मानसून सत्र: महामारी रोग (संशोधन) विधेयक, 2020 को राज्यसभा की मंजूरी

मानसून सत्र: महामारी रोग (संशोधन) विधेयक, 2020 को राज्यसभा की मंजूरी

नई दिल्ली। राज्यसभा ने शनिवार को एपिडेमिक डिसीसेस अमेंडमेंट बिल 2020 (महामारी रोग विधेयक) को पास कर दिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने महामारी रोग (संशोधन) विधेयक, 2020 को राज्यसभा में पेश किया। चर्चा के बाद बिल को उच्च सदन की मंजूरी मिल गई। इस साल अप्रैल में देश के स्वास्थ्य कर्मचारियों के खिलाफ हमलों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान करने के लिए महामारी रोग अधिनियम, 1897 में संशोधन करने के लिए सरकार अध्यादेश लाई थी। जिसे कानून की शक्ल देने के लिए अब बिल लाया गया है। जिसे राज्यसभा ने पास कर दिया है।

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स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने बिल पर चर्चा के दौरान राज्यसभा में कहा कि कोरोना वायरस महामारी के दौरान डॉक्टरों और पैरामेडिक्स समेत कई स्वास्थ्यसेवा कर्मचारियों को कई तरह से अपमानित किया गया। केंद्र सरकार ने पाया कि एक इस संबंध में एक कानून की जरूरत है। जिसके बाद ये बिल लाया गया है।

शिवसेना की प्रियंका चतुर्वेदी ने विधेयक का समर्थन करते हुए सदन में कहा, बिल पास कर देने से हमारी जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती है। स्वास्थ्य कर्मियों को पीपीई दिया जाना चाहिए, काम के घंटों को विनियमित किया जाना चाहिए और समय पर वेतन पहुंच जाना चाहिए। सफाईकर्मियों और आशा कार्यकर्ताओं का ख्याल रखा जाना चाहिए।

एनसीपी सांसद वंदना चव्हाण ने सरकार से सवाल किया कि कोरोना महामारी से केवल डॉक्टर ही नहीं, बल्कि सहयोगी कर्मचारी भी प्रभावित होते हैं। आशा कार्यकर्ताओं के बारे में बिल में कुछ नहीं है, उन्हें किसी प्रकार का संरक्षण नहीं दिया गया है।

टीएमसी के सांसद डेरेक ओब्रायन ने महामारी रोग संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान कहा, आप अब स्वास्थ्य कर्मियों के बारे में सोच रहे हैं? बंगाल में हिंसा की रोकथाम के लिए मेडिकेयर सर्विस प्रिवेंशन ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 2009 है। इससे क्या होता है? ये विधेयक राज्यों की संवैधानिक रूप से सौंपी गई कार्यप्रणाली का अतिक्रमण करने का प्रयास है।

विधेयक पर चर्चा करते हुए राजद सांसद मनोज कुमार झा ने कहा कि महीनों से स्वास्थ्यकर्मियों को वेतन नहीं मिला है, नर्स और डॉक्टर हड़ताल पर हैं। ताली, थाली और फूलों की बारिश प्रतीकात्मक हैं लेकिन अन्य उपायों की जरूरत है, हमें ज्यादा गंभीरता बीमारी को लेकर दिखानी होगी।

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