वैक्सीन लगवा चुके 99% से ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती होने की नौबत नहीं आती- स्टडी

नई दिल्ली, 16 मई: कोरोना वायरस के खिलाफ वैक्सीन लगवा चुके 99% से ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती होने की नौबत नहीं आती। दिल्ली स्थित इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल ने वैक्सीन के प्रभाव को लेकर एक बहुत बड़ी स्टडी की है, जिसमें इतने अच्छे नतीजे आए हैं। इसके मुताबिक वैक्सीन लेने के बाद महज 0.06% को ही कोविड की वजह से अस्पताल में दाखिल होने की नौबत आई है। जबकि, वैक्सीन लेने के बाद 97.38 फीसदी लोग कोरोना वायरस से सुरक्षित पाए गए हैं। अस्पताल ने कोविड-19 पर ब्रेक-थ्रू इंफेक्शन या वैक्सीनेशन के बाद होने वाले इंफेक्शन को लेकर किए गए एक शोध के नतीजे जारी किए हैं।

इंद्रप्रस्थ अस्पताल ने हेल्थकेयर वर्करों पर की है रिसर्च

इंद्रप्रस्थ अस्पताल ने हेल्थकेयर वर्करों पर की है रिसर्च

दिल्ली स्थित इंद्रप्रस्थ अस्पताल ने उन हेल्थकेयर वर्करों पर यह स्टडी की है, जिनमें कोविशील्ड की वैक्सीन लगवाने के पहले 100 दिनों के अंदर कोविड-19 के लक्षण पाए गए हैं। इस नतीजे को एक मेडिकल जर्नल में प्रकाशित किए जाने को लेकर मंथन चल रहा है। अपोलो हॉस्पिटल ग्रुप के ग्रुप मेडिकल डायरेक्टर डॉक्टर अनुपम सिब्बल ने कहा है, 'हाल में भारत ने कोविड-19 की दूसरी लहर में संक्रमण में बहुत ज्यादा इजाफा देखा है, इन सबके बीचे वैक्सीनेशन ड्राइव भी चल रही है। वैक्सीनेशन के बाद भी इंफेक्शन होने की रिपोर्ट हैं, जिसे कि ब्रेक-थ्रू इंपेक्शन के नाम से भी जाना जाता है। कुछ लोगों में पहली या पूरी डोज लेने के बाद भी ये इंफेक्शन हो सकता है।'

वैक्सीन लगवाने के बाद गंभीर बीमारी की आशंका बहुत ही कम-शोध

वैक्सीन लगवाने के बाद गंभीर बीमारी की आशंका बहुत ही कम-शोध

अभी तक दुनिया में कोई वैक्सीन ऐसी नहीं सामने आई है, जो कोविड इंफेक्शन से 100 फीसदी सुरक्षा देने का दावा करती हो। लेकिन, अपोलो अस्पताल ने जो शोध किया है, उसके नतीजे फिर भी वैक्सीन के प्रभाव को लेकर बहुत ही ज्यादा सकारात्मक संकेत माने जा सकते हैं। डॉक्टर सिब्बल पीडीऐट्रिक गैस्ट्रोएन्टरॉलजी के सीनियर कंसल्टेंट भी हैं। उन्होंने शोध के बारे में कहा है, 'शोध से पता चलता है कि कोविड-19 के टीके 100 फीसदी इम्युनिटी नहीं देते। पूरी डोज लगने के बाद यह गंभीर रोग से सुरक्षा देती है। हमारी स्टडी से पता चला है कि वैक्सीन लेने वाले 97.38 फीसदी लोगों को संक्रमण से सुरक्षा मिली है और अस्पताल में दाखिल होने वालों का दर सिर्फ 0.06 फीसदी है।' उन्होंने कहा है, 'नतीजों से पता चलता है कि ब्रेक-थ्रू इंफेक्शन का दर बहुत ही कम है और यह भी सामान्य तौर पर मामूली संक्रमण हैं, जिसमें कि गंभीर बीमारी नहीं होती। एक को भी आईसीयू में दाखिल नहीं करवाना पड़ा और किसी की मौत नहीं हुई। हमारे शोध ने वैक्सीनेशन को और मजबूती दी है।'

 3,235 हेल्थकेयर वर्करों में सिर्फ 85 हुए संक्रमित

3,235 हेल्थकेयर वर्करों में सिर्फ 85 हुए संक्रमित

अपोलो अस्पताल ने यह शोध 3,235 हेल्थकेयर वर्करों पर किया है। शोध के दौरान इनमें से 85 हेल्थकेयर वर्कर कोरोना वायरस से संक्रमित हुए। इमें से 65 यानी 2.62 फीसदी को दोनों डोज लग चुकी थी और 20 यानी 2.65 को एक ही डोज लगी थी। हालांकि, इस स्टडी की चौंकाने वाली बात ये है कि संक्रमितों में महिलाओं की तादाद ज्यादा थी और इसमें हर उम्र की हेल्थकेयर वर्कर शामिल हैं। बता दें कि स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक रविवार दोपहर तक देश में कोरोना वैक्सीन 18,19,81,445 डोज लगाई जा चुकी थी।

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