मेकेदातु प्रोजेक्ट को लेकर तमिलनाडु-कर्नाटक आमने सामने, बाउंड्री बनाने का काम शुरू

नई दिल्ली, 05जुलाई। कर्नाटक में चल रहे मेकेदातु परियोजना को लेकर कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बीच तकरार चल रही है। स्टालिन ने येदियुरप्पा से अपील की है कि इस प्रोजेक्ट को रोक दें। इस बीच कर्नाटक के गृह मंत्री बासवाराज बोम्मई ने कहा कि तमिलनाडु कावेरी की मुख्यधारा और इसकी छोटी धारा को लेकर लंबे समय से विवाद कर रहा है। ट्रिब्युनल और कावेरी बोर्ड का आदेश बिल्कुल स्पष्ट है, मेकेदातु में हमने बाउंड्री के निर्माण का काम शुरू कर दिया है। अगर कुछ भी डूबता है तो वो हमारी जमीन में डूबेगा।

mekedatu

दीवार बनाने का काम शुरू

गृहमंत्री ने कहा कि हम तमिलनाडु का कोई भी पानी के क्षेत्र का प्रोजेक्ट नहीं रोक रहे हैं, अधिक पानी को लेकर ये लोग सुप्रीम कोर्ट गए थे। अब तमिलनाडु की नई सरकार इस मामले पर राजनीति कर रही है। हम इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। मेकेदातु प्रोजेक्ट से दोनों ही राज्यों को फायदा होगा। हमे पीने का पानी मिलेगा। जब भी तमिलनाडु में बारिश कम होगी, हम पानी को यहां इकट्ठा करेंगे। कृष्णा राज सागर के अलावा कहीं भी पानी नहीं इकट्ठा किया जाएगा। इन लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में इसका विरोध किया था, हमारे वकील इसको देख रहे हैं।

येदियुरप्पा ने प्रोजेक्ट के समर्थन के लिए लिखा पत्र

गौर करने वाली बात है कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने स्टालिन को पत्र लिखकर अपील की थी कि वह इस प्रोजेक्ट का विरोध ना करें। उन्होंने द्विपक्षीय बैठक की पेशकश की थी जिससे कि सभी मुद्दों पर चर्चा करके उसका हल निकाला जाए। लेकिन स्टालिन ने इस प्रोजेक्ट का समर्थन करने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि इस प्रोजेक्ट से तमिलनाडु के लोगों को पानी की मुश्किल का सामना करना पड़ेगा।

क्या है मेकेदातु प्रोजेक्ट
यह परियोजना कावेरी नदी पर स्थापित की जा रही है, जोकि तमिलनाडु के रामानगरम जिले में मेकेदातु के पास है। इस परियोजना के जरिए 48 मिलियन क्युबिक पानी को एकत्रित किया जाएगा। इसके लिए बांध का निर्माण किया जाएगा। जिसके जरिए बड़े जलाशय में पानी को एकत्रित किया जाएगा और इसका इस्तेमाल बेंगलुरू में पेयजल की आपूर्ति और भूजल को रिचार्ज करने में किया जाएगा।

क्या विवाद है
तमिलनाडु सरकार का कहना है कि यह परियोजना नदी जल प्राधिकरण के अंतिम निर्णय के खिलाफ है। इस परियोजना से कृष्णाराज सागर और कबीनी जालशय में जल एकत्रित होगा, जिससे तमिलनाडू में पानी का प्रवाह प्रभावित होगा। वहीं कर्नाटक का कहना है कि यह परियोजना पहले से निर्धारित मात्रा में पानी जो जा रहा है उसे बाधित नहीं करेगा, इसका इस्तेमाल सिंचाई के लिए किया जाएगा। इस परियोजना के खिलाफ 2015 में काफी प्रदर्शन हुआ था।

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