अमेरिका जाने की चाहत में फंसा दीपक बॉक्सर, जानें कैसे FBI ने पकड़ा भारत का मोस्ट वांटेड
मेक्सिको से पकड़कर लाए गए गैंगस्टर दीपक बॉक्सर को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आईजीआई एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर लिया है।

देश के मोस्ट वांटेड में लिस्ट में शामिल गैंगस्टर दीपक बॉक्सर को दिल्ली पुलिस ने आज आईजीआई एयरपोर्ट से अरेस्ट कर लिया। दीपक की अरेस्ट किए जाने की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। दीपक को दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम, इंटरपोल और एफबीआई ने मेक्सिको से गिरफ्तार किया है।
दीपक बॉक्सर जाली पासपोर्ट पर मेक्सिको जा पहुंचा था। दीपक बॉक्सर के देश के भागने के प्लान फूलप्रूफ था। वह पी. रवि अंतिल के नाम के पासपोर्ट से कोलकाता से भागा था।
लेकिन वह अपने फिंगरप्रिंट के चलते दिल्ली पुलिस की नजरों में आ गया। दीपक बॉक्सर को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मेक्सिको में अमेरीकी खुफिया एजेंसी एफबीआई और इंटरपोल की मदद से पकड़ा है।

दीपक ने अमेरिका तक पहुंचे के लिए 50 लाख की डील की थी। दीपक बॉक्सर को विदेश भिजवाने में जेल में बैठकर लॉरेंस विश्नोई ने मदद की थी। लॉरेंस और गोल्डी बराड़ की मदद से ही दीपक ने रवि पुत्र मनोज माता सरोज निवासी मुरादाबाद उत्तर प्रदेश के पते पर फर्जी पासपोर्ट बनाया था।
दीपक का गैंग और लॉरेस एक दूसरे के सहयोगी हैं। दीपक ने ये पासपोर्ट उसने बरेली में बनवाया था। इसके बाद वो कोलकाता से दुबई पहुंचा।
दुबई से होते हुए वो अलमाटी, कजाखस्तान और फिर तुर्की पहुंचा। तुर्की से स्पेन होते हुए वह मेक्सिको पहुंचा। जहां से उसकी आखिरी मंजिल अमेरिका थी। वह पेरामारिबो, पनामा सिटी, अल सल्वाडोर और कोस्टा रिका में भी रुका था।

मुखबिरों से मिली जानकारी के बाद दिल्ली पुलिस उसे ट्रैक कर रही थी। ट्रैकिंग के दौरान दिल्ली पुलिस को दीपक की लोकेशन मेक्सिकों के केनकन शहर में मिली।केनकन शहर मानव तस्करों और ड्रग माफियाओं के लिए बदनाम है। दीपक मेक्सिको से मानव तस्करों की मदद से अमेरिका जाना चाहता था।

दीपक अमेरिका में रहकर अपने गैंग चलाने के सपने देख रहा था। वहींअमेरिका में उसके कई साथी रहते हैं तो भारत में कई तरह की आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देते रहते हैं। मिली जानकारी के मुताबिक, मेक्सिको तक पहुंचने में उसने 40 लाख रुपये खर्च किए।
फर्जी पासपोर्ट बनवाने में उसकी मदद उसके कजिन ने की थी। 5 लाख के इनामी दीपक बॉक्सर के प्लान को अमेरिका की एफबीआई ने फेल कर दिया। मेक्सिको पहुंचा दीपक अमेरिका में घुसने की फिराक में था।
इसी बीच दिल्ली पुलिस ने एफबीआई को पकड़ने के लिए एफबीआई से संपर्क किया। जिसके बाद एफबीआई के बुने जाल में दीपक फंस गया। एफबीआई ने मेक्सिको पुलिस की मदद से उसे अऱेस्ट कर लिया।
शुरू में वह अपने आप को बचाने की पूरी कोशिश करता रहा। क्योंकि उसका पासपोर्ट नकली होने बावजूद भी असली जैसा ही था। जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने उसके खिलाफ सबूत मेक्सिको भेजे। जिसके आधार पर उस अरेस्ट किया गया।

2018 से फरार चल रहे हत्या और फिरौती के मामले में वांछित गैंगस्टर दीपक बॉक्सर को कोर्ट में पेश किया जाएगा। हरियाणा के गन्नौर का रहने वाला गैंगस्टर दीपक बॉक्सर दिल्ली के सिविल लाइन्स में एक बिल्डर अमित गुप्ता की हत्या, फिरौती समेत कई मामलों में वांटेड है।
गैंगस्टर दीपक बॉक्सर रोहिणी कोर्ट में जितेंद्र गोगी की हत्या के बाद गोगी गिरोह की कमान संभाल रहा था।दीपक बॉक्सर ने 2016 में गोगी को दिनदहाड़े जेल से छुड़ाकर दहशत फैला दी थी। 2021 में में कुलदीप फज्जा को भी कस्टडी से छुड़ाया था।
सोनीपत के गांव गुमड़ में वर्ष 1996 में जन्मे दीपक पहल उर्फ दीपक बॉक्सर का परिवार फिलहाल गन्नौर के गांधी नगर में रहता है। उसके परिवार में मां राजबाला, भाई प्रवीन व नवीन हैं। पिता सुरेश पहल की करीब छह माह पहले निधन हो चुका है।

दीपक 13 साल की आयु में ही मुक्केबाजी से जुड़ गया था। उसने महज 16 साल की उम्र में ही जूनियर बॉक्सिंग में राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक जीता था। लेकिन बाद में वह अपराध की दुनिया में आ गया।
1 दर्जन के अधिक मामलों में वांटेड़ दीपक बॉक्सर पर दिल्ली पुलिस ने दो लाख, हरियाणा पुलिस ने दो लाख और यूपी पुलिस ने एक लाख रुपये का इनाम रखा था।












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