मोदी सरकार ने लगाया ई-सिगरेट पर बैन, नियम तोड़ने पर जेल के साथ 5 लाख तक का जुर्माना

नई दिल्ली। केंद्रीय कैबिनेट की बुधवार को अहम बैठक हुई। इस बैठक में ई-सिगरेट पर पाबंदी लगाने का फैसला लिया गया है। इसके साथ ही कैबिनेट ने फैसले पर अमल के लिए लाए गए प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कैबिनेट मीटिंग में पारित किए गए प्रस्तावों के बारे में वित्तमंत्री मंत्री निर्मला सीतारमण और केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने जानकारी दी।

ई-सिगरेट पर लगी पाबंदी

ई-सिगरेट पर लगी पाबंदी

वित्तमंत्री मंत्री निर्मला सीतारमण ने कैबिनेट में पारित प्रस्तावों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि सरकार द्वारा ई-सिगरेट पर पाबंदी लगाने का फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा कि ई-सिगरेट के इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट, प्रोडक्शन और बिक्री, वितरण पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके साथ ही ई-सिगरेट के प्रमोशन पर भी रोक लगा दी गई है। वित्तमंत्री ने कहा, 'ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि इसके 400 से अधिक ब्रांड हैं, जिनमें से अभी तक कोई भी भारत में निर्मित नहीं है और वे 150 से अधिक फ्लेवर में आते हैं।'

कैबिनेट की बैठक में लिया गया फैसला

बता दें कि हाल ही में ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स द्वारा प्रोहिबिशन ऑफ ई-सिगरेट ऑर्डिंनेंस 2019 को जांचा गया था। ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स ने इसमें मामूली बदलाव का सुझाव दिया था। दरअसल, ई-सिगरेट का सेवन करने से व्यक्ति को डिप्रेशन होने की संभावना दोगुनी हो जाती है। एक शोध के मुताबिक, जो लोग ई-सिगरेट का सेवन करते हैं, उन्हें हार्ट अटैक का खतरा 56 फीसदी तक बढ़ जाता है। वहीं, लंबे समय तक इसका सेवन करने ब्लड क्लोट की समस्या भी पैदा हो सकती है।

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    3 साल की जेल और 5 लाख रु तक के जुर्माने का प्रावधान

    इस अध्यादेश में हेल्थ मिनिस्ट्री ने पहली बार नियमों के उल्लंघन पर एक साल तक की जेल और एक लाख रु का जुर्माना का प्रस्ताव दिया गया है। वहीं, एक से अधिक बार नियम तोड़ने पर मिनिस्ट्री ने 5 लाख रु जुर्माना और 3 साल तक की जेल की सिफारिश की है। ई-सिगरेट, हीट-नॉट-बर्न स्मोकिंग डिवाइसेज, वेप एंड ई-निकोटिन फ्लेवर्ड हुक्का जैसे वैकल्पिक ध्रूमपान उपकरणों पर प्रतिबंध लगाना मोदी सरकार के पहले 100 दिनों के एजेंडे की प्राथमिकताओं में शामिल था। ई-सिगरेट एक तरह का इलेक्ट्रॉनिक इन्हेलर होता है, जिसमें निकोटीन और अन्य रसायनयुक्त तरल भरा जाता है। ईएनडीएस ऐसे उपकरणों को कहा जाता है, जिनका प्रयोग किसी घोल को गर्म कर एरोसोल बनाने के लिए किया जाता है, जिसमें विभिन्न फ्लेवर होते हैं। लेकिन ई-सिगरेट में जिस लिक्विड का इस्तेमाल किया जाता है, वह कई बार निकोटिन होता है और कई बार ज्यादा खतरनाक रसायन होते हैं।

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