कोई गिफ्ट या स्पा ऑफर नहीं: डॉक्टरों को मेडिकल-फर्मों की 'रिश्वत' रोकने के लिए ड्राफ्ट लाई सरकार
नई दिल्ली। दवाओं की बिक्री बढ़ाने के लिए दवा कंपनियों द्वारा डाक्टरों को मुफ्त में चीजें देना कानूनन प्रतिबंधित है। इस बारे में देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने बीते दिनों एपेक्स लेबोरेटरीज प्राइवेट लिमिटेड की याचिका खारिज कर दी थी। फार्मा-मेडिकल उपकरणों वाली कंपनियों द्वारा डॉक्टरों को उपहार देने के मुद्दे पर अब केंद्र सरकार मेडिकल डिवाइस मार्केटिंग प्रैक्टिस के लिए यूनिफॉर्म कोड का मसौदा लेकर आई है। जिसमें फार्मा फर्मों या मेडिकल उपकरणों वाली कंपनियों से डॉक्टरों को किसी भी तरह के उपहार या स्पा ऑफर पर रोक लगाने की बात कही गई है।

सरकार के 16 पन्नों के ड्राफ्ट डॉक्यूमेंट में कहा गया है, 'यह एक वॉलंटियर कोड होगा। सभी फार्मा फर्मों या मेडिकल उपकरणों वाली कंपनियां इसके दायरे में होगी। अगर यह पाया जाता है कि इसे चिकित्सा उपकरण यूनियनों और कंपनियों द्वारा प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया गया है, तो सरकार इसे एक वैधानिक कोड बनाने पर विचार कर सकती है।

मालूम हो कि, डॉक्टरों के लिए उपहार स्वरूप मुफ्त में चीजें दिए जाने और मनोरंजक गतिविधियों जैसे थिएटर, लाइव कॉमेडी या संगीत, खेल आयोजन, गोल्फ, स्कीइंग, क्रूज, स्पा या वैकेशन एंजॉय कराने की खबरें आती रही हैं। जिन्हें फार्मा फर्मों द्वारा डॉक्टरों को रिश्वत की कोशिश के तौर पर देखा जाता है। कोर्ट ने इस पर आपत्ति जताई थी। कोर्ट ने कहा था कि यह बेहद चिंता की बात है कि दवा कंपनियों द्वारा मुफ्त में दिए जाने वाले सोने के सिक्कों फ्रिज एलसीडी टीवी से लेकर विदेश यात्रा जैसे उपहारों के बदले किसी डाक्टर के परामर्श में हेरा-फेरी करवाई जा सकती है। जज ने कहा था कि, मुफ्त की चीजें तकनीकी रूप से मुफ्त नहीं हैं। सामान्य तौर पर मुफ्त की इन चीजों की कीमत दवा में शामिल होती है जिससे उनकी कीमत बढ़ जाती है जिससे लोगों के लिए एक लगातार चलने वाले खतरनाक चक्र का निर्माण होता है। उन्होंने यही भी कहा था कि, डॉक्टर का अपने मरीज के साथ विश्वास का रिश्ता होता है।'' लिहाजा मोदी सरकार कोर्ट के निर्देशों को ध्यान में रखकर, एक अहम ड्राफ्ट लाई है।

सरकार के इस ड्राफ्ट में, डॉक्यूमेंट के अनुसार, "किसी चिकित्सा उपकरण कंपनी या उसके किसी एजेंट द्वारा चिकित्सा उपकरणों का उपयोग करने, निर्धारित करने या आपूर्ति करने के लिए योग्य व्यक्तियों को कोई उपहार, आर्थिक लाभ या लाभ की आपूर्ति, पेशकश या वादा नहीं किया जाएगा।" इस यूनिफॉर्म कोड के दायरे में डॉक्टरों और उनके परिवार के सदस्यों के व्यक्तिगत लाभ के लिए उपहार देना, जैसे मनोरंजन कार्यक्रमों के टिकट सुविधा मुहैया कराना भी होगा।
यह ड्राफ्ट रसायन और उर्वरक मंत्रालय के तहत फार्मास्यूटिकल्स विभाग ने जारी किया है और इस बारे में इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों से 15 अप्रैल तक प्रतिक्रिया मांगी है। 16-पेज के ड्राफ्ट के डॉक्यूमेंट में कहा गया है, "यह वर्तमान के लिए एक स्वैच्छिक कोड है और इसके कार्यान्वयन की समीक्षा इसके जारी होने की तारीख से छह महीने की अवधि के बाद की जाएगी। यदि यह पाया जाता है कि इसे फार्मा यूनियनों/ कंपनियों द्वारा प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया गया है, तो सरकार इसे एक वैधानिक कोड बनाने पर विचार कर सकती है।,"

ड्राफ्ट में उल्लेख किया गया है कि, "कंपनियां या फार्मा यूनियन / प्रतिनिधि या उनकी ओर से काम करने वाला कोई भी व्यक्ति देश के अंदर या बाहर कोई भी यात्रा सुविधा को नहीं बढाएगा, जिसमें रेल, हवाई, जहाज, क्रूज टिकट, सशुल्क छुट्टियां, स्वास्थ्य पेशेवरों और उनके परिवार के सदस्यों को छुट्टी शामिल हैं। इसके अलावा एक प्रतिनिधि के रूप में किसी सम्मेलन, सेमिनार, कार्यशालाओं, सीएमई कार्यक्रम में भाग लेना भी इसके दायरे में होगा। इसके अलावा यह भी स्पष्ट किया जाता है कि किसी दवा कंपनी द्वारा किसी दवा को बढ़ावा देने या सूचना के प्रसार के लिए आयोजित किसी संगोष्ठी, सम्मेलन या बैठक में, यदि कोई चिकित्सक प्रतिनिधि के रूप में भाग लेता है, तो यह उसके अपने खर्च पर होगा। कंपनियों से कहा जाएगा कि, "किसी भी बहाने से वांलिटियरी में, व्यक्तिगत उद्देश्य के लिए किसी भी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता को कोई नकद या मौद्रिक अनुदान का भुगतान नहीं किया जाए।"

कोड में कहा गया है, ''हालांकि, कंपनियों को कभी-कभी डॉक्टरों को मामूली, उपयुक्त शैक्षिक आइटम प्रदान करने की अनुमति दी जाएगी, जो रोगियों को लाभ पहुंचाते हैं या एचसीपी के लिए एक वास्तविक शैक्षिक कार्य करते हैं। इसके अलावा, कंपनियां कभी-कभी मामूली, उपयुक्त ब्रांड रिकॉल आइटम प्रदान कर सकती हैं जो मूल्य और आवृत्ति में उचित हों।" कोड में कहा गया है, "हालांकि, ऐसे ब्रांड रिकॉल आइटम/ब्रांड रिमाइंडर का मूल्य 1,000 रुपये से अधिक नहीं होना चाहिए।"
इसके कहा गया है कि, "दवाओं के नि:शुल्क सैंपल किसी ऐसे व्यक्ति को नहीं दिए जाएंगे जो इस तरह के उत्पाद को निर्धारित करने के लिए योग्य नहीं है। जहां उत्पादों के नमूने एक चिकित्सा प्रतिनिधि द्वारा वितरित किए जाते हैं, नमूना सीधे ऐसे उत्पाद को निर्धारित करने के लिए योग्य व्यक्ति या उनकी ओर से नमूना प्राप्त करने के लिए अधिकृत व्यक्ति को सौंप जाना चाहिए।, "

सरकार ने स्पष्ट तौर पर यह कहा है कि, इंडस्ट्री के लिए यह कोड "स्वैच्छिक" होगा। हालांकि, स्व-नियमन पर जोर देते हुए, सरकार ने ये चेतावनी भी दी है कि अगर इसे अच्छी तरह से लागू नहीं किया गया तो वो इसे "वैधानिक" बना सकती है। इस कोड के ड्राफ्ट को लाने के साथ ही सरकार के रसायन और उर्वरक मंत्रालय के तहत फार्मास्यूटिकल्स विभाग ने मेडिकल-इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों से प्रतिक्रिया के लिए 16 मार्च से 15 अप्रैल तक का समय दिया है। सरकार की ओर से कहा गया है कि, यूसीएमडीएमपी का मसौदा एक स्वैच्छिक कोड है और इसके कार्यान्वयन की समीक्षा इसके जारी होने की तारीख से छह महीने की अवधि के बाद की जाएगी।
ड्राफ्ट की मुख्य विशेषताएं
सरकार के ड्राफ्ट का यह कोड फार्मास्यूटिकल्स उद्योग को विनियमित करने वाले कोड के समान है। जिसके अनुसार, "किसी चिकित्सा उपकरण कंपनी या उसके किसी एजेंट द्वारा चिकित्सा उपकरणों का उपयोग करने, निर्धारित करने या आपूर्ति करने के लिए योग्य व्यक्तियों को कोई उपहार, आर्थिक लाभ या ऑफर आदि का वादा नहीं किया जाएगा।"
हालांकि, कंपनियां अपने वैध वैज्ञानिक, शैक्षिक और प्रशिक्षण कार्यक्रमों और अन्य गतिविधियों के समर्थन में प्रशिक्षण संस्थानों जैसे मेडिकल स्कूलों, शिक्षण अस्पतालों, अस्पतालों और अनुमोदित शिक्षण सीटों वाले संस्थानों और अन्य तृतीय-पक्ष संस्थाओं को शैक्षिक अनुदान प्रदान कर सकती हैं। इसके अलावा, कंपनियों को कभी-कभी डॉक्टरों को मामूली, उपयुक्त शैक्षिक आइटम प्रदान करने की अनुमति दी जाएगी जो "रोगियों को लाभ पहुंचाते हैं या एचसीपी के लिए एक वास्तविक शैक्षिक कार्य करते हैं।"
ड्राफ्ट के अनुसार, इस यूनिफॉर्म के कोड में मनोरंजन और मनोरंजक गतिविधियों के कुछ उदाहरणों में थिएटर, लाइव कॉमेडी या संगीत, खेल आयोजन, गोल्फ, स्कीइंग, परिभ्रमण, स्पा या वैकेशन भी शामिल हैं।












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