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विपक्ष के झूठे दावों को मोदी सरकार ने किया भंडाफोड, कहा- एक दशक में दोगुना हुआ रबी फसलों का MSP

विपक्ष के झूठे प्रचार का भंडाफोड़ करते हुए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने कहा, 'पिछले 10 सालों में रबी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लगभग दोगुना वृद्धि हुई है।' गेहूं के लिए MSP 2014-15 में 1,400 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 2,425 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है।

पिछले दशक की तुलना में इसमें 73% से अधिक की वृद्धि हुई है। इतना ही नहीं, दालों के लिए एमएसपी अब 6,700 रुपये है, जो 2014-15 की तुलना में 2.3 गुना अधिक है। इसी तरह, रेपसीड और सरसों का एमएसपी बढ़कर 5,950 रुपये हो गया है। कुसुम का एमएसपी भी 5,950 रुपये है, जो इसकी पिछली दर से लगभग दोगुना है।

PM Narendra Modi

चना और जौ जैसी अन्य रबी फसलों में पिछले दस वर्षों में लगभग 1.8 गुना वृद्धि हुई है। इस साल जून में सरकार ने खरीफ फसलों के लिए एमएसपी भी बढ़ा दी। धान का एमएसपी 2014-15 के 1,360 रुपये से बढ़कर 2,300 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। इसी अवधि में ज्वार का दाम 1,530 रुपये से बढ़कर 3,371 रुपये हो गया।

बाजरा और मक्का का एमएसपी लगभग दोगुना होकर क्रमशः 2,625 रुपये और 2,225 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। तो वहीं, अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किसानों की चिंताओं को दूर करने के लिए पीएम मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने एक्स पर लिखा,

'किसान कल्याण के प्रति समर्पित मोदी जी के नेतृत्व में केंद्रीय कैबिनेट ने आज 2025-26 सीजन के लिए रबी फसलों के MSP में वृद्धि को मंजूरी दी। रेपसीड और सरसों के MSP में ₹300 प्रति क्विंटल की सबसे बड़ी बढ़ोतरी की गई है, जबकि मसूर की MSP में भी ₹275 प्रति क्विंटल की ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। इन बढ़ी हुई MSP से किसानों की आय में वृद्धि होगी और हमारे किसान और भी समृद्ध बनेंगे। किसानों की हर चिंता का ख्याल रखने के लिए मोदी जी का धन्यवाद व्यक्त करता हूं।'

न्यूज़ 18 की खबर के मुताबिक, 2018-19 के केंद्रीय बजट में एमएसपी को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत से कम से कम 1.5 गुना करने का लक्ष्य रखा गया था। इस नीति के कारण नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में रबी और खरीफ दोनों फसलों की कीमतों में लगातार वृद्धि हुई है।

किसानों की आय पर प्रभाव
मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जोर देकर कहा, 'कुछ लोग एमएसपी पर फर्जी दावे कर रहे हैं, ये आंकड़े ऐसे लोगों के सामने पेश किए जाने चाहिए। यह किसानों की आय और किसानों के वास्तविक कल्याण में बहुत बड़ा योगदान है।" सरकार ने यह भी कहा कि यूपीए शासन के दौरान 2004 से 2014 के बीच एमएसपी पर खरीदी गई।

उस वक्त फसल का मूल्य 7.41 लाख करोड़ रुपये था, जबकि मोदी शासन के एक दशक में खरीद मूल्य बढ़कर 20.64 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इतना ही नहीं, वैष्णव ने कहा कि हरियाणा के किसानों ने मीडिया को बताया है कि उन्हें फसलों पर जो एमएसपी मिला है, वह संतोषजनक है और उन्होंने भाजपा का समर्थन किया है।

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