बुध ग्रह से टूटकर गुजरात में गिरा था उल्कापिंड, 170 साल बाद दिखी ऐसी घटना
गुजरात के बनासकांठा में अगस्त 2022 में एक उल्कापिंड गिरा था। ये खगोलीय घटना करीब 170 साल बाद भारत में देखने को मिली थी।

इंडियन एकेडमी ऑफ साइंसेज पीयर-रिव्यू जर्नल करंट साइंस में पिछले महीने एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। इस रिपोर्ट में गुजरात के बनासकांठा में पिछले साल अगस्त महीने में जो उल्कापिंड गिरा था, उसका जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले साल 17 अगस्त को गुजरात के बनासकांठा जिले में गिरा उल्कापिंड 1852 के बाद पहली बार भारत में देखा गया एक दुर्लभ खगोलीय घटना है। इससे पहले ऐसी दुर्लभ खगोलीय घटना 1852 में देश में देखने को मिली थी। अहमदाबाद के फिजिकल रिसर्च लैबोरेटरी के स्पेशन विभाग में तैनात वैज्ञानिकों ने इस उल्कापिंड के बारे में विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने बताया है कि ये एक ऑब्राइट का एक दुर्लभ नमूना था।

उल्कापिंड गिरने का ये एक असाधारण रिकॉर्ड है
अहमदाबाद के फिजिकल रिसर्च लैबोरेटरी के स्पेशन विभाग में तैनात वैज्ञानिकों ने अपने रिसर्च के आधार पर पेपर लिखा था। रिसर्च के आधार पर उन्होंने कहा कि ये उल्कापिंड एंस्टाइट नामक खनिज तत्व से भरा हुआ था। अखबार ने कहा कि भारतीय उपमहाद्वीप में उल्कापिंड गिरने का एक असाधारण रिकॉर्ड है। भारत में आखिरी ऑब्राइट गिरावट 1852 में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में दर्ज की गई थी।

बुध ग्रह से टूटकर गिरा था उल्कापिंड
शोधकर्ताओं ने कहा कि ऑब्राइट दुर्लभ उल्कापिंड हैं जो सौर मंडल में बेहद कम विभेदित मूल शरीर से उत्पन्न होते हैं। शोधकर्ताओं ने कहा कि आम तौर पर इस तरह के गुणों वाले खनिज तत्व बुध ग्रह की सतह पर पाए जाते हैं। ऐसा हो सकता है कि ये उल्कापिंड बुध ग्रह से टूटकर गिरा था।
वैज्ञानिकों ने अपने रिसर्च पेपर में बताया है कि इस तरह के उल्कापिंड काफी रेयर होते हैं। आमतौर पर इस तरह के उल्कापिंड ऐसे होते हैं, जो सौर मंडल के किसी बड़े उल्कापिंड से टूट कर अलग हो जाते हैं।

काफी चमकीले होते हैं ये उल्कापिंड
ये उल्कापिंड आग्नेय चट्टानें हैं जो बहुत कम या बिना मुक्त ऑक्सीजन के बनती हैं। उनमें अलग-अलग तरह के ऐसे खनिज होते हैं जो पृथ्वी पर नहीं पाए जाते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह छोटे उल्कापिंड काफी चमकीले होते हैं।
वैज्ञानिकों ने कहा कि गुजरात के बनासकांठा में गिरे उल्कापिंड में कई तरह के एक्जॉटिक मिनरल भरे थे। इस तरह के मिनरल पृथ्वी पर नहीं मिलता है। इस तरह के गुणों वाले मिनरल आम तौर पर बुध ग्रह पर ही पाए जाते हैं।

भविष्य में खोज में होगी आसानी
वैज्ञानिकों ने कहा कि उल्कापिंड का यह दुर्लभ नमूना न केवल मौजूदा उल्कापिंड डेटाबेस में सुधार करता है बल्कि भविष्य में ग्रहों की प्रक्रियाओं को समझने के लिए महत्वपूर्ण होगा। वैज्ञानिकों ने अपने रिसर्च पेपर में लिखा है कि भविष्य में खगोलीय घटनाओं को देखने में आसानी मिलेगी।

गुजरात में उल्कापिंड नीम के पेड़ से टकराया था
बनासकांठा के रंटिला गांव के निवासियों ने अगस्त 2022 में उल्कापिंड गिरने की सूचना दी थी। उनमें से एक ने कहा कि उसने पास से गुजर रहे जेट विमान के समान गड़गड़ाहट की आवाज सुनी। उल्कापिंड नीम के पेड़ से टकराया और कई टुकड़ों में टूट गया था। ग्रामीणों ने इसके सबसे बड़े वजन करीब 200 ग्राम के टुकड़े एकत्र किए थे।
रंटिला से करीब 10 किमी दूर रवेल गांव के पास उल्कापिंड का एक टुकड़ा गिरा और तेज आवाज हुई। टुकड़े ने एक पोर्च के फर्श की टाइलों को क्षतिग्रस्त कर दिया और एक छोटा गड्ढा बना दिया। निवासियों ने कहा कि उल्कापिंड से तेज तीखी गंध आ रही थी।












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