हिन्दू और भारतीय अलग-अलग शब्द नहीं, दोनों का मतलब एक: भागवत

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नई दिल्ली। आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने कहा है कि आरएसएस में शामिल होने के बाद संगठन को छोड़ना बहुत मुश्किल है लेकिन किसी पर संगठन में बने रहने को लेकर कोई पांबदी भी नहीं है।

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राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की स्थापना के 90 वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा है कि आरएसएस दुनिया में मानव विकास का एक ऐसा अनूठा मॉडल है, जो कहीं और देखने को नहीं मिलता।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि लोग अपनी मर्जी से संघ में शामिल होने या इसे छोड़ने के लिए आजाद हैं, लेकिन संगठन को समझने के लिए किसी भी व्यक्ति को खुले विचार का होना चाहिए।

भागवत ने कहा कि आरएसएस को वही व्यक्ति समझ सकता है जिसके भीतर इसे जानने और समझने की ललक हो। उन्होंने कहा कि जिज्ञासु आदमी ही संघ को जान सकता है।

भागवत ने कहा कि आरएसएस मे शामिल लोगों के लिए संघ एक आदत की तरह से है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ को एक लत बताते हुए कहा कि जिनको संघ की लत लग जाती है, वे कहीं और नहीं जा सकते।

आजादी के लिए संघ से बहुत संघर्ष किया: भागवत

भागवत ने कहा कि संघ से जुड़ जाने के बाद इसे छोड़ ना पाने की बात को लोग समझते हैं और कुछ लोग इसी वजह से संगठन में शामिल नहीं होते।

भागवत ने कहा कि आरएसएस ने देश की आजादी में बड़ा योगदान किया है, लेकिन हमें कभी भी इसकी चर्चा सुनने को नहीं मिलती है।

भागवत ने एक बार फिर कहा कि भारत में पैदा होने वाला हर इंसान हिन्दू है। उन्होंने कहा कि हिन्दू और भारतीय दो अलग-अलग शब्द नहीं है, दोनों का मतलब एक ही है। आरएसएस के इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और डॉ. हर्षवर्धन भी शामिल रहे।

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English summary
Mohan Bhagwat says People are free to join or leave the RSS
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