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मोदी सरकार ने 2030 तक भारत को बाल विवाह मुक्त करने की ठानी, इस कुप्रथा से 2026 तक 1 लाख गांवों को करेगी मुक्त

Anti-Child Marriage Campaign: भारत सरकार के 'बाल विवाह मुक्त भारत' अभियान के एक साल पूरे हो चुके हैं। इसके साथ ही मोदी सरकार ने बाल विवाह रोको अभियान के तहत 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान भी शुरू किया है। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) ने वर्ष 2030 तक भारत को बाल विवाह मुक्त बनाने के लक्ष्य को नई गति दी है। संगठन ने ऐलान किया है कि अगले एक साल में वह बाल विवाह की उच्च दर वाले एक लाख गांवों को इस कुप्रथा से मुक्त करेगा।

इस पहल के लिए देश के 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 450 जिलों में संवेदनशील गांवों की पहचान की गई है। इनमें 15 जिलों में बाल विवाह की दर 50 प्रतिशत से अधिक, 45 जिलों में 40 प्रतिशत से ज्यादा और 95 जिलों में 30 प्रतिशत से अधिक है। शेष जिले राष्ट्रीय औसत 23.3 प्रतिशत के करीब या उससे ऊपर हैं, जहाँ तत्काल हस्तक्षेप न होने पर स्थिति बिगड़ने की आशंका है।

Anti-Child Marriage Campaign

चिन्हित संवेदनशील जिलों में उत्तर प्रदेश से सर्वाधिक 41, मध्य प्रदेश से 39, बिहार और राजस्थान से 38-38 तथा असम से 30 जिले शामिल हैं। इसके अलावा, आंध्र प्रदेश व तेलंगाना में 26-26, ओडिशा में 25, झारखंड में 24 और पश्चिम बंगाल में 23 जिलों में भी संवेदनशील गांवों की पहचान हुई है। दिल्ली के सभी 11 जिले भी बाल विवाह के प्रति संवेदनशील माने गए हैं।

बाल अधिकारों के संरक्षक JRC

बाल अधिकारों के संरक्षण को समर्पित जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) 250 से अधिक नागरिक समाज संगठनों का देश का सबसे बड़ा नेटवर्क है। सहयोगी संगठनों संग इसने पिछले एक साल में एक लाख से अधिक बाल विवाह रुकवाए हैं।

"बाल विरोधी अभियान एक मॉडल बन चुका है"

केंद्र सरकार के अभियान का समर्थन करते हुए और अगले साल के रोडमैप पर, जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा, "बाल विवाह मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने में सामुदायिक समूहों, धार्मिक नेताओं, पंचायतों व नागरिकों की सबसे मुख्य भूमिका है। सरकार का बाल विवाह मुक्त भारत अभियान पूरी दुनिया के लिए एक मॉडल बन चुका है। यह बच्चों के खिलाफ इस अपराध के खात्मे के हमारे सामूहिक प्रयासों व सामूहिक प्रतिबद्धता का भी प्रतीक है।

एक लाख से भी ज्यादा बाल विवाह रुकवाए

पिछले साल एक लाख से भी ज्यादा बाल विवाह रोके और रुकवाए गए जो यह दिखाता है कि जब समाज एकजुट होता है तो बदलाव अपरिहार्य है। हमने वादा किया है कि अगले एक साल में हम एक लाख गांवों को बाल विवाह मुक्त गांव बनाएंगे ताकि हर बच्चे को जीवन में आगे बढ़ने का अवसर व एक सुरक्षित भविष्य मिले। विकसित भारत के व्यापक लक्ष्य की प्राप्ति में इन प्रयासों की गति काफी अहमियत रखती है। हम अगले तीन वर्षों में देश से बाल विवाह के पूरी तरह खात्मे के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे और हमें विश्वास है कि यह संभव है।"

मोदी सरकार ने 100 दिवसीय देशव्यापी सघन अभियान चलाने का किया ऐलान

बाल विवाह खत्म करने के लिए केंद्र सरकार ने 100 दिवसीय देशव्यापी सघन अभियान चलाने की अधिसूचना जारी की। इसमें स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, पंचायती राज, ग्रामीण विकास, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता और उच्च शिक्षा मंत्रालयों व विभागों को सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। 100 दिवसीय यह कार्य योजना 8 मार्च, 2026 को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर समाप्त होगी। तीन चरणों के इस अभियान का लक्ष्य 2029 से पहले भारत से बाल विवाह का खात्मा करना है।

इस अभियान के पहले चरण में स्कूलों, कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता पर जोर रहेगा। दूसरा चरण मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारों जैसे धार्मिक स्थलों और विवाह सेवाओं से जुड़े बैंक्वेट हॉल, बैंड-बाजा, कैटरर, डेकोरेटर पर केंद्रित होगा। तीसरे व अंतिम चरण में, बाल विवाह रोकने के लिए ग्राम पंचायतों, नगरपालिकाओं के वार्डों और सामुदायिक भागीदारी को मजबूत किया जाएगा।

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