2022 में 2.25 लाख से अधिक ने छोड़ी भारतीय नागरिकता, 2011 से 16 लाख से ज्यादा चले गए, पूरी डिटेल देखिए
पिछले साल सवा दो लाख से ज्यादा लोगों ने भारतीय नागरिकता छोड़ दी है। अगर 2011 से आंकड़ों को देखा जाए तो यह तादाद 16 लाख से भी काफी ज्यादा है। राज्यसभा में सरकार की ओर से यह जानकारी दी गई है।

केंद्र सरकार ने हाल ही में 9 राज्यों के 31 जिला मैजिस्ट्रेट को अधिकार दिए हैं कि वह नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत पात्र पाकिस्तानी, अफगानिस्तानी और बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय नागरिकता दें। लेकिन, गुरुवार को संसद में सरकार ने भारतीय नागरिकता छोड़ने वालों के जो आंकड़े दिए हैं, वह बहुत ही चौंकाने वाले हैं। पिछले एक दशक से कुछ ज्यादा समय में सबसे अधिक लोगों ने तो पिछले साल भारतीय नागरिकता छोड़ दी है और दूसरे देशों के नागरिक बन गए हैं। सरकार ने 2011 से लेकर 2022 तक भारतीय नागरिकता छोड़ने वालों के पूरे आंकड़े संसद में उपलब्ध कराए हैं।

2022 में 2,25,620 लोगों ने छोड़ी भारतीय नागरिकता
2011 से लेकर अबतक 16 लाख से ज्यादा भारतीयों ने भारतीय नागरिकता छोड़ दी है। गुरुवार को राज्यसभा में केंद्र सरकार की ओर से यह आंकड़े दिए गए हैं। इसके मुताबिक 2022 में भारतीय नागरिकता छोड़ने वालों की संख्या सबसे ज्यादा 2,25,620 दर्ज की गई है। एक प्रश्न के उत्तर में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सदन में इससे संबंधित विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई है। उन्होंने कहा कि 2015 में 1,31,489 लोगों ने भारतीय नागरिकता छोड़ी, जबकि 2016 में 1,41,603 और 2017 में 1,33,049 लोगों ने भारतीय नागरिकता का परित्याग कर दिया। इसी तरह 2018 में भारतीय नागरिकता छोड़ने वालों की संख्या 1,34,561, 2019 में 1,44,017, 2020 में 85,256 और 2021 में 1,63,370 रही है।

2011 से कुल 16,63,440 लोग भारतीय नागरिकता छोड़ गए
संदर्भ के लिए विदेश मंत्री जयशंकर ने 2011 के बाद से पिछले साल तक का पूरा ब्योरा दिया है। इसके मुताबिक 2011 में भारतीय नागरिकता छोड़ने वाले भारतीयों की संख्या 1,22,819 थी, 2012 में 1,20,923 लोग भारतीय नागरिकता छोड़ कर दूसरे देशों के नागरिक बने, 2013 में यह संख्या 1,31,405 रही और 2014 में यह आंकड़ा 1,29,328 का रहा। इस तरह से पिछले 12 वर्षों में कुल 16,63,440 लोगों ने भारतीय नागरिकता छोड़ी है।

135 देशों में बस गए नागरिता छोड़ने वाले भारतीय
एक विशेष सवाल के जवाब में जयशंकर ने सदन को बताया कि जानकारी के मुताबिक पिछले तीन वर्षों में 5 भारतीय नागरिकों ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की नागरिकता हासिल की है। केंद्र सरकार की ओर से विदेश मंत्री ने उन 135 देशों की लिस्ट भी उपलब्ध करवाई है, जहां बीते वर्षों में भारतीय नागरिकता छोड़ने वाले जाकर बस गए हैं।

पाकिस्तान में कैद भारतीयों के आंकड़े
इस दौरान विदेश मंत्रालय की ओर से बताया गया है कि युद्धबंदियों समेत 83 भारतीय रक्षाकर्मियों के पाकिस्तान की हिरासत में होने की संभावना है। सरकार की ओर से कहा गया है कि पाकिस्तान से इनकी रिहाई के लिए लगातर मुद्दे को उठाया जाता है, लेकिन अभी तक पाकिस्तान उनके वहां होने की बात मानने के लिए तैयार नहीं है। इसके साथ ही विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि 2014 के बाद से पाकिस्तान से 58 भारतीय कैदियों, 2,160 मछुआरों और 57 मछली पकड़ने वाली नौकाओं को उनसे छुड़ाकर स्वदेश लाया गया है।
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भारतीय नागरिकता देने के लिए 31 डीएम को मिले अधिकार
एक तरफ जहां अपने देश के लोग भारतीय नागरिकता छोड़कर विदेशी नागरिकता अपना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नागरिकता संशोधन कानून के तहत केंद्र सरकार पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में बसे अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता देने के लिए सक्रिय हो चुकी है। मंगलवार को ही केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया है कि सरकार ने 9 राज्यों के 31 जिलाधिकारियों को ऐसे लोगों को नागरिकता देने का अधिकार दिया है। ऐसा इसलिए किया गया है, ताकि इस तरह के भारतीय नागरिकता के आवेदनों का जल्द से जल्द निपटारा किया जा सके। (इनपुट-पीटीआई)












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