मध्यप्रदेश में दागियों और बाहरियों से दोस्ती कहीं कांग्रेस को न पड़ जाए भारी
नई दिल्ली। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर है। इसलिए प्रदेश में दोनों दलों के लिए इस बार 'करो या मरो' के हालात हैं। फिलहाल दोनों में से किसी भी दल ने उम्मीदवारों के नामों पर मुहर नहीं लगाई है। लेकिन टिकट के लिए सभी नेता हाईकमान के संपर्क में है। कांग्रेस के टिकटों पर अंतिम मुहर पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ही लगाएंगे। ऐसे में खबर आ रही है कि दागी और बाहरी लोगों को कांग्रेस की सूची में जगह मिली है। कांग्रेस ने बहुजन समाज पार्टी के साथ कोई गठबंधन नहीं किया है लेकिन बीएसपी के टिकट पर पिछला चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को कांग्रेस से टिकट दिया जाएगा। पार्टी ऐसे लोगों को भी टिकट देने जा रही है जहां जीत-हार का अंतर 25 हजार वोटों से भी ज्यादा का था। कांग्रेस का ये फैसला निचले स्तर के नेतृत्व में रोष पैदा कर रहा है।

माफिया और दागी नहीं मंजूर
रीवा और बुंदेलखंड में माफिया और दागी नेताओं को टिकट वितरण में महत्व दिए जाने की खबर से स्थानीय नेता नाराज हैं।पन्ना क्षेत्र में तो कलह इतनी बढ़ गई है कि यहां स्थानीय नेताओं ने बड़े पैमाने पर इस्तीफे देने तक की बात कही है। स्थानीय नेताओं ने साफ कर दिया है कि पार्टी आपराधिक रिकॉर्ड और खनन माफिया के साथ जाएगी तो वो पार्टी के खिलाफ अभियान चलाएंगे।कार्यकर्ताओं का कहना है कि अवैध खनन के मुद्दे पर समझौता नहीं किया जा सकता है।

बीएसपी के लोगों को तरजीह
स्थानीय नेता अनुसूचित जाति सेल के उपाध्यक्ष बृज लाल खबरी पर बीएसपी के लोगों को ज्याद महत्व देने का आरोप लगा रहे हैं। खबरी खुद बीएसपी से कांग्रेस में आए थे। चरण सिंह यादव और ब्रजेंद्र कुमार व्यास जैसे लोग कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों की सूची में हैं। इनके अलावा अभय मिश्रा, पुष्पराज सिंह, बबिता साकेत, अच्छेलाल साकेत, रेणू शाह और जी एल पटेल जैसे अन्य राजनीतिक दलों से पार्टी में आने वाले लोगों को लेकर भी रीवा-सतना क्षेत्र के कांग्रेस नेता नाराज हैं।

भारी पड़ेगी नाराजगी
पुष्पराज सिंह ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर आखिरी चुनाव लड़ा और बड़े अंतर से हार गए थे। हाल ही में कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं ने उन्हें कांग्रेस में शामिल कारया और अब खबर है कि उन्हें सिमरिया से उम्मीदवार बनाया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि इसे लेकर ओबीसी के एक बड़े कांग्रेस के नेता ने प्रदेश के प्रभारी महासचिव से नाराजगी जताई है। कांग्रेस मध्यप्रदेश में इस बार कोशिश में है कि वो किसी भी तरह से सत्ता में वापसी करे लेकिन अगर कांग्रेस ने अपने जमीनी कार्यकर्ताओं को ही नाराज कर दिया तो उसका सत्ता का सपना इस बार भी चकनाचूर हो जाएगा।












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