कौन हैं BJP विधायक राजू सिंह? जिन्हें हुई 4 साल की जेल, अब छिन जाएगी विधायकी? जानें पूरी कहानी
Raju Singh: बिहार की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय भाजपा विधायक राजू कुमार सिंह अब एक बड़े कानूनी फैसले की वजह से सुर्खियों में हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने 2018 के चर्चित हर्ष फायरिंग मामले में उन्हें 4 साल की जेल की सजा सुनाई है। इसी घटना में आर्किटेक्ट डॉ. अर्चना गुप्ता की मौत हुई थी। अदालत ने मृतका के पति को 25 लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।
इस फैसले के बाद राजू सिंह की विधानसभा सदस्यता खत्म होना लगभग तय माना जा रहा है। क्योंकि कानून के मुताबिक दो साल या उससे अधिक की सजा मिलने पर विधायक की सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त हो जाती है। राजू सिंह कौन हैं और जिस मामले में उन्हें सजा मिली, उसकी पूरी कहानी क्या है?

कौन हैं राजू सिंह?
राजू कुमार सिंह बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की साहेबगंज विधानसभा सीट से भाजपा विधायक हैं। वह छह बार विधायक चुने जा चुके हैं और राज्य की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। उनका परिवार भी सार्वजनिक जीवन से जुड़ा रहा है। उनकी पत्नी रेनू सिंह विधान परिषद की सदस्य रह चुकी हैं, जबकि उनके पिता करीब 10 साल तक गांव के मुखिया रहे थे।
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कई आपराधिक मामले, लेकिन पहली बड़ी सजा
राजू सिंह ने पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग को दिए हलफनामे में अपने खिलाफ 10 आपराधिक मामलों की जानकारी दी थी। इनमें दिल्ली, पटना और मुजफ्फरपुर के केस शामिल हैं। आरोपों में मारपीट, धमकी, हथियार के बल पर डराने और सरकारी कर्मचारियों को गोली मारने की धमकी जैसे मामले दर्ज हैं। हालांकि बचाव पक्ष का कहना था कि अब तक किसी भी मामले में उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया था और कई मामलों में या तो चार्जशीट दाखिल नहीं हुई या वे बरी हो चुके हैं।
किस मामले में हुई सजा?
राजू सिंह को 31 दिसंबर 2018 की रात दिल्ली के फतेहपुर बेरी स्थित रोज फार्म हाउस में हुई हर्ष फायरिंग के मामले में दोषी ठहराया गया है। न्यू ईयर पार्टी के दौरान हुई फायरिंग में आर्किटेक्ट डॉ. अर्चना गुप्ता के सिर में गोली लग गई थी। उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बाद में उनकी मौत हो गई।
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने राजू सिंह को आईपीसी की धारा 304 (भाग-2) यानी गैर इरादतन हत्या और आर्म्स एक्ट के उल्लंघन का दोषी मानते हुए 4 साल की जेल की सजा सुनाई। अदालत ने साथ ही मृतका के पति विकास गुप्ता को 25 लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया।
अब क्यों जाएगी विधायकी?
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) के तहत यदि किसी सांसद या विधायक को किसी आपराधिक मामले में दो साल या उससे अधिक की सजा मिलती है तो उसकी सदस्यता उसी दिन से समाप्त हो जाती है। चूंकि राजू सिंह को 4 साल की सजा मिली है, इसलिए उनकी विधानसभा सदस्यता भी खत्म होना तय माना जा रहा है।
कोर्ट से मांगी थी नरमी
सजा तय होने से पहले राजू सिंह ने अदालत से कम सजा देने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि डॉ. अर्चना गुप्ता उनके बड़े भाई के दोस्त की पत्नी थीं और पूरा परिवार उन्हें भाभी जैसा सम्मान देता था। उन्होंने अदालत में कहा कि यह घटना जानबूझकर नहीं हुई और इससे उनके परिवार ने भी एक करीबी सदस्य को खोया है।
सरकारी पक्ष ने अदालत में कहा कि भीड़भाड़ वाली पार्टी में हथियार से फायरिंग करना बेहद गंभीर लापरवाही थी। अभियोजन ने अधिकतम सजा की मांग करते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं में निर्दोष लोगों की जान चली जाती है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।
2018 की उस रात क्या हुआ था?
31 दिसंबर 2018 को राजू सिंह और उनके भाई संजय सिंह ने दक्षिण दिल्ली के रोज फार्म हाउस में न्यू ईयर पार्टी रखी थी। इस पार्टी में रियल एस्टेट कारोबारी विकास गुप्ता अपनी पत्नी डॉ. अर्चना गुप्ता और बेटी के साथ पहुंचे थे। पुलिस की जांच के अनुसार रात 12 बजे नए साल का जश्न शुरू होते ही फायरिंग हुई और कुछ ही देर बाद डॉ. अर्चना गुप्ता गोली लगने से डांस फ्लोर पर गिर गईं।
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस फार्म हाउस पहुंची, लेकिन तब तक राजू सिंह और उनके कुछ साथी वहां से जा चुके थे। जांच में दावा किया गया कि घटनास्थल को पानी से धोया गया था और खाली कारतूस भी हटा दिए गए थे। बाद में पुलिस ने राजू सिंह और उनके ड्राइवर हरि सिंह को उत्तर प्रदेश के कुशीनगर से गिरफ्तार किया।
फायरिंग कैसे हुई?
पुलिस जांच में सामने आया कि उस रात कुल तीन गोलियां चली थीं। आरोप है कि राजू सिंह ने अपनी लाइसेंसी .22 पिस्टल से दो राउंड फायर किए, जबकि उनके ड्राइवर हरि सिंह ने .315 बोर राइफल से एक गोली चलाई। इन्हीं में से एक गोली डॉ. अर्चना गुप्ता के सिर में लगी थी। दोनों हथियार लाइसेंसी थे।
सबूत मिटाने के भी लगे आरोप
चार्जशीट में कहा गया कि घटना के बाद खून साफ करने और कारतूस हटाने की कोशिश की गई। आरोप है कि राजू सिंह ने डीजे स्टाफ और वेटरों को खून साफ करने के लिए पैसे देने की पेशकश की थी। हालांकि उन्होंने पूछताछ के दौरान इन आरोपों से इनकार करते हुए इसे एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा बताया।
अर्चना गुप्ता कौन थीं?
डॉ. अर्चना गुप्ता पेशे से आर्किटेक्ट और लेखिका थीं। वह गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी की पूर्व छात्रा थीं और दो बच्चों की मां थीं। उन्हें ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद उनके पति विकास गुप्ता ने उनकी किडनी दान करने का फैसला लिया था।
अदालत ने पहले ही माना था दोषी
6 जून को अदालत ने 97 पन्नों के फैसले में राजू सिंह को गैर इरादतन हत्या का दोषी करार दिया था। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि समारोहों में हर्ष फायरिंग एक गंभीर सामाजिक समस्या बन चुकी है और ऐसी लापरवाही से अक्सर निर्दोष लोगों की जान चली जाती है। शनिवार को इसी मामले में सजा सुनाते हुए अदालत ने 4 साल की जेल और 25 लाख रुपये मुआवजे का आदेश दिया।
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