया था सुझाव
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हाल ही में दावा किया था कि कांग्रेस उनकी पार्टी के लिए मध्य प्रदेश में 6 सीटें छोड़ने पर विचार करने का आश्वासन देकर मुकर गई। उन्होंने कांग्रेस पर धोखा देने का आरोप तक लगाया था।
इसके बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ को सुझाव दिया था कि समाजवादी पार्टी को चार सीटें दे दें। लेकिन, उनके मुताबिक वह नहीं जानते कि बाद क्या हो गया।

एमपी में सीटों के तालमेल को लेकर दोनों दलों में हुई थी बयानबाजी
गौरतलब है कि एमपी चुनाव में सपा-कांग्रेस के बीच तालमेल नहीं होने के बाद दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं के बीच जमकर तू-तू-मैं-मैं वाली बयानबाजी हुई थी। इसमें खुद अखिलेश यादव, कमलनाथ और यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय भी शामिल थे। अखिलेश ने अजय राय को 'चिरकुट' कह दिया था तो कमलनाथ ने 'अखिलेश-वखिलेश' कहकर एमपी में समाजवादी पार्टी के सियासी प्रभाव को नकारने की कोशिश की थी।
दिग्विजय ने दिया था 4 सीटें सपा को देने का सुझाव
दरअसल, दिग्विजय सिंह ने अपने दफ्तर में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि कमलनाथ ने प्रदेश कांग्रेस के तीन नेताओं को सपा के साथ संभावित गठबंधन पर चर्चा के लिए उनसे बात करने को भेजा था। उन्होंने कहा, 'सपा 6 सीटों के लिए कह रही थी, लेकिन पिछले चुनाव में उसके प्रदर्शन के आधार पर हमने सोचा था कि 4 सीटें दी जा सकती हैं। वह बिजावर सीट जीती थी और दो अन्य पर दूसरे स्थान पर रही थी। उसके बाद क्या हुआ मुझे जानकारी नहीं है....'
कांग्रेस ने किसके कहने पर सपा के लिए नहीं छोड़ी सीट?
सपा और कांग्रेस दोनों बीजेपी के खिलाफ बने 26 विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया में शामिल हैं। लेकिन, एमपी चुनावों में सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों के बीच जिस तरह की तल्खी बढ़ी हुई है, उसके बीच दिग्विजय सिंह का यह बयान कई तरह के सवाल खड़े करता है। यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब प्रदेश कांग्रेस के नेताओं के बीच इस पर विचार किया जा रहा था, तो अचानक एक महत्वपूर्ण सहयोगी को नाराज क्यों होने दिया गया? यह भी सवाल है कि क्या एमपी चुनावों को लेकर कमलनाथ और दिग्विजय में भी तालमेल नहीं है?
दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि उन्होंने कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में भी इंडिया ब्लॉक के सहयोगियों के साथ गठबंधन का मसला उठाया था, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने यह संबंधित राज्यों के प्रदेश नेतृत्व पर छोड़ दिया था।
लेकिन, जब मध्य प्रदेश में कांग्रेस सपा के लिए सीटें नहीं छोड़ीं और अखिलेश नाराज हुए तो इस बारे में पूछे जाने पर कमलनाथ ने कहा था, 'अखिलेशवखिलेश को छोड़ो....'। ऐसे में सवाल है कि दिग्विजय के सुझाव और कमलनाथ के फैसले के बीच वाली कड़ी क्या है? वैसे अखिलेश यादव ने कांग्रेस से मायूसी हाथ लगने के बाद प्रदेश की 230 सीटों में से 33 पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए थे।












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