Monsoon Session 2026: जेल गए तो छिन जाएगी PM और CM की कुर्सी? कौन-कौन से बड़े बिल लाएगी मोदी सरकार?
Monsoon Session 2026: मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है, जो 13 अगस्त तक चलेगा। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि केंद्र सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दोनों सदनों (राज्यसभा-लोकसभा) का सत्र बुलाने की मंजूरी दे दी है। करीब चार हफ्ते तक चलने वाले इस सत्र में कुल 19 बैठकें होने की उम्मीद है।
लेकिन इस बार का सत्र सिर्फ आम बहसों के नाम नहीं रहेगा। इस बार सरकार कुछ ऐसे कानून टेबल करने की तैयारी में है, जो भारतीय लोकतंत्र की तस्वीर बदल सकते हैं। इसमें सबसे ज्यादा चर्चा उस कानून की हो रही है, जो सीधे प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों की कुर्सी से जुड़ा है। दो-तिहाई बहुमत के करीब खड़ी एनडीए सरकार इस बार बेहद आक्रामक मूड में नजर आ रही है।

30 दिन जेल में रहे तो कुर्सी साफ! क्या है 130वां संशोधन?
इस मॉनसून सत्र का सबसे बड़ा और सबसे विवादित मुद्दा 130वां संविधान संशोधन विधेयक बनने जा रहा है। इस बिल में प्रावधान है कि अगर कोई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री या राज्यों के मंत्री किसी गंभीर मामले में गिरफ्तार होते हैं और लगातार 30 दिनों तक जेल (न्यायिक हिरासत) में रहते हैं, तो उनकी कुर्सी अपने आप चली जाएगी। इस बिल की समीक्षा कर रही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) 17 जुलाई को अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है।
सूत्रों के हवाले से खबर है कि कई आपत्तियों के बाद भी जेपीसी इस कड़े नियम को हटाने के मूड में नहीं है। हालांकि, इस कानून का इस्तेमाल राजनीतिक बदले की भावना या झूठे मुकदमों के लिए न किया जा सके, इसके लिए जेपीसी कुछ सुरक्षा कवच (सेफगार्ड्स) जोड़ने की सिफारिश कर सकती है। जेपीसी उन खास कानूनों की लिस्ट भी दे सकती है, जिनके तहत जेल जाने पर ही यह नियम लागू होगा।
सीटों को 50% बढ़ाने वाला 131वां बिल और 'एक देश एक चुनाव'
सरकार इस सत्र में दो बहुत बड़े संविधान संशोधन विधेयकों को पारित कराने पर पूरा जोर लगाएगी।
- महिला आरक्षण और परिसीमन (131वां बिल): पिछले अप्रैल में गिरे इस बिल को सरकार एक बड़े बदलाव के साथ दोबारा ला सकती है। नए ड्राफ्ट के तहत लोकसभा और विधानसभाओं की सीटों को सीधे 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का रास्ता साफ किया जा सकता है।
- एक देश एक चुनाव (One Nation One Election): देश भर में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने वाले ऐतिहासिक बिल को भी इसी सत्र में पास कराने की तैयारी है।
- अन्य अहम बिल: इसके अलावा सरकार विदेशी फंडिंग पर नजर रखने के लिए एफसीआरए (FCRA) बिल, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल और एंटी डोपिंग बिल भी पेश करेगी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने वाले अध्यादेश की जगह नया कानून, कोड ऑन वेजेस सेंट्रल रूल्स, कॉर्पोरेट लॉ और सिक्योरिटीज मार्केट कोड जैसे भारी-भरकम बिल भी कतार में हैं।
क्षेत्रीय दलों में भगदड़ और स्पीकर ओम बिरला का बड़ा फैसला
संसद की कार्यवाही शुरू होने से ठीक पहले लोकसभा स्पीकर ओम बिरला कई बड़े फैसलों का ऐलान करने वाले हैं, जिससे विपक्ष के खेमे में खलबली मची हुई है। इस बार विपक्ष बिखरा हुआ नजर आएगा क्योंकि टीएमसी में बड़ी टूट हो चुकी है और शिवसेना यूबीटी के 6 सांसदों ने बगावत कर दी है।
स्पीकर ओम बिरला सत्र की शुरुआत से पहले टीएमसी के 20 बागी सांसदों के एनसीपीआई (NCPI) में विलय को अपनी मंजूरी दे सकते हैं। इसके साथ ही शिवसेना यूबीटी के बागी 6 सांसदों का शिवसेना शिंदे गुट में विलय भी फाइनल हो जाएगा। डीएमके और इंडिया ब्लॉक के अलग होने के बाद, इन बागी सांसदों के सदन में अलग बैठने की व्यवस्था पर भी स्पीकर का फैसला आने वाला है।
पेपर लीक से रक्षा मंत्री के 'झूठ' तक, विपक्ष किन-किन मुद्दों पर सरकार को घरेगी?
भले ही विपक्ष संख्या बल में कमजोर दिख रहा हो, लेकिन सरकार को घेरने के लिए उसने भी तीखी रणनीति तैयार की है। कांग्रेस रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के खिलाफ विशेषाधिकार हनन (Privilege Proceedings) का प्रस्ताव ला सकती है। विपक्ष का आरोप है कि राजनाथ सिंह ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान शहीद हुए भारतीय जवानों की संख्या को लेकर सदन में सरेआम गलत बयानी की है।
इसके अलावा विपक्ष इन मुद्दों पर संसद में हंगामा करने के लिए तैयार बैठा है:
नीट (NEET) पेपर लीक घोटाला: मेडिकल परीक्षा में हुई धांधली को लेकर विपक्ष युवाओं के रोजगार के नाम पर सरकार को कटघरे में खड़ा करेगा।
महंगाई और बाढ़-सूखा: देश के कई हिस्सों में मॉनसून की कमी से सूखे के हालात हैं, तो कहीं भारी बारिश से बाढ़ आ गई है। इस पर विपक्ष तुरंत चर्चा की मांग करेगा।
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी: अयोध्या मंदिर के चढ़ावे में हुई चोरी को लेकर विपक्ष यूपी सरकार के सुरक्षा दावों पर सीधा हमला बोलेगा।
चुनावी रंजिश और एसआईआर (SIR): मतदाता सूची के पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) में धांधली और क्षेत्रीय पार्टियों को तोड़ने में सरकारी एजेंसियों के इस्तेमाल का मुद्दा भी जोर-शोर से उठेगा। दूसरी तरफ, पश्चिम बंगाल और असम के चुनावों में मिली बड़ी जीत से बीजेपी के हौसले बुलंद हैं, जिससे साफ है कि इस बार संसद के भीतर वार-पलटवार का एक बेहद दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा।














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