केंद्र का SC में हलफनामा, बताया- किन परिस्थितियों में मौत के कारण को माना जाएगा कोविड-19
नई दिल्ली, 12 सितंबर: हाल ही में कोरोना वायरस की दूसरी लहर खत्म हुई, जो काफी भयवाह थी। इसके साथ ही देश में मृतकों की संख्या 4.42 लाख के पार पहुंच गई है। लंबे वक्त से ये आरोप लग रहे थे कि कोरोना मरीजों के डेथ सर्टिफिकेट में हेरफेर हो रही है। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई, साथ ही इस संबंध में जल्द नियम बनाने के निर्देश दिए थे। जिस पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड डेथ सर्टिफिकेट की गाइडलाइन जारी कर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया है।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उन्होंने गाइडलाइन में सब कुछ साफ कर दिया है। अगर कोई मरीज कोरोना पॉजिटिव पाया जाता है और 30 दिन के अंदर उसकी मौत होती है, तो उसे कोविड डेथ माना जाएगा। वहीं अगर कोई कोविड-19 मरीज की मौत हादसे, आत्महत्या, जहर खाने आदि के कारण होती है, तो उसे कोविड डेथ नहीं माना जाएगा। कोविड डेथ सर्टिफिकेट के लिए आरटीपीसीआर, मॉलिक्यूलर, रैपिड एंटीजन या किसी दूसरे टेस्ट से संक्रमण की पुष्टि होनी जरूरी है।
सरकार ने आगे कहा कि मृत्यु चाहे घर पर हो या अस्पताल में, मरीज के परिजनों को रजिस्ट्रेशन ऑफ बर्थ एंड डेथ एक्ट 1969 की धारा 10 के तहत जो फॉर्म-4 और 4ए जारी किया जाएगा, उसमें मौत का कारण कोविड-19 डेथ लिखा होगा। ICMR के अभी तक के अध्ययन में पता चाल है कि 95 प्रतिशत मौतें किसी व्यक्ति के कोविड-19 पॉजिटिव पाए जाने के 25 दिनों के भीतर होती हैं, लेकिन सरकार ने गाइडलाइन में समय सीमा को 30 दिन रखा है।
केंद्र के मुताबिक अगर मृतक के परिजन सर्टिफिकेट पर लिखे मौत के कारण से संतुष्ट नहीं हैं, तो उसके लिए भी प्रावधान किया गया है। जिसके तहत जिलास्तर की एक कमेटी बनाई जाएगी। इसमें एडिशनल डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर, सीएमओ, मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल या मेडिसिन विभाग के हेड और सब्जेक्ट एक्सपर्ट होंगे, जो मौत का आधिकारिक दस्तावेज जारी करेंगे। वहीं अगर मरीज अस्पताल में 30 दिनों से ज्यादा लगातार भर्ती है और उसकी मौत हो जाती है, तो भी उसे कोविड डेथ माना जाएगा।












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