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16वीं लोक सभा में मोदी का आख़िरी भाषण चुनावी भाषण ज़्यादा: नज़रिया

By Bbc Hindi

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16वीं लोक सभा के अपने आख़िरी भाषण में ख़ास तौर पर कांग्रेस और गांधी परिवार के भ्रष्टाचार पर बात की.

इसके अलावा उन्होंने खुद और अपनी भारतीय जनता पार्टी को भारत का नैतिक संरक्षक बताया. उन्होंने ऐसे दिखाया कि देश का भला सिर्फ़ वही सोचते हैं.

रफ़ाल डील को लेकर विपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हुए वो बचाव की मुद्रा में नज़र आए.

बजट में असंगठित क्षेत्र और मध्यमवर्ग के लोगों के लिए की गई घोषणाओं को लेकर वो काफ़ी उत्साह में बोल रहे थे.

हालांकि वो सबसे लिए नौकरियां पैदा करने और ख़ासकर कृषि के मुद्दों का बचाव करते दिखे. विपक्ष आगामी लोक सभा चुनाव के मुद्देनज़र इन्हीं मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष पर हमलावर है.

नरेंद्र मोदी
AFP
नरेंद्र मोदी

हालांकि वो किसानों की समस्या और नोटबंदी-जीएसटी से ग्रामीण और छोटे-मध्यम उद्योगों को हुए नुकसान पर सबसे आख़िर में बोले.

ऐसा लगा जैसे उनके पास इन मुद्दों पर बचाव में बोलने के लिए ज़्यादा कुछ नहीं था या वो शर्मिंदा होने से बचना चाहते थे.

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में बीजेपी की हार का बड़ा कारण नोटबंदी और जीएसटी था. मोदी सरकार की इन नीतियों का वहां की अर्थव्यवस्था पर काफ़ी बुरा असर पड़ा था.

लेकिन अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी इन नीतियों की बड़ाई की और ये मानने से भी इनकार किया कि ये नीतियां उनकी हार का कारण बनीं.

उल्टा उन्होंने कांग्रेस को ही आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वो किसानों की कर्ज़ माफ़ी के रूप में झूठे सपने बेच रही है. उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि कांग्रेस के राज में किसानों को फसल पर पहले से कम एमएसपी मिल रहा है.

'कर्ज़ माफी घोटाला साबित होगी'

मोदी ने तो यहां तक कहा कि दलालों की वजह से ये कर्ज़ माफ़ी घोटाला साबित होगी. उन्होंने कहा कि इस तरह की कर्ज़ माफ़ी के बजाए किसानों के लिए न्यूनतम आमदनी समर्थन योजना चलानी चाहिए, जैसा कि उन्होंने इस बार के केंद्रीय बजट में प्रावधान किया है.

मोदी का कहना था कि इस तरह की योजना ही किसानों की समस्या का हल हो सकती है, क्योंकि इसमें कोई बिचौलिया नहीं होगा, बल्कि पैसा सीधे किसानों के खाते में जाएगा.

यहां मोदी ये भूल गए कि छत्तीगढ़ में और कुछ हद तक राजस्थान में भी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के कर्ज़ माफ़ीू के वादे ने ही पार्टी के पक्ष में काम किया. इससे कहीं ना कहीं ये देखा गया कि कर्ज़ माफ़ी इस तरह की शॉर्ट टर्म योजनाओं से ज़्यादा असरदार हैं.

उनका भाषण न्यू इंडिया की धारणा पर बुना हुआ था, जिसमें कई सारी उम्मीदें, आशाएं और संकल्प थे जो सभी तरह की चुनौतियों और भ्रष्टाचार का जवाब थे जिसे अगर समय पर ठीक नहीं किया गया तो वो दीमक की तरह सिस्टम को अंदर से खोखला कर देगा.

नरेंद्र मोदी
Getty Images
नरेंद्र मोदी

मोदी ने कुछ ऐसे ही भाषण 2014 के चुनाव प्रचार के दौरान भी दिए थे. उनमें कांग्रेस और गांध-नेहरू परिवार केंद्र में थे.

मोदी ने हमेशा ही इस परिवार और भ्रष्टाचार को एक-दूसरे का पर्याय बताया. वो भूल रहे हैं कि आने वाली चुनावों में कांग्रेस को ही बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है.

समकालीन भारत के दो भागों बीसी और एडी को परिभाषित किया जा रहा है. कहा जा रहा है कि महात्मा गांधी खुद "कांग्रेस मुक्त भारत" चाहते थे. उन्होंने आज़ादी के बाद कांग्रेस को भंग करने की वकालत की थी.

बीसी का मतलब बिफ़ोर कांग्रेस और एडी का मतलब आफ्टर डाइनेस्टी.

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Getty Images
नरेंद्र मोदी

पहली बार वोट करने वालों पर नज़र

मोदी की नज़र खास तौर पर उन युवा वोटरों पर है जो अप्रैल-मई में होने वाले आम चुनावों में पहली बार मतदान करेंगे. ऐसा इसलिए क्योंकि ऐसे ही युवा वोटरों ने मोदी के "अच्छे दिन" के नारे को सुनकर 2014 में उन्हें वोट देकर जीत दिलाई थी.

पिछले साढ़े चार साल में अर्थव्यवस्था में काफ़ी उतार-चढ़ाव आया. प्राइवेट सेक्टर में सरकार का सीधा और बहुत ज़्यादा हस्तक्षेप रहा, जबकि "मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस" का दावा किया गया था.

जीएसटी और नोटबंदी की वजह से छोटे और मध्यम उद्योगों की कमर टूटी, जिसका सीधा असर असंगठित क्षेत्र और रोज़गार पर हुई.

लेकिन मोदी इन मुद्दों पर जवाब देने के बजाए कांग्रेस से अपनी सरकार की तुलना कर रहे हैं. वो कहते हैं कि कांग्रेस "सत्ता भोग" की राजनीति कर रही है, जबकि वो और उनकी सरकार "सेवा भाव" से काम कर रही है.

वो पॉवर बनाम लोगों की सेवा की बात करते हैं और इसके कई उद्हारण देते हैं जो अक्सर आरोप ही होते हैं. जैसे वो कहते हैं कि कांग्रेस सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों को खाली कर रही है, वो अपने खास दोस्तों को महज़ एक कॉल पर बड़े -बड़े उधार दे रही है.

उनका आरोप है कि इस परिवार के एक सदस्य (रॉबर्ट वाड्रा) के पास हर जगह अथाह संपत्तियां हैं और उनका कहना है कि कांग्रेस रफाल डील को ख़राब करना चाहती है, क्योंकि वो चाहती है कि उसके "दलाल" और "चाचा-मामा" के इस कॉन्ट्रेक्ट को परिवार के किसी करीबी को दिला दें.

नरेंद्र मोदी
Getty Images
नरेंद्र मोदी

मोदी ने विपक्ष के प्रस्तावित गठबंधन को "महामिलावट" गठबंधन बताया. उन्होंने कहा कि इसमें शामिल होने वाल ज़्यादातर दल वंशवाद की देन हैं. उन्होंने कहा कि ये दल साथ आकर खुद को ज़िंदा रखना चाहते हैं.

2019 के इस चुनाव में मोदी की एक ईमानदार छवि पेश करने की कोशिश की जाएगी और ये दिखाया जाएगा कि वो ही एकलौते राजनेता हैं जो देश को साफ़ और चमकता हुआ रख सकते हैं.

जिस तरह से जांच एजेंसियां लगभग हर विपक्षी पार्टी के नेताओं और उनके परिवार वालों के पीछे लगी हैं, ऐसे में बीजेपी को उम्मीद है कि वो ईमानदार बनाम भ्रष्ट की कहानी दिखाकर शहरी इलाकों में जीएसटी और नोटबंदी जैसे मुद्दों को धुंधला कर देगी.

लेकिन ग्रामीण इलाकों का वो क्या करेगी? मोदी के भाषण में ग्रामीण भारत के लोगों के लिए कोई जवाब नहीं था.

BBC Hindi
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English summary
Modis last speech in the 16th Lok Sabha is more in election speech
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