Modi New Cabinet: पीएम मोदी की नई सरकार कैसे काम करेगी? इन 7 संकेतों से समझिए
PM Modi New government: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पहली बार केंद्र में ऐसी सरकार चलाने का मौका मिला है, जिसमें भाजपा के पास पूर्ण बहुमत नहीं है और यह सच्चे अर्थों में एक गठबंधन सरकार है।
जिस तरह से पीएम मोदी ने रविवार को अपने साथ 71 मंत्रियों को मंत्रिपरिषद में जगह दी है, उन चेहरों को देखने से साफ है कि भले ही यह एनडीए की सरकार है, लेकिन इसमें भाजपा का प्रभुत्व किसी तरह से कम नहीं होने जा रहा है। पीएम मोदी को मिलाकर उनके मंत्रिपरिषद में बीजेपी से कुल 61 और सहयोगी दलों से 11 नेताओं को जगह मिली है।

मोदी के तीसरे कार्यकाल में भी भाजपा प्रभुत्व कायम
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पिछली सरकार में शामिल भाजपा के सभी बड़े चेहरों को कैबिनेट में प्राथमिकता तो दी ही है, कुछ और कद्दावर पार्टी चेहरों को शामिल किया है। यह भी स्पष्ट है कि गृह, रक्षा, विदेश, वित्त जैसे सारे अहम मंत्रालय बीजेपी के पास ही थे और आगे भी बने रहेंगे। मतलब, यह गठबंधन की पहले की सरकारों से बिल्कुल अलग गठबंधन सरकार देखने को मिलेगी।
सहयोगियों का सम्मान, लेकिन दखलंदाजी नहीं चलेगी!
प्रधानमंत्री मोदी समझते हैं कि जितना सहयोगी दल उनकी सरकार के लिए जरूरी हैं, उससे ज्यादा सहयोगी दलों के लिए बीजेपी आवश्यक है। इसलिए, अटकलों से अलग किसी भी सहयोगी की ओर से सरकार गठन में किसी तरह का खास दबाव नहीं दिख रहा है। ना ही नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू जैसे नेता बिहार और आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए किसी भी हद तक जाने का ही संकेत दे रहे हैं।
जेडीयू और टीडीपी दोनों को ही अपने राज्यों के विकास के लिए फंड चाहिए और पीएम मोदी उसमें किसी तरह की उन्हें परेशानी नहीं आने देंगे।
पहले की तरह मजबूत सरकार
अगर मोदी सरकार पर सहयोगियों का दबाव बन पाना मुश्किल है तो फिर इस बार भी उनकी सरकार पहले की तरह ही चलती रहेगी, इसके सारे संकेत मौजूद हैं। दोनों बड़े सहयोगी कम से कम इस समय सरकार के कार्य में किसी तरह की दखल डालने के मूड में नहीं हैं, उन दोनों का सारा जोर अपने राज्यों तक ही सीमित है।
6 पूर्व मुख्यमंत्रियों की वजह से सरकार का काम आसान
मोदी सरकार में 6 मंत्री ऐसे हैं, जिन्हें मुख्यमंत्री के तौर पर शासन चलाने का अनुभव है। इसलिए पीएमओ तो पहले की तरह ही प्रभावी रहेगा, लेकिन संबंधित मंत्रालयों में कार्यों की गति और तेज होने की संभावना रहेगी। प्रधानमंत्री कार्यालय को सिर्फ निगरानी रखनी पड़ेगी, इससे उसका काम और ज्यादा सुव्यवस्थित होगा।
चुनाव वाले राज्यों पर फोकस
इस साल महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड में विधानसभा चुनाव हैं। शपथग्रहण समारोह से स्पष्ट है कि पीएम मोदी ने नई सरकार में इन तीनों राज्यों पर काफी फोकस किया है। हरियाणा में भले ही 5 सीटें मिली हैं, लेकिन 3 मंत्री शामिल करके भाजपा ने अपने जातीय गणित को और ठोस करने की कोशिश की है। इसी तरह झारखंड में उसने गैर-आदिवासी वोटरों पर फोकस किया है। महाराष्ट्र में भी पार्टी गठबंधन को साथ लेकर चलने का संकेत दे रही है।
मुस्लिम चेहरों से दूरी
कम से कम अभी के लिए मोदी सरकार में किसी मुस्लिम चेहरे को जगह नहीं मिली है। हो सकता है कि आगे चलकर किसी मुसलमान नेता को मंत्रिपरिषद में जगह मिल जाए। फिलहाल तो यही लगता है कि 10 साल तक 'सबका, साथ और सबका विकास' के सिद्धांत का पालन करने के बाद भी इस समुदाय ने कथित तौर पर जिस तरह से विपक्षी इंडिया ब्लॉक के लिए गोलबंदी की है, यह उसी का परिणाम है। आगे देखना होगा कि इस दिशा में बीजेपी की राजनीति कैसे बढ़ती है।
मोदी सरकार विपक्ष के दबाव से परे
विपक्ष ने मोदी सरकार के दोनों कार्यकालों में यह नरेटिव बनाने की कोशिश की है कि यह सिर्फ अमीरों के लिए काम करती है। अडाणी और अंबानी जैसे दो उद्योगपतियों के नाम तो उनकी जुबानों से उतरते ही नहीं। लेकिन, फिर भी पीएम मोदी के शपथग्रहण समारोह में गौतम अडाणी और मुकेश अंबानी की उपस्थिति ने साफ कर दिया कि सरकार विपक्ष के रवैए से परेशान होने वाली नहीं है।
इसी तरह से इस सरकार पर हिंदू संगठनों का भी प्रभाव कम नहीं होने वाला है। जिस तरह से इस बार खासकर मुस्लिम वोट के विपक्ष के खाते में जाने की बातें कही जा रही है, उसके बाद भाजपा ने अपनी रणनीति और ठोस करने का संकेत किया है।












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