केंद्र सरकार ने खड़े किए हाथ, सुप्रीम कोर्ट में कहा कोरोना पीड़ितों को नहीं दे सकते मुआवजा
नई दिल्ली, 20 जून। देश में कोरोना संक्रमण से लाखों लोगों कि जान जा चुकी है। कई परिवार इस महामारी में उजड़ गए लेकिन केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कहा गया है कि वह कोरोना पीड़ितों के परिवार को 4 लाख रुपए का मुआवजा नहीं दे सकती है क्योंकि यह प्राकृतिक आपदा नहीं है और नियम के अनुसार मुआवजा प्राकृतिक आपदा पर ही लागू होता है। सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में जो 183 पेज की एफिडेविट दायर की गई है उसमे कहा गया है कि कोरोना से 3.85 लाख लोगों की मौत हो गई है, यह संख्या और बढ़ सकती है। देश बड़े वित्तीय संकट से गुजर रहा है, लिहाजा हर किसी को पैसे नहीं दिए जा सकते हैं। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था कि कोरोना से मरने वालों को मुआवजे को लेकर सरकार की क्या राय है। सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर करके मांग की गई थी कि जिन लोगों की कोरोना से मौत हुई है और उनके पास मृत्यु प्रमाण पत्र है उनके परिजनों को 4 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए।

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सरकार की ओर से जवाब में डिजास्टर मैनेजमेंट लॉ का हवाला देते हुए कहा गया है कि मुआवजा प्राकृति आपदा जैसे भूकंप, बाढ़ में दिया जाता है। जिस तरह से कोरोना इतने बड़े स्तर पर फैला है उसे देखते हुए हर किसी को मुआवजा देना ठीक नहीं होगा। महामारी के दौरान जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और कम कर आने की वजह से वित्तीय संकट बढ़ा है लिहाजा राज्य लाखों पीड़ितों को मुआवजा देने का बोझ नहीं उठा सकते हैं। सरकार ने कोर्ट को यह भी याद दिलाया है कि कोर्ट ने अपने पहले फैसले में कहा था कि कोर्ट को सरकार की नीतियों से दूर रहना चाहिए, न्यायपालिका केंद्र सरकार की नीतियों का फैसला नहीं कर सकती है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर शपथ पत्र में सरकार की ओर से कहा गया है कि कोरोना से मरने वालों के मृत्यु प्रमाण पत्र में मृत्यु की वजह कोरोना जरूर लिखी जाएगी। जो डॉक्टर ऐसा नहीं करते हैं उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस मामले की सुप्रीम कोर्ट में 21 जून को फिर से सुनवाई होगी। बता दें कि देश में कोरोना से अभी तक 3,86,713 लोगों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि देश में अभी भी कोरोना से संक्रमित लोगो की बात करें तो यह संख्या 7,29,243 है। अच्छी बात यह है कि देश में अभी तक 27,66,93,572 लोगों को कोरोना का टीका लगाया जा चुका है।












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