Who is Monika Kapoor: CBI की गिरफ्त में मोनिका कपूर, ज्वेलरी के कारोबार की आड़ में की थी करोड़ों की धोखाधड़ी
Who is Monika Kapoor: 25 साल से फरार चल रही धोखाधड़ी की आरोपी मोनिका कपूर (Monika Kapoor) अब आखिरकार CBI की गिरफ्त में आ गई है। बुधवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अमेरिका से उसके प्रत्यर्पण की पुष्टि की और अधिकारियों के मुताबिक, बुधवार रात तक मोनिका कपूर को लेकर फ्लाइट भारत पहुंच सकती है।
अमेरिका की ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट न्यूयॉर्क (Eastern District of New York) की अदालत ने भारत और अमेरिका के बीच प्रत्यर्पण संधि के तहत मोनिका को भारत भेजने की मंजूरी दी थी। मोनिका कपूर ने 1999 में भारत से फरार होकर अमेरिका में शरण ली थी।

ज्वेलरी के कारोबार की आड़ में किया घोटाला
मोनिका पर आरोप है कि उसने अपने दो भाइयों- राजन खन्ना (Rajan Khanna) और राजीव खन्ना (Rajiv Khanna)- के साथ मिलकर ज्वेलरी के कारोबार की आड़ में एक बड़ा इंपोर्ट-एक्सपोर्ट घोटाला किया था। इन लोगों ने मिलकर फर्जी शिपिंग दस्तावेज, बिल और इनवॉयस तैयार किए और भारत सरकार से ड्यूटी-फ्री कच्चा माल (सोना) मंगवाने की मंजूरी ली।
इस तरह उन्होंने 1998 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर छह रिप्लेनिशमेंट लाइसेंस हासिल किए, जिनसे लगभग ₹2.36 करोड़ का सोना खरीदा गया। इन लाइसेंसों को बाद में इन्होंने अहमदाबाद स्थित एक कंपनी Deep Exports को प्रीमियम पर बेच दिया, जिसने उनका इस्तेमाल ड्यूटी-फ्री गोल्ड के इंपोर्ट के लिए किया।
सरकार को हुआ 1.44 करोड़ का सीधा नुकसान
इस पूरे घोटाले से सरकार को ₹1.44 करोड़ का सीधा नुकसान हुआ। अगर विदेशी मुद्रा के नुकसान को भी शामिल किया जाए तो यह रकम \$6,79,000 (करीब ₹5.7 करोड़) के आसपास बैठती है। CBI ने इस मामले में 2004 में चार्जशीट दाखिल की थी। लेकिन मोनिका कपूर जांच में कभी शामिल नहीं हुई और अदालत से भी लगातार गैरहाज़िर रही। इसके चलते उसे 2006 में 'घोषित अपराधी' (Proclaimed Offender) घोषित कर दिया गया।
2010 में CBI ने इंटरपोल के जरिए रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवाया और अमेरिका से आधिकारिक तौर पर प्रत्यर्पण (Extradition) की मांग की। इस बीच, स्थानीय अदालत ने उसके दोनों भाइयों - राजन और राजीव - को 2017 में दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
अब जब मोनिका कपूर को अमेरिका से भारत लाया जा रहा है, तो यह न सिर्फ CBI के लिए बड़ी कामयाबी है, बल्कि भारत की कानून व्यवस्था के लिए भी एक मिसाल है कि आर्थिक अपराध करके भी कोई हमेशा कानून से बच नहीं सकता।












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