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Waqf Amendment Bill को JPC में क्यों भेजा, मोदी सरकार की ये प्लानिंग तो नहीं ?

Rajya Sabha Election 2024: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने पिछले हफ्ते जिस तरह से संसद में वक्फ संशोधन बिल, 2024 पेश किया, उससे लगा कि सरकार इसे तत्काल पास करवाने के मूड में है। लेकिन, उस विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) में भेज दिया गया।

मोदी सरकार के पिछले एक दशक के कामकाज को देखने पर इसको लेकर कई तरह के सवाल उठे। खासकर यह चर्चा शुरू हुई कि जब इस मसले पर चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी और नीतीश कुमार की जेडीयू का समर्थन है तो फिर इस इसी सत्र में पास कराने की जगह सरकार ने जेपीसी का रास्ता क्यों चुना?

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राज्यसभा उपचुनाव के बाद सरकार को पूर्ण बहुमत मिलने की संभावना
दरअसल, अगले महीने राज्यसभा की 12 सीटों के लिए उपचुनाव घोषित हुए हैं। उम्मीद है कि इस चुनाव के बाद भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए को ऊपरी सदन में स्पष्ट बहुमत मिल जाए। माना जा रहा है कि इसके बाद सरकार के लिए वक्फ बिल के अलावा अन्य विधेयकों को पास करवाना आसान हो जाएगा।

अभी राज्यसभा में सरकार को बहुमत जुटाने में हो सकती है दिक्कत
अभी राज्यसभा में एनडीए के पास अपने दम पर पूर्ण बहुमत नहीं है। जबकि, राज्यसभा में अभी 229 सांसद ही हैं। इसमें बीजेपी के 87 और उसके सहयोगियों को मिलाकर यह संख्या 105 होती है। अगर इसमें 6 मौजूदा मनोनित सांसदों को भी सरकार के साथ गिन लें तो भी यह संख्या 111 तक ही पहुंचती है। जबकि, मौजूदा सदस्य संख्या के हिसाब से जादुई आंकड़ा 115 का होता है।

विपक्षी इंडिया ब्लॉक भी राज्यसभा में है बहुमत से दूर
विपक्षी इंडिया ब्लॉक के पास भी राज्यसभा में बहुमत नहीं है। कांग्रेस के सिर्फ 26 सांसद हैं और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे उससे मात्र 2 ज्यादा सांसदों की वजह से ही ऊपरी सदन में नेता विपक्ष के पद पर बैठे हुए हैं। इंडिया ब्लॉक के सभी दलों को मिलाकर भी इस विपक्षी गठबंधन का आंकड़ा 84 तक ही पहुंचता है।

इनके अलावा दोनों गठबंधनों से अलग दो पार्टियां हैं- वाईएसआर कांग्रेस पार्टी और बीजू जनता दल। इनमें से वाईएसआरसीपी के 11 और बीजेडी के 8 सांसद हैं।

3 सितंबर को होंगे राज्यसभा के उपचुनाव
ये दोनों ही दल पिछली लोकसभा चुनावों तक भाजपा को राज्यसभा में हर मुश्किल वक्त में साथ देते रहे थे। लेकिन, अभी राजनीति करवट ले चुकी है। चुनाव आयोग ने राज्यसभा की 9 राज्यों की खाली हुई 12 सीटों के लिए 3 सितंबर को चुनाव करवाने का फैसला किया है।

राज्यसभा उपचुनाव के बाद भाजपा गठबंधन को मिल सकता है पूर्ण बहुमत
इन 12 सीटों में से बीजेपी और उसके एनडीए सहयोगियों को 11 सीटें मिलने की संभावना है। ऐसा होते ही राज्यसभा में सदस्यों की कुल संख्या 245 हो जाएगी और भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टियों की 122 सीटें हो जाएंगी और वह जादुई आंकड़ा अपने दम पर पार कर लेगी।

लेकिन, अभी जम्मू और कश्मीर विधानसभा का गठन नहीं हुआ है, इसलिए वहां की 4 राज्यसभा सीटें भी खाली हैं। मतलब, राज्यसभा की प्रभावी सीटों की संख्या तब भी 241 ही रहेगी। यानी राज्यसभा चुनावों के बाद मोदी सरकार के लिए वक्फ संशोधन बिल समेत अन्य विधेयकों को ऊपरी सदन से भी पारित करवाना बहुत आसान हो जाएगा।

राज्यसभा के 10 सांसद लोकसभा के लिए चुने गए
राज्यसभा की खाली पड़ी 10 सीटों पर तत्कालीन सांसद लोकसभा चुनावों में निर्वाचित हुए हैं, इसलिए वहां चुनाव आयोजित किए जा रहे हैं। वहीं तेलंगाना और ओडिशा के भी एक-एक सीटिंग सांसदों के इस्तीफे की वजह से उनकी सीटें खाली हुई हैं।

ओडिशा, तेलंगाना में एक-एक सांसद ने छोड़ी सदस्यता
तेलंगाना में बीआरएस सांसद के केशव राव सदन की सदस्यता से इस्तीफा देकर हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए हैं। वहीं ओडिशा की बीजेडी सांसद ममता मोहंता ने अपनी सदस्यता से त्यागपत्र देकर भाजपा का कमल पकड़ा है।

वहीं राज्यसभा के जिन सांसदों ने लोकसभा के लिए चुनाकर अपनी सदस्यता छोड़ी है, उनमें केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, सर्बानंद सोनोवाल और ज्योतिरादित्य सिंधिया के अलावा बीजेपी के कामख्या प्रसाद तासा, विवेक ठाकुर, उदयनराजे भोसले और बिप्लब कुमार देब, कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल और दीपेंद्र सिंह हुड्डा के अलावा आरजेडी की मीसा भारती शामिल हैं। (इनपुट-पीटीआई)

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