MP Bypolls: आगामी चुनाव से पहले सिंधिया ने खड़ी की शिवराज की मुश्किल

भोपाल। मध्य प्रदेश की दो विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे ने कांग्रेस के लिए बड़ी राहत लेकर आए हैं। पार्टी कोलारस और मुंगावली विधानसभा सीट पर जीत दर्ज में सफल रही है। इन दोनों सीटों पर कांग्रेस की जीत इसलिए भी काफी अहम है क्योंकि यह दोनों सीटें कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के संसदीय क्षेत्र की थी, ऐसे में इन दोनों सीटों पर पार्टी की साख दांव पर लगी थी। लेकिन इन दोनों सीटों पर जीत के साथ ही सिंधिया अपनी सियासी ताकत को दिखाने में सफल साबित हुए। मध्य प्रदेश की कोलारस सीट से कांग्रेस उम्मीदवार ने 8083 मतों से जीत हासिल की। वहीं मुंगावली सीट से कांग्रेस उम्मीदवार बरजिंदर यादव ने बीजेपी प्रत्याशी पर 3000 से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की।

सिंधिया ने दिखाई ताकत

सिंधिया ने दिखाई ताकत

इन दोनों ही सीटों पर कांग्रेस और भाजपा ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। एक तरफ जहां शिवराज सिंह चौहान ने खुद तमाम रैलियों को संबोधित किया तो दूसरी तरफ ज्योतिरादित्य सिंधिया भी जमकर पसीना बहाया था। राजनीतिक विशेषज्ञ इस उपचुनाव को सीधे तौर पर चौहान और सिंधिया के बीच की लड़ाई के रूप में देख रहे थे। मध्य प्रदेश के मुंगावाली विधान सभा सीट पर चौहान ने रथ पर सवार होकर चुनाव प्रचार किया था। वह रैलियों में कहते थे कि आप हमे पांच महीने का समय दीजिए हम पांच वर्ष का काम करके दिखाएंगे तो दूसरी तरफ शिवराज सिंह पर हमला बोलते हुए ज्योतिरादित्य कहते थे कि पांच वर्ष तक कहां थें।

सिंधिया-चौहान के बीच की लड़ाई

सिंधिया-चौहान के बीच की लड़ाई

मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी पूरी ताकत झोंकी थी। उन्होंने पिपरई, खोकसी सहित तमाम गांवों में लोगों से मुलाकात की थी, इस दौरान हर कोई महाराज की जय का नारा लगाता था। आपको बता दें कि मुंगावली और कोलरास विधानसभा सीटें कांग्रेस विधायकों के निधन की वजह से खाली हुई थीं। यह दोनों सीट गुना संसदीय क्षेत्र की है, जहां खुद सिंधिया की साख दांव पर थी। हर रैली में सिंधिया इस बात को दोहराते हैं कि यह कांग्रेस और भाजपा के बीच नहीं है, यह सिंधिया और शिवराज के बीच लड़ाई है।

भाजपा के लिए आसान नहीं होगा आगामी चुनाव

भाजपा के लिए आसान नहीं होगा आगामी चुनाव

ज्योतिरादित्य इस चुनाव को शिवराज और खुद के बीच की लड़ाई के तौर पर दिखा रहे थे। हालांकि शिवराज सिंह चौहान इस चुनाव को व्यक्तिगत लड़ाई के तौर पर आगे नहीं कर रहे थे, वह कहते हैं कि मैं यहा कुश्ती के मैच के लिए नहीं आया हूं, मैं यहां पांच महीनों के लिए वोट मांगने आया हूं। दोनो ही दिग्गजों के बीच इस लड़ाई के बीच जिस तरह से चुनावी नतीजे सामने आए हैं वह निश्चित तौर पर आगामी विधानसभा चूनावों में पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है। मध्य प्रदेश में चुनाव होने में कुछ ही महीनों का समय बचा है, ऐसे में भाजपा के लिए यह बड़ी चुनौती होगी कि आखिर कैसे वह 15 साल के शासनकाल के बाद लोगों के असंतोष को खत्म कर उनके वोट को अपनी ओर मोड़ पाती है।

ताबड़तोड़ रैलियां की

ताबड़तोड़ रैलियां की

इस उपचुनाव में शिवराज सिंह चौहान 40 रैलियों किया था, इस दौरान उन्होंने 10 रोड शो भी किएथे। 18 कैबिनेट मंत्री भी शिवराज सिंह चौहान के साथ मिलकर प्रचार कर रहे थे। शिवराज सिंह कहते थे कि यह लोग मंत्री हैं, लेकिन यह पार्टी के कार्यकर्ता भी हैं। वहीं दूसरी ओर ज्योतिरादित्य सिंधिया भी चुनावों में पूरी ताकत झोंकी और 75 रैलियां को संबोधित किया और 15 रोड शो किए ।

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