मोदी ने फर्स्ट-टाइम वोटरों से मांगा था वोट, क्या हुआ असर? आ गया पूरा आंकड़ा
नई दिल्ली- नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने पिछले पांच साल तक न्यू इंडिया (New India) की बात की थी। अब जो चुनाव के बाद सर्वे सामने आ रहे हैं, उससे साफ लग रहा है कि यंग इंडिया ने उन्हें दिल खोलकर वोट दिया है। हम यहां हर एज ग्रुप से नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और बीजेपी (BJP) को मिले वोटों और बाकी पार्टियों को मिले वोटों की तुलना करेंगे। लेकिन, सबसे पहले उन फर्स्ट टाइम वोटरों के फैसले की एनालिसिस कर लेते हैं, जिनसे प्रधानमंत्री ने कुछ साल पहले से बार-बार लगातार वोटर बनने और वोटिंग जरूर करने की अपील कर रहे थे।

मोदी की अपील का काफी असर पड़ा
लोकनीति-सीएसडीए (Lokniti-CSDS) ने जो पोस्ट पोल सर्वे किया है उसके मुताबिक फर्स्ट-टाइम वोटरों (First-Time Voters) पर इसबार भी बीजेपी और नरेंद्र मोदी का असर सबसे ज्यादा पड़ा। मतलब हम 18 से 22 साल के युवाओं के वोटिंग पैटर्न को देखें, तो 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 41% फर्स्ट-टाइम वोटरों (First-Time Voters) ने वोट दिया है। यह आंकड़ा 2014 से 4% ज्यादा है। जबकि, बीजेपी के सहयोगियों के वोट शेयर में इस आयु वर्ग में कोई बदलवा नहीं आया है और वह 7% पर ही बरकरार है। वहीं कांग्रेस को भी उसको मिले वोटों में इसबार फर्स्ट-टाइम वोटरों (First-Time Voters) का रोल बढ़ा है और उसे 3% ज्यादा ने वोट दिया है और यह आंकड़ा 20% है। कांग्रेस के सहयोगियों को भी 3% ज्यादा फर्स्ट-टाइम वोटरों (First-Time Voters) का समर्थन मिला है, जो इसबार 5% हो गया है। लेकिन, फिर फर्स्ट-टाइम वोटरों (First-Time Voters) पर कांग्रेस का प्रभाव बीजेपी की तुलना में आधे से भी कम है।

हर आयु वर्ग का वोटिंग पैटर्न
बीजेपी को 23 साल से ऊपर हर आयु वर्ग में इसबार वोटरों का समर्थन 6 से 8% तक बढ़ा है। मसलन, 23-27 आयु वर्ग में 40% (8% सबसे ज्यादा), 28-35 आयु वर्ग में 39% (6 % ज्यादा), 36-45 आयु वर्ग में 37% (7 % ज्यादा), 46-55 आयु वर्ग में 36% (6 % ज्यादा) और 56 साल से ऊपर के आयु वर्ग में 35% (7 % ज्यादा) समर्थन बढ़ा है। ओवरऑल वोट शेयर में यह आंकड़ा 37% है, जो कि 6 % ज्यादा है। वहीं 23 साल से ऊपर के आयु वर्ग में कांग्रेस का वोट शेयर हर आयु वर्ग में या तो स्थिर रहा है या उसमें 1 से 2% तक उतार-चढ़ाव आया है। लेकिन कुल वोट शेयर उसका 2014 की तरह ही 19% पर बरकरार है। वहीं, बीजेपी के सहयोगियों का कुल वोट शेयर स्थिर है, लेकिन कांग्रेस के सहयोगियों का वोट शेयर 4% बढ़कर 7% हो गया है।

सफल हो गई रणनीति
आंकड़ों से ये भी सामने आ रहा है कि यंग फीमेल वोटरों ने भी मोदी के नाम पर पहले से ज्यादा वोट दिया है। यानी बीजेपी और मोदी की रणनीति पूरी तरह से सफल हो गई है। उन्होंने 2017 से ही 21वीं सदी के वोटरों को न्यू इंडिया का वोटर कहकर प्रोत्साहित करने की कोशिशें शुरू कर दी थी। इसका परिणाम ये रहा कि युवाओं ने तो उन्हें सबसे ज्यादा वोट दिए ही हैं, बाकी के हर आयु वर्ग में भी भाजपा का जनाधार काफी बढ़ गया है।
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