जब अपने सौभाग्य को.....उद्धव ठाकरे के महाराष्ट्र की सत्ता गंवाने पर चचेरे भाई राज ठाकरे ने किया ये कटाक्ष
मुंबई, 30 जून: महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे ने बुधवार की रात मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। एकनाथ शिंदे के साथा शिवसेना में बगावत के बाद उद्धव ठाकरे ने प्रदेश की सत्ता तो गवांई ही साथ ही उनकी राजनीतिक पार्टी शिवसेना में भी दो फाड़ हो गई है। वहीं अब उद्धव ठाकरे के इस्तीफे के बाद उनके चचेरे भाई और मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने उद्धव पर कटाक्ष करते हुए एक ट्टीट किया है।

शिंदे से ज्यादा खुश नजर आए राज ठाकरे
शिवसेना के सबसे बड़े विद्रोही एकनाथ शिंदे से भी ज्यादा खुश राज ठाकरे ने आज ट्वीट किया। जिसे शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे पर कटाक्ष के रूप में देखा जा रहा है।

राज ठाकरे ने ट्टीट में किया ये कटाक्ष
राज ठाकरे ने ट्टीट में लिखा जब कोई अपने सौभाग्य को अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में गलत समझता है उसी से अपने पतन की यात्रा शुरू होती है।राज ठाकरे ने जो ये पोस्ट लिखी है वो मराठी हिंदी और अंग्रेजी तीनों में लिखी है।

राज ठाकरे ने इशारों में कह दी बड़ी बात
इन दो लाइनों में राज ने ना केवल कटाक्ष किया है बल्कि इशारों में बड़ी बात भी कह दी और अपनी पुरानी भड़ास निकाल दी। राज ठाकरे ने ट्टीट में बताया कि उद्धव जो शिवसेना पार्टी प्रमख बने और महाराष्ट्र में कांग्रेस एनसीपी के गठबंधन से सरकार बनाई उसे वो अपनी पर्सनल उपलब्धि मान बैठे थे। हालांकि ये सब उन्हें सौभाग्य से मिला उन्होंने अपने दम पर कुछ भी हासिल नहीं किया है।

विद्रोह कर राज ठाकरे ने बना ली थी अपनी अलग पार्टी
याद रहें राज ठाकरे जो बाल ठाकरे का मजबूत कंधा बनकर शिवसेना को बढ़ाने में लगे थे और कभी उत्तराधिकारी माने जाते थे लेकिन अचानक ने राज के बजाय उद्धव को पार्टी की कमान सौंप दी गई थी तब राज ठाकरे ने पार्टी के संरक्षक बालासाहेब ठाकरे के खिलाफ बगावत कर अपनी अगल मनसे पार्टी बना ली थी। राज ठाकरे ने लगभग दो दशक पहले सेना के भीतर विद्रोह का नेतृत्व किया और अपनी पार्टी, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) का गठन किया। हालांकि एकनाथ शिंदे के वो विरोधी हैं, जो भाजपा के साथ एक समझौते में सत्ता में हिस्सेदारी बनाने जा रहे हैं।

2005 में राज ठाकरे को लगा था ये झटका
गौरलतब है कि राज ठाकरे को अब तक राजनीतिक सीमित ही सफलता मिली है। राज ठाकरे के पिता श्रीकांत ठाकरे शिवसेना संस्थापक और उद्धव ठाकरे के पिता बाल ठाकरे के छोटे भाई थे। उग्र भाषणों और आक्रामक बयानबाजी के लिए जाने जाने वाले उन्हें उद्धव ठाकरे के विपरीत अपने चाचा बालासाहेब ठाकरे के स्वाभाविक उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता था। लेकिन जब उद्धव ठाकरे, जो आठ साल बड़े हैं, को 2000 के दशक के मध्य में उत्तराधिकारी के रूप में चुना गया था, तो वे नाराज हो गए थे। उन्होंने 2005 के अंत में परिवार के नेतृत्व वाली पार्टी छोड़ दी।
— Raj Thackeray (@RajThackeray) June 30, 2022












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